युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति मामले में जांच के बाद कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील यादव निलंबित

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की निष्पक्ष जांच की मांग के बाद विभागीय कार्रवाई, प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाने की मांग तेज

बिलासपुर। जिला शिक्षा विभाग में पदोन्नति, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट और युक्तियुक्तकरण सहित विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों के बीच विभाग में कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है। जांच के बाद कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रही शिकायतों और विभागीय प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने पहले ही विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उन्होंने 9 फरवरी से 4 मई 2026 के बीच पांच अलग-अलग शिकायतें प्रस्तुत की थीं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। इन शिकायतों में अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट, युक्तियुक्तकरण, कोटा संबंधी वित्तीय अनियमितताओं, पदोन्नति, पदस्थापना, वरिष्ठता निर्धारण और न्यायालयीन आदेशों के पालन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे।

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गौरहा ने अपनी शिकायतों में विभागीय निर्णयों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संबंधित मूल नस्ती, नोटशीट, पत्राचार, पदोन्नति एवं वरिष्ठता सूची और पदस्थापना से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि विभाग में लिए गए निर्णयों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं नियमों की अनदेखी के कारण पात्र शिक्षकों के अधिकारों का हनन तो नहीं हुआ है।

जांच रिपोर्ट के बाद हुई निलंबन की कार्रवाई

शिकायतों के बाद मामले की जांच की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूर्व में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे को भी जांच में दोषी पाया गया था। जांच रिपोर्ट में युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति की प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं तथा नियमों के पालन को लेकर टिप्पणियां दर्ज की गई थीं।

इसके बाद जारी आदेश में कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील कुमार यादव को निलंबित किया गया। निलंबन आदेश में जांच समिति की रिपोर्ट, संबंधित अभिलेखों के परीक्षण और संबंधित कर्मचारी के जवाब का उल्लेख किया गया है। विभागीय स्तर पर हुई इस कार्रवाई को शिकायतों के बाद सामने आए महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, निलंबन की कार्रवाई के बाद भी पूरे मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और प्रभावित शिक्षकों की शिकायतों का निराकरण महत्वपूर्ण बना हुआ है। विभागीय प्रक्रिया में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है, उनकी जिम्मेदारी तय करने और नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने की मांग भी उठ रही है।

अंकित गौरहा बोले—प्रभावित शिक्षकों को उनका वास्तविक हक मिलना चाहिए

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने कहा कि उनकी शिकायतों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि लगातार दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर विभागीय अनियमितताओं से जुड़े सवाल उठाए गए। शिकायतों के बाद जांच हुई और अब कार्रवाई भी सामने आई है।

गौरहा ने कहा कि यह प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन उनकी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। बिलासपुर शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के विरोध में उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। पदोन्नति, पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में जिन शिक्षकों के अधिकार प्रभावित हुए हैं, उन्हें उनका वास्तविक हक दिलाना आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि पूरे प्रकरण में जिन-जिन स्तरों पर जिम्मेदारी सामने आती है, वहां नियमानुसार जवाबदेही तय होनी चाहिए। केवल कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रभावित शिक्षकों की समस्याओं का समाधान हो और भविष्य में इस तरह की शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो।

शिकायत से कार्रवाई तक, अब प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाने की चुनौती

जिला शिक्षा विभाग में पदोन्नति, वरिष्ठता, पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण जैसे विषय शिक्षकों के सेवाकाल और अधिकारों से सीधे जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निर्धारित नियमों का पालन बेहद जरूरी माना जाता है। शिकायतों के बाद हुई जांच और निलंबन की कार्रवाई से अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी गंभीरता से समीक्षा होगी।

अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और जिन शिक्षकों ने अपने अधिकार प्रभावित होने की शिकायत की है, उन्हें किस प्रकार राहत मिलती है। अंकित गौरहा ने स्पष्ट किया है कि उनका अगला लक्ष्य प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाना और विभागीय व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।

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