सेवा संकल्प अभियान सेवा की कहानी: खाली पड़ी जमीन पर बायोफ्लॉक मछली पालन से विप्लब ने बनाई आय की नई राह
14 लाख रुपये की इकाई लागत पर मिला 40 प्रतिशत अनुदान, मत्स्य विभाग की सहायता से शुरू किया मछली उत्पादन

तीन माह बाद बिक्री योग्य आकार में आएंगी मछलियां, स्थानीय बाजार में मांग से बेहतर आमदनी की उम्मीद

जिस जमीन से नहीं होती थी कोई आय, अब वहीं आधुनिक तकनीक से स्वरोजगार की तैयारी
रायपुर । कभी खाली पड़ी जिस जमीन से कोई आमदनी नहीं होती थी, अब उसी जगह बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर विप्लब हलदर ने आय की नई राह बनाई है। मत्स्य विभाग की योजना के तहत मिली सहायता से उन्होंने बायोफ्लॉक तालाब तैयार कर मछली उत्पादन शुरू किया है। वर्तमान में मछलियां बढ़वार की अवस्था में हैं और करीब तीन माह बाद बिक्री योग्य आकार में आने की उम्मीद है। इसके बाद विप्लब को अपने इस नए व्यवसाय से आमदनी मिलने लगेगी।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अपनी ‘सेवा की कहानी’ साझा करते हुए विप्लब बताते हैं कि पहले यह जमीन खाली पड़ी रहती थी और इससे किसी प्रकार का उत्पादन या आमदनी नहीं होती थी। मत्स्य विभाग से बायोफ्लॉक पद्धति की जानकारी और योजना के तहत सहायता मिलने के बाद उन्होंने खाली जमीन का उपयोग मछली पालन के लिए करने का निर्णय लिया।
14 लाख रुपये की इकाई लागत, 40 प्रतिशत मिला अनुदान
बायोफ्लॉक तालाब निर्माण के लिए 14 लाख रुपये की इकाई लागत निर्धारित है। योजना के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को इकाई लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इस सहायता से हितग्राहियों को आधुनिक तकनीक से मत्स्य पालन अपनाकर स्वरोजगार और आय के नए अवसर विकसित करने में सहयोग मिल रहा है।
विप्लब ने भी विभागीय सहायता का लाभ लेकर मछली पालन को आजीविका के रूप में अपनाया है। उनका कहना है कि जिस स्थान से पहले कोई उत्पादन नहीं मिल रहा था, अब उसी जगह मछली पालन से आमदनी की संभावना बनी है।
तीन माह बाद बिक्री की तैयारी, स्थानीय बाजार में मांग का भरोसा
विप्लब के अनुसार वर्तमान में मछलियों को बिक्री योग्य आकार में आने में लगभग तीन माह का समय और लगेगा। इसके बाद तैयार मछलियों को बाजार में बेचा जाएगा। उन्हें स्थानीय बाजार में मछली की मांग को देखते हुए बिक्री में परेशानी नहीं होने की उम्मीद है। उनके अनुसार बाजार में मछली की कीमत लगभग 120 रुपये तक मिलती है।
पहली खेप की बिक्री के बाद उत्पादन लागत और आमदनी के आधार पर वास्तविक लाभ का आकलन हो सकेगा। विप्लब को उम्मीद है कि बेहतर परिणाम मिलने पर वे इस गतिविधि को आगे भी जारी रखेंगे।
खाली जमीन बनी स्वरोजगार का आधार
बायोफ्लॉक पद्धति से मछली पालन ने विप्लब के लिए खाली पड़ी जमीन के उपयोग की नई संभावना तैयार की है। मत्स्य विभाग से मिली सहायता और आधुनिक तकनीक के उपयोग से वे अब इस स्थान को आयमूलक गतिविधि से जोड़ चुके हैं।
विप्लब का कहना है कि मछली पालन किसानों और ग्रामीण हितग्राहियों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बन सकता है। योजना के तहत मिलने वाली सहायता से इस व्यवसाय को शुरू करने में सहूलियत मिल रही है।
उन्होंने योजना के माध्यम से मिली सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। सेवा संकल्प अभियान के तहत विप्लब हलदर की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि शासकीय सहायता और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर अनुपयोगी पड़ी जमीन को भी स्वरोजगार और आय के अवसर में बदला जा सकता है।

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