पाराघाट में किसानों की जमीन, रोजगार और पुनर्वास का मुद्दा गरमाया

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

55–60 किसान परिवारों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 117 एकड़ भूमि की जांच और हक दिलाने की मांग

बिलासपुर । पाराघाट, बेलटुकरी और भनेसर क्षेत्र में किसानों की जमीन, रोजगार, पुनर्वास और शासकीय भूमि से जुड़े मामलों को लेकर किसानों ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं। जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री के नेतृत्व में तीनों पंचायतों के करीब 55–60 किसान परिवारों के प्रतिनिधि कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और विभिन्न बिंदुओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर उनका अधिकार दिलाने की मांग की।

117 एकड़ जमीन का मामला

किसानों के अनुसार, ग्राम पाराघाट, बेलटुकरी और भनेसर क्षेत्र में वसुंधरा पावर प्लांट के लिए वर्ष 2003 से 2009 के बीच करीब 117 एकड़ कृषि भूमि किसानों से नौकरी और पुनर्वास के आश्वासन पर खरीदी गई थी। किसानों का आरोप है कि भूमि लिए जाने के बाद करीब 12–13 वर्षों तक प्लांट स्थापित नहीं किया गया। बाद में वर्ष 2022 में उक्त जमीन को दूसरी कंपनी या प्लांट को बेचने अथवा हस्तांतरित किए जाने की जानकारी सामने आई।

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किसानों ने प्रशासन से भूमि खरीदी की शर्तों, प्लांट की स्वीकृतियों, भूमि उपयोग में देरी और वर्ष 2022 में हुए कथित हस्तांतरण की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जमीन निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग नहीं हुई है तो नियमानुसार भूमि वापसी अथवा उचित क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जानी चाहिए।

खसरा नंबर 170 की जांच की मांग

किसानों ने पाराघाट से नीलागर नदी तक स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 170, रकबा 10.21 एकड़ को लेकर भी शिकायत की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2022 में उक्त खसरे का बंटाकन कर करीब 2.94 एकड़ भूमि प्लांट के नाम दर्ज की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि घासभूमि एवं सामुदायिक उपयोग से जुड़ी रही है और यहां मनरेगा के तहत कार्य भी हुए हैं।

किसानों ने पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेख, बंटाकन तथा नामांतरण की जांच कर नियम विरुद्ध कार्रवाई पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

40 प्रभावित परिवारों के रोजगार-पुनर्वास का मुद्दा

राशि स्टील एवं पावर लिमिटेड, पाराघाट से प्रभावित करीब 40 किसान परिवारों के रोजगार और पुनर्वास का मामला भी ज्ञापन में उठाया गया। किसानों का कहना है कि भूमि लेते समय नौकरी और पुनर्वास का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सभी प्रभावित परिवारों को इसका लाभ नहीं मिला। उन्होंने कंपनी से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर पात्र परिवारों को रोजगार, पुनर्वास और वैधानिक लाभ दिलाने की मांग की।

दबाव बनाने का भी लगाया आरोप

किसानों ने आरोप लगाया कि प्लांट प्रबंधन से अपनी समस्याओं को लेकर बातचीत करने पर कुछ परिवारों पर पुलिस एवं प्रशासन के माध्यम से दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है। किसानों ने इसकी भी निष्पक्ष जांच और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार की रक्षा की मांग की।

किसानों के साथ खड़े रहने का दावा

महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि किसानों की जमीन उनके परिवार की आजीविका और भविष्य का आधार है। जिस उद्देश्य से जमीन ली गई थी, यदि उसकी पूर्ति नहीं हुई और जमीन दूसरे प्लांट या कंपनी को हस्तांतरित की गई, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और जरूरत पड़ने पर किसानों की आवाज लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मंचों पर उठाई जाएगी।

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