कोबरा के डसने के बाद महिला को मिली नई जिंदगी, सिद्धार्थ हॉस्पिटल में छह दिन के इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटी
रात 12 बजे सांप ने डसा, परिजनों ने समय पर पहुंचाया अस्पताल; चिकित्सकों की निगरानी और उपचार से बची 58 वर्षीय निर्मला बाई की जान
मुंगेली। जिले के डिंडौरी गांव की 58 वर्षीय निर्मला बाई साहू के लिए 12 सितंबर की रात जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष जैसी रही। रात करीब 12 बजे उन्हें कोबरा सांप ने डस लिया। सांप के काटने के बाद परिजनों ने बिना समय गंवाए उन्हें सिद्धार्थ हॉस्पिटल, मुंगेली पहुंचाया, जहां चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। छह दिनों तक चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद निर्मला बाई की हालत में सुधार हुआ और 18 सितंबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

जानकारी के अनुसार निर्मला बाई साहू, निवासी डिंडौरी, को 12 सितंबर की रात करीब 12 बजे कोबरा सांप ने डस लिया था। घटना के बाद परिवार में चिंता का माहौल बन गया। उनके बड़े बेटे राजकुमार साहू सहित परिजनों ने तत्काल उन्हें उपचार के लिए सिद्धार्थ हॉस्पिटल, मुंगेली में भर्ती कराया। अस्पताल में उनकी स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय देखरेख में उपचार प्रारंभ किया गया।

अस्पताल में डॉ. बसंत कैवर्त के मार्गदर्शन में उपचार किया गया। उपचार के दौरान मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी गई। इसके साथ ही डॉ. आशीष घृतश सहित अस्पताल की टीम ने उपचार एवं आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल में सहयोग किया।
लगातार छह दिनों तक उपचार और निगरानी के बाद निर्मला बाई की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार आया। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति का आकलन करने के बाद 18 सितंबर 2026 को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौटने पर परिजनों ने राहत की सांस ली।
समय पर अस्पताल पहुंचना रहा अहम
सांप के काटने की घटनाओं में समय पर चिकित्सकीय उपचार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। निर्मला बाई के मामले में भी घटना के बाद परिजनों द्वारा उन्हें अस्पताल पहुंचाने में देरी नहीं की गई। इसके बाद अस्पताल की चिकित्सकीय टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और उनकी स्थिति की लगातार निगरानी की।
परिजनों ने इलाज के दौरान चिकित्सकों और अस्पताल की टीम द्वारा की गई देखभाल के प्रति संतोष व्यक्त किया। छह दिन के उपचार के बाद निर्मला बाई के स्वस्थ होकर घर लौटने से परिवार में खुशी का माहौल है।
चिकित्सकीय सेवा और टीमवर्क का उदाहरण
सिद्धार्थ हॉस्पिटल में हुए इस उपचार ने आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने और चिकित्सकीय टीम की सतत निगरानी के महत्व को सामने रखा। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मरीज को 12 सितंबर को भर्ती किया गया था और उपचार के बाद 18 सितंबर को स्वस्थ स्थिति में डिस्चार्ज किया गया।
सिद्धार्थ हॉस्पिटल के डायरेक्टर लक्ष्मीकांत भास्कर ने मरीज के स्वस्थ होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और चिकित्सकीय टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आपात परिस्थितियों में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार कराना बेहद महत्वपूर्ण है।
निर्मला बाई के स्वस्थ होकर घर लौटने से उनके परिवार ने राहत की सांस ली। यह मामला ग्रामीण क्षेत्र में सांप के काटने जैसी आपात स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचने और चिकित्सकीय उपचार लेने के महत्व को भी रेखांकित करता है।

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