चिल्फी में कथित अवैध शराब बिक्री पर सवाल, वीडियो सामने आने के बाद पुलिस-प्रशासन की निगरानी पर उठी उंगली
किराना व अन्य दुकानों की आड़ में शराब बिक्री का दावा, जनप्रतिनिधि ने थाना पुलिस और साइबर सेल की भूमिका पर मांगी जांच
ग्रामीणों का आरोप—शिकायतों के बावजूद कथित कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं; आबकारी विभाग बोला- मामला संज्ञान में, शीघ्र होगी कार्रवाई
मुंगेली/लोरमी। मुंगेली जिले के चिल्फी थाना क्षेत्र में कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों के बीच इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वीडियो में दुकान की आड़ में कथित रूप से शराब की बिक्री किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

इसी बीच जनपद पंचायत लोरमी के सभापति एवं कांग्रेस नेता विद्यानंद चंद्राकर ने चिल्फी थाना पुलिस, थाना स्टाफ और साइबर सेल की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में कथित रूप से कोचियों के माध्यम से शराब उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि अवैध शराब की बिक्री हो रही है तो इसकी आपूर्ति कहां से हो रही है और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।

हालांकि पुलिस या साइबर सेल की ओर से लगाए गए इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल पूरे मामले को आरोप, शिकायत और सामने आए वीडियो के आधार पर जांच का विषय माना जा रहा है। वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


वीडियो सामने आने के बाद बढ़ी चर्चा
चिल्फी क्षेत्र में कथित अवैध शराब बिक्री का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वीडियो में दिखाई जा रही गतिविधि की पुष्टि होती है तो यह गंभीर मामला हो सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में कुछ किराना और अन्य दुकानों की आड़ में कथित रूप से शराब उपलब्ध कराए जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ग्रामीणों की मांग है कि केवल वायरल वीडियो की जांच तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि पूरे चिल्फी क्षेत्र में जांच कर यह पता लगाया जाए कि शराब की कथित अवैध बिक्री कहां-कहां हो रही है।
वीडियो कब और कहां बनाया गया, उसमें दिखाई दे रहे स्थान की पहचान क्या है और उसमें दिखाई जा रही गतिविधि वास्तव में अवैध शराब बिक्री से संबंधित है या नहीं—इन सभी बिंदुओं की पुष्टि भी जांच के दौरान किया जाना जरूरी होगा।

कोचियों के कथित सक्रिय होने की बात
मिली जानकारी के अनुसार चिल्फी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कथित शराब कोचियों के सक्रिय होने की बातें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर नियमों को दरकिनार कर शराब उपलब्ध कराए जाने की चर्चा है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी व्यक्ति, दुकान या अधिकारी को सीधे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। यदि शिकायतें सही हैं तो जांच में शराब की आपूर्ति के स्रोत से लेकर बिक्री के स्थान तक पूरी श्रृंखला सामने लाना महत्वपूर्ण होगा।

जनप्रतिनिधि ने पुलिस और साइबर सेल पर उठाए सवाल
जनपद पंचायत लोरमी के सभापति एवं कांग्रेस नेता विद्यानंद चंद्राकर ने मामले को लेकर चिल्फी थाना पुलिस, थाना स्टाफ और साइबर सेल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
चंद्राकर का कहना है कि यदि क्षेत्र में कथित रूप से अवैध शराब उपलब्ध हो रही है तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अधिकृत शराब दुकानों से निर्धारित व्यवस्था के तहत शराब की बिक्री होने के बावजूद कथित कोचियों तक शराब कैसे पहुंच रही है।
उनका कहना है कि मामले में शराब की आपूर्ति के स्रोत की जांच होने पर कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।
कथित वॉयस रिकॉर्डिंग का भी हवाला
विद्यानंद चंद्राकर ने अपने बयान में एक कथित वॉयस कॉल रिकॉर्डिंग का उल्लेख किया है। उनका दावा है कि एक कथित कोचिया से बातचीत के दौरान क्राइम ब्रांच के लोगों द्वारा शराब पहुंचाए जाने की बात कही गई।
यह आरोप गंभीर प्रकृति का है, लेकिन कथित रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता, आवाज की पहचान, बातचीत का पूरा संदर्भ और उसमें कही गई बातों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए रिकॉर्डिंग को पुलिस या किसी विभाग की संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
यदि यह रिकॉर्डिंग जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत की जाती है तो उसकी तकनीकी जांच, आवाज की पुष्टि और बातचीत के संदर्भ की जांच के बाद ही उसकी विश्वसनीयता को लेकर कोई निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

