कोसा मर्डर केस का पर्दाफाश: प्रेम प्रसंग में युवक की हत्या, महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

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हत्या के बाद 24 घंटे से अधिक समय तक घर के पास शव छिपाकर रखा, फावड़ा/रापा और सीढ़ी बरामद; ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ व नार्को टेस्ट से जांच में मिली मदद

जांजगी चांपा । थाना मुलमुला क्षेत्र के ग्राम कोसा में अमित भंडारी की हत्या के मामले का पुलिस ने पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार हत्या के षड्यंत्र में शामिल एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में हत्या की वजह प्रेम प्रसंग सामने आई है। पुलिस के मुताबिक मृतक का आरोपी संतोषी सिंह के साथ शादी के पूर्व से प्रेम संबंध था और शादी के बाद भी दोनों के बीच बातचीत होती थी।

पुलिस के अनुसार हत्या के बाद आरोपियों ने मृतक के शव को करीब 24 घंटे से अधिक समय तक घर के पीछे बाड़ी में छिपाकर रखा। इसके बाद शव को गांव के बीचो-बीच एक निर्जन स्थान पर ले जाकर रख दिया गया। मामले की जांच में तकनीकी साक्ष्यों के साथ आधुनिक तकनीक और बिलासपुर से आई सीनियर ट्रैकर डॉग विमला की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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27 जून की रात घर से निकला था युवक

पुलिस के मुताबिक 27 जून 2026 की रात थाना मुलमुला क्षेत्र के ग्राम कोसा में अपने घर से निकले युवक अमित भंडारी का शव 29 जून की सुबह गांव के ही अमहदा तालाब के बगल में एक निर्जन बाड़ी में बरामद हुआ था। गांव के बीचो-बीच हुई इस हत्या के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने मृतक के गांव की युवती संतोषी सिंह से प्रेम प्रसंग, गांव में रात के समय होने वाले जुआ और शराब से जुड़े असामाजिक तत्वों की भूमिका तथा पिछले ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान हुए विवाद सहित कई पहलुओं को जांच में शामिल किया।

तकनीकी साक्ष्यों से जोड़ती गई कड़ियां

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान सीडीआर, आईपीडीआर एनालिसिस, टावर डंप, जीपीएस, सीसीटीवी फुटेज और घटना के समय संदिग्धों की लोकेशन की जांच की। इसके साथ ही घटना के मकसद और घटना के बाद उत्पन्न परिस्थितियों को भी आपस में जोड़कर जांच की गई।

जिला पुलिस कप्तान द्वारा एसआईटी गठित कर जांच को तेज किया गया। पुलिस के अनुसार जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आए तथ्य चौंकाने वाले थे।

शादी के बाद भी जारी था प्रेम प्रसंग

पुलिस के मुताबिक मृतक अमित भंडारी का संतोषी सिंह के साथ उसके विवाह से पहले से प्रेम प्रसंग था। विवाह के बाद भी दोनों आपस में बातचीत करते थे। अमित बाहर रहकर काम करता था और जब-जब वह गांव लौटता था, तब संतोषी भी अपने पति से विवाद के बाद गांव आ जाती थी। पुलिस के अनुसार गांव में दोनों रात-रातभर फोन पर बातचीत करते थे।

घटना की रात भी अमित भंडारी और संतोषी सिंह के बीच करीब रात 1:30 बजे तक फोन पर बातचीत हुई। इसके बाद करीब 2:30 बजे अमित संतोषी से मिलने उसके घर के पीछे पहुंचा।

बहन के साथ अमित को देखकर भाई ने खोया आपा

पुलिस के अनुसार उसी समय संतोषी सिंह का भाई बजरंग सिंह टेंट का काम खत्म कर घर लौटा था। घर के पीछे से कुछ आवाज सुनकर वह वहां पहुंचा। वहां अपनी बहन के साथ अमित को देखकर बजरंग सिंह ने कथित तौर पर अपना आपा खो दिया और अमित से विवाद के बाद मारपीट शुरू कर दी।

पुलिस के मुताबिक अंधेरे में मारपीट के दौरान अमित का सिर पीछे की दीवार से टकराया, जिससे दीवार पर खून का धब्बा लग गया। अमित जान बचाकर भागने की कोशिश में पीछे की दीवार फांदने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान आरोपी बजरंग सिंह ने पास में पड़े छोटे फावड़े/रापा से अमित के सिर और छाती पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

