एसबीआई लाइफ ने छत्तीसगढ़ में शुरू किया ‘बीमा की बात’ अभियान, 33 जिलों में बढ़ाएगा बीमा जागरूकता
आईआरडीएआई के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ विजन के अनुरूप शुरू हुई पहल, कैंटर वैन के जरिए स्थानीय छत्तीसगढ़ी भाषा में दी जाएगी वित्तीय सुरक्षा की जानकारी
रायपुर। भारत में वित्तीय सेवाओं का विस्तार होने के बावजूद दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा में जीवन बीमा की भूमिका को लेकर आम लोगों के बीच जागरूकता अभी भी सीमित है। इसी कमी को दूर करने और लोगों को जीवन बीमा के महत्व से अवगत कराने के उद्देश्य से एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने छत्तीसगढ़ में ‘बीमा की बात’ पहल की शुरुआत की है। रायपुर से रवाना की गई विशेष जागरूकता कैंटर वैन राज्य के सभी 33 जिलों में पहुंचकर लोगों को बीमा और वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी देगी।

आईआरडीएआई की राज्य बीमा योजना के तहत छत्तीसगढ़ में जीवन बीमा के लिए लीड इंश्योरर की जिम्मेदारी निभा रही एसबीआई लाइफ की यह पहल लोगों को वित्तीय सुरक्षा से जुड़े सही फैसले लेने में सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ के राष्ट्रीय विजन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

अभियान के शुभारंभ अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग के विशेष सचिव ऋषभ कुमार परासर, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के पश्चिम क्षेत्र के जोनल डायरेक्टर राजीव श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग के एडिशनल डायरेक्टर अंकित मोदी और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के भोपाल के रीजनल डायरेक्टर अमित कुमार साहा सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
बीमा सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर
एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस छत्तीसगढ़ में जीवन बीमा के लिए लीड इंश्योरर के रूप में लोगों तक बीमा संबंधी जानकारी पहुंचाने और वित्तीय सुरक्षा के महत्व को समझाने के लिए काम कर रही है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि जीवन बीमा केवल एक वित्तीय उत्पाद नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य को सुरक्षित रखने और लंबे समय की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
यह अभियान ऐसे समय में शुरू किया गया है, जब देश में बीमा से जुड़े आंकड़े जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। आईआरडीएआई की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, भारत में बीमा की पहुंच 3.7 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत 7.3 प्रतिशत है। वहीं, प्रीमियम में वृद्धि के बावजूद जीवन बीमा की पहुंच 2.8 प्रतिशत से घटकर 2.7 प्रतिशत रह गई है। ये आंकड़े देश में बीमा सुरक्षा का दायरा बढ़ाने और आम लोगों तक इससे जुड़ी जानकारी पहुंचाने की जरूरत को सामने लाते हैं।
बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए जरूरी है कि लोगों को उनकी जरूरतों के अनुरूप सरल और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति और परिवार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर निर्णय ले सकें।
33 जिलों में पहुंचेगी जागरूकता कैंटर वैन
‘बीमा की बात’ अभियान के तहत विशेष कैंटर वैन छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में जाकर लोगों को जीवन बीमा के महत्व के बारे में जागरूक करेगी। वैन में एलईडी के माध्यम से ऑडियो-विजुअल सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। इसमें स्थानीय छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग किया जाएगा, ताकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोग भी बीमा से जुड़ी जानकारियों को आसानी से समझ सकें।
अभियान में इंटरैक्टिव मॉड्यूल के माध्यम से बीमा संबंधी विषयों को सरल, सहज और स्थानीय संस्कृति से जोड़कर प्रस्तुत किया जाएगा। इससे लोगों को जीवन बीमा की उपयोगिता, वित्तीय सुरक्षा और परिवार के भविष्य की योजना बनाने जैसे विषयों को समझने में मदद मिलेगी।
आईआरडीएआई की राज्य बीमा योजना का उद्देश्य राज्य स्तर पर विशेष प्रयासों के माध्यम से जीवन बीमा की पहुंच बढ़ाना और लोगों को इसके प्रति जागरूक करना है। छत्तीसगढ़ में एसबीआई लाइफ को जीवन बीमा के लिए लीड इंश्योरर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस भूमिका के तहत स्थानीय स्तर पर लगातार जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों तक बीमा संबंधी जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
वित्तीय सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक करना जरूरी : राजीव श्रीवास्तव
एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के पश्चिम क्षेत्र के जोनल डायरेक्टर राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि देश में वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लोगों को यह समझना जरूरी है कि जीवन बीमा उनके भविष्य और परिवार की सुरक्षा में किस प्रकार भूमिका निभाता है। हालांकि, कई समुदायों में आज भी जीवन बीमा को लेकर जागरूकता की कमी है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में जीवन बीमा के लिए लीड इंश्योरर होने के नाते एसबीआई लाइफ ऐसी पहलों के माध्यम से इस कमी को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो लोगों को उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में वित्तीय सुरक्षा की अहमियत समझने में मदद करें। ‘बीमा की बात’ अभियान आईआरडीएआई के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ के राष्ट्रीय विजन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि कंपनी की सोच ‘अपने लिए, अपनों के लिए’ भी इसी उद्देश्य को सामने रखती है। वित्तीय सुरक्षा केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि एक ऐसा उद्देश्य है, जो लोगों के सपनों को पूरा करने, परिवारों को सुरक्षित रखने और देश को अधिक मजबूत बनाने में मदद करता है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक जानकारी पहुंचाने पर जोर
इस पहल पर छत्तीसगढ़ शासन के वित्त सचिव, आईएएस डॉ. रोहित यादव ने कहा कि आईआरडीएआई के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ विजन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर भारतीय परिवार को आसान, किफायती और जरूरत के अनुरूप बीमा सुरक्षा मिल सके। इसके लिए यह जरूरी है कि आर्थिक वर्ग, जिले या सामाजिक समूह की परवाह किए बिना लोगों तक बीमा संबंधी जानकारी पहुंचे।
उन्होंने कहा कि जब लोग समझते हैं कि जीवन बीमा उनके सपनों और परिवार को सुरक्षित रखने के साथ दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता में किस प्रकार मदद करता है, तो वे अपने भविष्य के लिए बेहतर फैसले ले पाते हैं। इसी कारण ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सरल और स्पष्ट जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है।
डॉ. यादव ने कहा कि एसबीआई लाइफ की ‘बीमा की बात’ पहल इस दिशा में सार्थक कदम है। स्थानीय भाषा में बीमा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने से लोगों को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए उचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इससे छत्तीसगढ़ के परिवारों को आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित भविष्य बनाने की दिशा में सहयोग मिल सकेगा।
‘बीमा की बात’ अभियान के माध्यम से एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में वित्तीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को जीवन बीमा के महत्व से परिचित कराना है, ताकि व्यक्ति और परिवार अपने दीर्घकालिक वित्तीय भविष्य से जुड़े फैसले अधिक जानकारी और समझ के साथ ले सकें।

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