कई गांवों में बिक्री की बातें, जांच जरूरी
ग्रामीणों की ओर से दाऊकापा, फुलवारी, कोसमतरा, भाठा, जोतपुर, नथेला, मूछेल, गोल्हापारा, चिल्फी, डुमरहा, खपरीकला, लगरा और मानिकपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में कथित रूप से शराब की बिक्री की बातें सामने आने का दावा किया गया है।
इन गांवों में वास्तव में अवैध शराब की बिक्री हो रही है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए इन सभी स्थानों पर विभागीय स्तर पर जांच होने से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो कार्रवाई केवल शराब बेचने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि शराब की आपूर्ति के स्रोत का भी पता लगाया जाना चाहिए।

निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग द्वारा अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के दावे समय-समय पर सामने आते हैं। इसके बावजूद यदि दुकानों की आड़ में कथित अवैध शराब बिक्री का वीडियो सामने आता है तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि किसी विभाग की कार्यप्रणाली पर निष्कर्ष निकालने से पहले उपलब्ध रिकॉर्ड और कार्रवाई की वास्तविक स्थिति की समीक्षा आवश्यक है। यदि पूर्व में कार्रवाई की गई है तो उसका असर कितना हुआ और उसके बाद भी कथित बिक्री की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं, यह भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।
बच्चों और युवाओं के भविष्य की चिंता
विद्यानंद चंद्राकर ने अवैध शराब की बिक्री को सामाजिक समस्या बताते हुए बच्चों और युवाओं के भविष्य पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शराब आसानी से उपलब्ध होने की स्थिति परिवार और समाज के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जाए और जहां भी शिकायतें सामने आती हैं, वहां तत्काल जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
सरकार की नीतियों पर भी लगाए राजनीतिक आरोप
चंद्राकर ने अपने बयान में राज्य सरकार की शराब नीति, महतारी वंदन योजना और बिजली बिल की दरों को लेकर भी राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने सरकार की नीतियों को लेकर विभिन्न वर्गों में परेशानी होने की बात कही।
ये आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। संबंधित सरकार या विभाग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद उसका पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।
शराब की आपूर्ति का स्रोत बनेगा जांच का अहम बिंदु
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल कथित अवैध शराब की आपूर्ति को लेकर है। यदि किसी दुकान या अन्य स्थान पर अवैध शराब बिक्री की पुष्टि होती है तो यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि शराब वहां तक किस माध्यम से पहुंची।
जांच में शराब की खरीद, परिवहन, बिक्री के स्थान, संबंधित व्यक्तियों के बयान, पूर्व की जब्ती और शिकायतों के रिकॉर्ड जैसे बिंदुओं को शामिल किया जा सकता है। इससे कथित कारोबार की वास्तविक स्थिति सामने लाने में मदद मिल सकती है।
आरोप सही मिले तो कार्रवाई, नहीं तो स्थिति होगी स्पष्ट
मामले की निष्पक्ष जांच इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अवैध शराब बिक्री पर रोक लगाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, वहीं बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराना भी उचित नहीं है।
यदि जांच में अवैध शराब बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका भी प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो प्रशासन को भी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
फिलहाल वीडियो सामने आने, ग्रामीणों की शिकायतों और जनप्रतिनिधि के आरोपों के बाद चिल्फी क्षेत्र में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब नजर इस बात पर है कि आबकारी विभाग और पुलिस मामले की जांच किस तरह आगे बढ़ाते हैं और कथित अवैध शराब की बिक्री को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब जांच के माध्यम से किस तरह सामने आता है।
वर्जन
उम्मी रूमा, आबकारी निरीक्षक, लोरमी ने कहा—
“अवैध शराब बिक्री का मामला संज्ञान में आया है। मामले की जानकारी ली जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

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