डायल 112 की मौजूदगी के कारण शव नहीं ले जा सके

पुलिस के अनुसार हत्या के बाद घबराए बजरंग सिंह ने अमित के शव को घर के पीछे बाड़ी में ही झुरमुट के नीचे छिपा दिया। पुलिस के मुताबिक उसी रात गांव में चोरी की सूचना पर डायल 112 की टीम गांव कोसा आई हुई थी और रात में गांव के लोग भी जाग रहे थे। ऐसे में उसी रात शव को किसी अन्य स्थान पर ले जाने में पकड़े जाने का खतरा था।

पुलिस के मुताबिक इस पूरी घटना को संतोषी सिंह ने देखा और शव को छिपाने में मदद की।

बड़े भाई को बताई घटना, फिर गुमशुदगी का नाटक

पुलिस के अनुसार 28 जून को आरोपी बजरंग सिंह का बड़ा भाई पप्पू सिंह काम के बाद गांव लौटा। बजरंग ने उसे पिछली रात हुई पूरी घटना के बारे में बताया और सहयोग करने के लिए कहा। इसके बाद दोनों ने योजना बनाकर मृतक के परिजनों के साथ अमित भंडारी को ढूंढने का नाटक किया।

पुलिस के मुताबिक पुलिस को चकमा देने की नीयत से दोनों मृतक के परिजनों के साथ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने थाना मुलमुला भी गए।

आधी रात शव को दूसरी जगह ले जाकर रखा

पुलिस के अनुसार 28 जून की रात करीब 12 बजे मौका देखकर दोनों आरोपियों ने अमित भंडारी के शव को गांव के बीचो-बीच ऐसे स्थान पर रख दिया, जहां पुलिस को उन पर शक न हो। इसके बाद 29 जून की सुबह शव बरामद होने पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर विभिन्न पहलुओं पर जांच शुरू की।

ट्रैकर डॉग विमला की अहम भूमिका

जांच के दौरान बिलासपुर से आई सीनियर ट्रैकर डॉग विमला द्वारा दिए गए लीड को भी पुलिस ने महत्वपूर्ण माना। इसके अलावा आरोपियों की लोकेशन, घटना के बाद उनका संदिग्ध व्यवहार और पूछताछ के दौरान बार-बार बदलते कथनों को जांच का आधार बनाया गया।

पुलिस के अनुसार मामले की गुत्थी सुलझाने में नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ और ब्रेन मैपिंग जैसे आधुनिक तकनीकी परीक्षणों का भी उपयोग किया गया। इन परीक्षणों और जांच से संदेह और मजबूत होने के बाद आरोपियों से दोबारा सख्ती से पूछताछ की गई।

पूछताछ में हत्या कबूल करने का पुलिस का दावा

पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने घटना को अंजाम देना कबूल किया। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छोटा फावड़ा/रापा बरामद किया गया। इसके अलावा मृतक के शव को दूसरी जगह ले जाने के लिए उपयोग की गई छोटी सीढ़ी भी पुलिस ने बरामद की है।

पुलिस ने मामले में बजरंग सिंह निवासी कोसा, संतोषी सिंह निवासी हाथनेवरा, चांपा (मायका कोसा) और पप्पू सिंह निवासी कोसा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार संतोषी सिंह और पप्पू सिंह को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है, जबकि बजरंग सिंह का पुलिस रिमांड लेकर फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन से जुड़े आधुनिक तकनीकी परीक्षण कराए जाएंगे।

दो माह से बनी हुई थी गुत्थी

कोसा हत्याकांड पिछले करीब दो माह से पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। पुलिस के मुताबिक तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी, मोबाइल लोकेशन, टावर डंप, जीपीएस, पूछताछ और ट्रैकर डॉग से मिली जानकारी को आपस में जोड़कर मामले की कड़ियां जोड़ी गईं। इसके बाद पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझाने और तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है।

नोट: खबर में हत्या और आरोपियों की भूमिका से संबंधित विवरण पुलिस जांच एवं पुलिस के दावे पर आधारित हैं। मामले में न्यायालयीन प्रक्रिया जारी है।

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