समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करने में जनभागीदारी – बिलासपुर में आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव
महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मिलेगी मजबूती, धार्मिक आस्थाओं और पूजा-पद्धतियों में नहीं होगा हस्तक्षेप – शत्रुघ्न सिंह

संभाग स्तरीय परामर्श बैठक में विभिन्न विषयों पर खुलकर हुई चर्चा, 30 अक्टूबर तक ऑनलाइन भी दे सकेंगे सुझाव

रायपुर । छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया में नागरिकों और विभिन्न संगठनों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज बिलासपुर में संभाग स्तरीय समूह चर्चा एवं परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। देवकी नंदन दीक्षित सभागृह, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले आठ जिलों के सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने बहुमूल्य विचार एवं सुझाव साझा किए। इस दौरान विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण (गोद लेना) और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से खुली चर्चा की गई।
बैठक में राज्य शासन द्वारा गठित समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सम्मानित सदस्य एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह, रायपुर संभागायुक्त एवं समिति के सचिव श्याम धावड़े तथा बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे। इन सभी अधिकारियों और विशेषज्ञों के समक्ष बिलासपुर संभाग के आठ जिलों से आए प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता के प्रारूप को लेकर अपने पक्ष, विचार और सुझाव रखे।

पारिवारिक कानूनों में समानता और अधिकारों के संरक्षण पर विशेष जोर
समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता की पृष्ठभूमि, इसकी वर्तमान आवश्यकता और इसके उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में पारिवारिक विषयों से संबंधित दो दर्जन से अधिक अलग-अलग कानून एवं प्रावधान देश और समाज में प्रचलित हैं, जिनमें आपस में अनेक भिन्नताएं हैं। समान नागरिक संहिता पर विचार करने का मुख्य उद्देश्य इन विभिन्न कानूनों में एकरूपता और समानता को बढ़ावा देना है, जिससे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को कानूनी रूप से अधिक सुदृढ़ और सुरक्षित बनाया जा सके।
उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी अपने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। शत्रुघ्न सिंह ने इस बात पर विशेष बल देते हुए पूरी तरह स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता के दायरे में आने के बाद भी किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक आस्था, मान्यताओं और व्यक्तिगत रीति-रिवाजों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। इसका मुख्य दायरा और संबंध केवल विवाह, विवाह-विच्छेद (तलाक), भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे नागरिक एवं पारिवारिक कानूनी विषयों तक ही सीमित है। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि विभिन्न वर्गों से मिलने वाले सुझावों और वर्तमान कानूनी व्यवस्थाओं के गहन अध्ययन के आधार पर ही संहिता का अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा।
पक्ष-विपक्ष में रखे गए विचार, परंपराओं और कानूनी सुधारों पर हुआ मंथन
इस संभाग स्तरीय परामर्श बैठक में मुख्य रूप से बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़—कुल आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। बैठक में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों, शिक्षाविदों, प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने समान नागरिक संहिता के पक्ष और विपक्ष दोनों ही पहलुओं पर अपने विचार खुलकर सामने रखे।
चर्चा के दौरान पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं, विभिन्न समुदायों की अपनी-अपनी प्रथाओं तथा आधुनिक कानूनी सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू खुलकर सामने आए। समिति के सदस्यों ने सभी उपस्थित लोगों को पूरी गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि प्राप्त होने वाले प्रत्येक सुझाव का बारीकी से अध्ययन कर ही प्रारूप को अंतिम रूप दिया जाएगा।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो, समिति छत्तीसगढ़ राज्य की वर्तमान विधिक स्थिति के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों में इस दिशा में प्रचलित व्यवस्थाओं और मॉडलों का भी अध्ययन कर रही है। आम नागरिकों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य सभी हितधारकों से मिलने वाले सुझावों एवं व्यापक विधिक अध्ययन के आधार पर ही संहिता का यह प्रारूप राज्य शासन को सौंपा जाएगा, जिसके साथ आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक अनुशंसाएं भी प्रेषित की जाएंगी।
30 अक्टूबर तक वेबसाइट और ई-मेल के माध्यम से भी दे सकते हैं अपने सुझाव
बैठक के दौरान एक विस्तृत पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के माध्यम से सभी उपस्थित जनों को समान नागरिक संहिता की मूल अवधारणा और इससे जुड़े प्रमुख बिंदुओं की बेहद सरल और स्पष्ट जानकारी दी गई।
यदि कोई आम नागरिक या संगठन इस प्रक्रिया में अपने सुझाव देना चाहता है, तो वे 30 अक्टूबर तक आधिकारिक वेबसाइट “ucc.cgstate.gov.in” (http://ucc.cgstate.gov.in) पर ऑनलाइन माध्यम से अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सुझाव भेजने के लिए एक आधिकारिक ई-मेल आईडी ucc-chhattisgarh@cg.gov.in भी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई है, जिसका उपयोग किया जा सकता है।
प्रमुख उपस्थिति: इस संभाग स्तरीय बैठक में रजक समाज के अध्यक्ष निलेश रजक, मराठा समाज के अध्यक्ष शशांक चौहान, जायसवाल समाज के अध्यक्ष रमेश जायसवाल, यादव समाज के अध्यक्ष यशवंत यादव, मुस्लिम समाज के मुरजता वनक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अध्यक्ष प्रदीप कुमार शर्मा, साहू समाज से ललित साहू, राजमहंत दसोराम खाण्डे, प्रतिष्ठित नागरिक सुधीर खंडेलवाल, समाजसेवी एवं पत्रकार हबीब मेनन, वंदे मातरम मित्र मंडल बिलासपुर से महेंद्र जैन, एडवोकेट नसीमुद्दीन अंसारी (बिलासपुर), आदिवासी गोंडवाना समाज के अध्यक्ष श्याम, विष्णु सोनी (एल्डरमैन बिलासपुर), सूर्यकुमार खूंटे (शिक्षाविद कोरबा), विकास शर्मा (जांजगीर), वेदप्रकाश अग्रवाल (बिलासपुर), तथा बिलासपुर जिले के पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेई सहित बड़ी संख्या में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, विधि विशेषज्ञ और आम नागरिक उपस्थित रहे।

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