आज के बच्चे, कल का भविष्य : सेवा संकल्प से साकार हो रहा सुपोषित छत्तीसगढ़

0
image_search_1790699837884

• ओम प्रकाश डहरिया, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान की भावना जनभागीदारी और सेवा के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच रही है। इस अभियान की सार्थक पहल ‘आंगन मिलन उत्सव’ के रूप में गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन की सेवा-भावना से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का उल्लेख आधिकारिक स्तर पर भी किया गया है।


आंगन मिलन उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के स्वस्थ, वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य के लिए समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का उत्सव है। गांव के आंगनबाड़ी केंद्रों में महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों का सम्मान, बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली दीदियों, मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान इस पहल को सेवा और सम्मान की संवेदना से जोड़ता है।
गांव के वरिष्ठ नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता इस आयोजन को और अधिक आत्मीय बनाती है। उनके हाथों बच्चों और महिलाओं को सुपोषण एवं स्वस्थ जीवन के लिए उपयोगी टिप्स दिए जाना उस पीढ़ी के अनुभव को नई पीढ़ी के भविष्य से जोड़ने जैसा है।
उत्सव में अन्न के दानों से बनाई गई सुपोषण की रंगोली केवल कला की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह संदेश देती है कि हमारे घर और खेतों में उपलब्ध पौष्टिक अन्न ही स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव है। बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी सुपोषण का संदेश सहज और प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।
इसी क्रम में अन्नप्राशन कार्यक्रम नवजात के जीवन में पोषण की नई शुरुआत का प्रतीक बनता है, तो गोद भराई कार्यक्रम मातृत्व, मातृ स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ी की देखभाल के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का भाव जगाता है।

NTPC World Environment Day


दरअसल, सुपोषण केवल भोजन की पर्याप्तता का विषय नहीं है। यह मां के स्वास्थ्य, बच्चे के पोषण, परिवार की जागरूकता और समाज की सहभागिता से जुड़ा व्यापक संकल्प है। जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, स्व-सहायता समूह की दीदियां, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिक और ग्रामीण समुदाय एक साथ मिलकर बच्चों के पोषण की चिंता करते हैं, तब सेवा का भाव धरातल पर दिखाई देता है।
आज के बच्चों के स्वस्थ शरीर में ही कल के विकसित समाज की नींव रखी जाती है। इसलिए कुपोषण के विरुद्ध जागरूकता, मातृ-शिशु स्वास्थ्य की देखभाल और सुपोषण की आदतों को बढ़ावा देना वास्तव में आने वाली पीढ़ी के लिए किया गया सबसे बड़ा निवेश है।
सेवा संकल्प की यही असली तस्वीर है—जहां सम्मान भी है, सहभागिता भी है और आने वाली पीढ़ी के स्वस्थ भविष्य का संकल्प भी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel
error: Content is protected !!