‘मन की बात’ में गूंजा छत्तीसगढ़ का ‘हर घर मुनगा–घर-घर मुनगा’ अभियान

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया स्थानीय संसाधनों से पोषण बढ़ाने की पहल का उल्लेख

दिल्ली एयरपोर्ट पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने मन की बात का किया श्रवण

रायपुर । छत्तीसगढ़ में पोषण जागरूकता को जनभागीदारी से जोड़ने वाला ‘हर घर मुनगा–घर-घर मुनगा’ अभियान राष्ट्रीय मंच पर चर्चा में आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस पहल का उल्लेख किया। घरों में मुनगा लगाने और उसके पोषण संबंधी गुणों को दैनिक भोजन से जोड़ने का यह अभियान बताता है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधन भी पोषण की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दिल्ली एयरपोर्ट पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम सुना। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ के अभियान का उल्लेख प्रदेश के लिए उत्साह और प्रेरणा का विषय है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, माताओं, स्वसहायता समूहों तथा पोषण अभियान से जुड़े लोगों को अपने प्रयास और व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि पोषण के प्रति जागरूकता तभी प्रभावी होगी, जब परिवार अपने दैनिक भोजन में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को स्थान देंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 12 सितंबर को ‘हर घर मुनगा–घर-घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की थी। अभियान का उद्देश्य मुनगा के पौधे को घर-घर तक पहुंचाने के साथ उसके उपयोग के बारे में परिवारों को जागरूक करना है। इसमें महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र इस संदेश को समुदाय तक पहुंचाने का प्रमुख माध्यम बने हैं।

मुनगा, जिसे सहजन भी कहा जाता है, छत्तीसगढ़ में परिचित और आसानी से उगाया जा सकने वाला पौधा है। इसकी पत्तियों और फलियों का उपयोग भोजन में किया जाता है। मुनगा की पत्तियों में आयरन, कैल्शियम और विटामिन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। पत्तियों को साग या अन्य स्थानीय व्यंजनों में तथा फलियों को सब्जी और दाल में शामिल किया जा सकता है। इस तरह परिवार उपलब्ध खाद्य पदार्थों के उपयोग से अपनी थाली में विविधता बढ़ा सकते हैं।

अभियान के माध्यम से परिवारों को बताया जा रहा है कि पोषण केवल किसी एक खाद्य पदार्थ से नहीं, बल्कि अलग-अलग पौष्टिक चीजों को संतुलित मात्रा में भोजन में शामिल करने से बेहतर होता है। मुनगा इसी विविधता का एक हिस्सा बन सकता है। घर या आंगन में लगाया गया पौधा परिवार को उसके नियमित उपयोग के लिए भी प्रेरित करता है।

प्रदेश में चल रहे पोषण माह के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर माताओं और समुदाय के साथ संवाद, स्थानीय खाद्य पदार्थों का प्रदर्शन तथा संतुलित आहार के प्रति जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। ‘हर घर मुनगा–घर-घर मुनगा’ अभियान इन गतिविधियों से जुड़कर पोषण का संदेश परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंचा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परिवारों को मुनगा लगाने, उसकी देखभाल करने और उपलब्ध पत्तियों तथा फलियों को भोजन में उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

इस पहल में पौधरोपण, पोषण शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ा गया है। अभियान का संदेश है कि कुपोषण के विरुद्ध प्रयासों में परिवार और समुदाय की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ की इस पहल का उल्लेख स्थानीय संसाधनों पर आधारित पोषण प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रोत्साहन है।

बस्तर के डोंगाघाट में बाढ़ में फंसे 18 लोगों को वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया

रायपुर, 27 सितम्बर 2026/ चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से बस्तर संभाग में गत दिनों से जारी लगातार भारी बारिश के चलते बाढ़ के गंभीर हालात बन गए हैं। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और अचानक जलस्तर बढ़ने के कारण बस्तर जिले के डोंगाघाट क्षेत्र में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया, जिससे कई ग्रामीण और छोटे बच्चे छतों पर फंसने को मजबूर हो गए।

हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला। रविवार को भारतीय वायु सेना के विशेष एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मदद से एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। वायुसेना के जांबाजों ने डोंगाघाट में बाढ़ के बीच जिंदगी और मौत से जूझ रहे 18 नागरिकों को सुरक्षित एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

इस पूरे बचाव अभियान की कमान स्वयं बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने संभाली। दोनों अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी और सूझबूझ से यह जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रशासन द्वारा वर्तमान में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत सामग्री पहुंचाने और नावों व अन्य माध्यमों से लोगों को सुरक्षित शिविरों तक पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

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