सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी दोनों पुत्रों को संपत्ति दान करने में जयनारायण अग्रवाल को मिली 1.59 लाख रुपये की बड़ी राहत
पारिवारिक दानपत्र का पंजीयन शुल्क 0.8 प्रतिशत से घटकर हुआ मात्र 500 रुपये

कम खर्च में हुआ परिवार के भीतर संपत्ति का हस्तांतरण, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में साझा किया अनुभव

रायपुर । परिवार के भीतर अपनी संपत्ति अगली पीढ़ी को सौंपना अब पहले की तुलना में काफी कम खर्चीला हो गया है। राज्य शासन द्वारा पारिवारिक दानपत्र के पंजीयन शुल्क में दी गई बड़ी रियायत का प्रत्यक्ष लाभ कोरबा जिले के कटघोरा निवासी श्री जयनारायण अग्रवाल को मिला। उन्होंने अपनी संपत्ति दोनों पुत्रों के नाम दान करने के लिए दान विलेख का पंजीयन कराया, जिसमें शुल्क रियायत के कारण उन्हें करीब 1 लाख 59 हजार रुपये की आर्थिक राहत मिली। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इस सुविधा से मिले अपने अनुभव साझा किए।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार किए गए हैं। इसी क्रम में परिवार के भीतर संपत्ति के हस्तांतरण पर पंजीयन शुल्क में बड़ी राहत दी गई है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विभाग इन सुधारों का जमीनी प्रभाव जानने के लिए हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव भी संकलित कर रहे है।
दोनों पुत्रों को संपत्ति दान की, 1.59 लाख रुपये की हुई बचत
श्री जयनारायण अग्रवाल ने अपने दोनों पुत्रों के पक्ष में संपत्ति का दान विलेख पंजीकृत कराया। पारिवारिक दानपत्र पर पंजीयन शुल्क में दी गई रियायत के कारण संपत्ति हस्तांतरण पर होने वाला खर्च काफी कम हो गया और उन्हें लगभग 1 लाख 59 हजार रुपये की सीधी बचत हुई।
श्री अग्रवाल ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैं छत्तीसगढ़ शासन एवं पंजीयन विभाग का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस सुविधा के कारण मुझे अपनी संपत्ति अपने दोनों पुत्रों को कम खर्च में हस्तांतरित करने में सहायता मिली।”
0.8 प्रतिशत की जगह अब केवल 500 रुपये पंजीयन शुल्क
राज्य शासन द्वारा पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण को सुगम और किफायती बनाने के लिए महत्वपूर्ण शुल्क सुधार किया गया है। पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र एवं बंटवारे के पंजीयन शुल्क को संपत्ति के मूल्य के 0.8 प्रतिशत से घटाकर मात्र 500 रुपये निर्धारित किया गया है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के हस्तांतरण में लगने वाला पंजीयन खर्च काफी कम हुआ है।
इस निर्णय का लाभ ऐसे परिवारों को विशेष रूप से मिल रहा है, जो परिवार के भीतर संपत्ति का दान, हकत्याग अथवा बंटवारा करना चाहते हैं। निर्धारित शुल्क से प्रक्रिया का आर्थिक भार कम होने के साथ संपत्ति संबंधी पारिवारिक व्यवस्थाओं को विधिवत पंजीकृत कराना भी आसान हुआ है।
शुल्क सुधार का सीधा लाभ हितग्राही तक
श्री जयनारायण अग्रवाल को हुई 1.59 लाख रुपये की बचत पंजीयन शुल्क में किए गए सुधार से नागरिकों को मिलने वाली प्रत्यक्ष आर्थिक राहत का उदाहरण है। बड़ी राशि शुल्क के रूप में खर्च होने के बजाय परिवार के पास बची और दोनों पुत्रों के नाम संपत्ति का दान भी विधिवत रूप से कम खर्च में पूरा हो सका।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई जयनारायण अग्रवाल की यह कहानी बताती है कि पंजीयन व्यवस्था में शुल्क संबंधी सुधार किस तरह नागरिकों के लिए बड़ी आर्थिक राहत का माध्यम बन रहे हैं। सरल प्रक्रिया और कम शुल्क से परिवार के भीतर संपत्ति का हस्तांतरण अधिक सहज और किफायती हो रहा है।

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