किसानों की आय बढ़ाने बाजार आधारित खेती और फसल विविधीकरण को दें सर्वाेच्च प्राथमिकता – कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी

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धान के बदले दलहन, तिलहन और मिलेट्स की खेती अपनाने किसानों को करें प्रोत्साहित, प्रति एकड़ 15 हजार रुपए अनुदान का प्रावधान

धान खरीदी की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश, अमानक बीज एवं कीटनाशक विक्रेताओं पर होगी सख्त कार्रवाई

रायपुर : छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के किसानों की आय में वृद्धि करना, आधुनिक कृषि तकनीकों का विस्तार करना और कृषि आधारित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप लाभकारी फसलों के उत्पादन के लिए प्रेरित किया जाए। विशेष रूप से धान की खेती के स्थान पर दलहन, तिलहन, मिलेट्स (कोदो-कुटकी, रागी) तथा अन्य अधिक आय देने वाली फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए एक ठोस और परिणाममूलक कार्ययोजना तैयार की जाए।

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी आज रायपुर संभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मैराथन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस उच्चस्तरीय बैठक में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, सहकारिता, बीज निगम, मंडी बोर्ड तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा संचालित केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में पूर्ण गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए।

15 नवंबर से धान खरीदी अभियान, सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने आगामी 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर प्रारंभ होने वाले धान खरीदी अभियान की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अन्नदाता किसानों को धान विक्रय करने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, मार्कफेड सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल और समन्वय के साथ सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करनी होंगी।

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इसके साथ ही, उन्होंने रासायनिक खाद और बीज की उपलब्धता, भंडारण एवं सुचारू वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की तथा इन सभी कार्यों में पारदर्शिता लाने और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए ‘साथी पोर्टल’ का अधिकाधिक उपयोग करने के निर्देश दिए।

फसल विविधीकरण की धीमी प्रगति पर नाराजगी, दलहन-तिलहन और मिलेट्स का रकबा बढ़ाने पर जोर

समीक्षा बैठक के दौरान परदेशी ने फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के कार्यों में प्रगति धीमी पाए जाने पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की और अधिकारियों को इसमें तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को धान के पारंपरिक चक्र से बाहर निकालकर दलहन, तिलहन और मिलेट्स फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि धान के बदले अन्य निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को राज्य शासन द्वारा प्रति एकड़ 15 हजार रुपए का अनुदान देने का विशेष प्रावधान किया गया है। इस महत्वपूर्ण योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। इसके अतिरिक्त, उद्यानिकी फसलों के विस्तार पर जोर देते हुए फूलों, फलों, मखाना और ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के भी निर्देश दिए गए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि फसल विविधीकरण केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि इससे किसानों की आमदनी बढ़े और उन्हें एक स्थायी बाजार उपलब्ध हो सके।

चक्रवात से फसलों को नुकसान होने पर तत्काल सर्वे कर किसानों को दिलाएं राहत

हाल ही में बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात के संभावित प्रभावों को पूरी गंभीरता से लेते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने मैदानी अमले को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चक्रवात या खराब मौसम के कारण यदि प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में किसानों की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचता है, तो तत्काल सर्वे कराया जाए। प्रभावित किसानों के प्रकरणों को शीघ्र तैयार कर शासन के प्रचलित नियमों और आपदा राहत योजनाओं के तहत उनकी पात्रतानुसार त्वरित राहत एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।

कृषि यंत्रीकरण का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचे, मशीनों के संचालन का दें व्यावहारिक प्रशिक्षण

कृषि यंत्रीकरण सबमिशन योजना की समीक्षा करते हुए परदेशी ने कहा कि शासन द्वारा आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को भारी अनुदान पर विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद यह देखने में आता है कि फसल की बुआई और कटाई के समय हरियाणा, पंजाब तथा अन्य बाहरी राज्यों से आने वाली कृषि मशीनों का उपयोग अधिक किया जाता है, जो कि चिंता और विचार का विषय है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की योजनाओं के तहत कृषि यंत्र प्राप्त करने वाले स्थानीय किसानों को उन मशीनों के संचालन, रखरखाव और सही उपयोग का समुचित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। इससे किसान स्वयं उपलब्ध कृषि यंत्रों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।

अमानक कीटनाशक बेचने वालों पर चलेगा विशेष अभियान, जबरन अन्य उत्पाद बेचने पर भी होगी कार्रवाई

निजी कृषि आदान (एग्री-इनपुट) विक्रय केंद्रों में हो रही अनियमितताओं की शिकायतों को बेहद गंभीरता से लेते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ निजी विक्रेता प्रतिष्ठित कंपनियों के बीज या कीटनाशक खरीदने आने वाले किसानों को जबरन अन्य अमानक उत्पाद खरीदने के लिए विवश (फोर्स टैगिंग) करते हैं। इस प्रकार की अवैध प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए।

उन्होंने बिना लाइसेंस के कीटनाशकों का विक्रय करने वाले तथा अमानक एवं दोयम दर्जे के उत्पाद बेचने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध विशेष जांच अभियान चलाने और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही, अधिकारियों को नियमित निरीक्षण एवं सतत मैदानी निगरानी बनाए रखने को कहा गया।

बलौदाबाजार में 700 एकड़ में ब्लैक राइस उत्पादन की पहल की सराहना, अन्य जिले भी अपनाएं मॉडल

बैठक में किसानों को बाजार आधारित और अधिक लाभकारी खेती से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। परदेशी ने सुगंधित धान की किस्मों एवं अन्य विशिष्ट कृषि उत्पादों की व्यावसायिक संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने के निर्देश दिए।

इस दौरान बैठक में बलौदाबाजार जिले के कलेक्टर ने बताया कि जिले के कसडोल विकासखंड में लगभग 700 एकड़ के विशाल क्षेत्र में ‘ब्लैक राइस’ (काला चावल) का उत्पादन कराया जा रहा है। इसके सुगम विपणन और विक्रय के लिए जापान की एक प्रतिष्ठित कंपनी से सीधा समन्वय स्थापित किया गया है, जिसके तहत यह उत्पाद 25 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है।

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने इस अनूठी पहल की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के बाजार आधारित और डिमांड-ड्रिवन कृषि मॉडल किसानों की आय कई गुना बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। उन्होंने रायपुर संभाग के अन्य जिलों के अधिकारियों को भी स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, उत्पादन क्षमता और बाजार की मांग के अनुरूप ऐसे ही नवाचारी मॉडल अपनाने के निर्देश दिए।

हर जिले में विकसित होंगे दो से तीन विशिष्ट कृषि मॉडल

परदेशी ने रायपुर संभाग के सभी जिलों के अधिकारियों को कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के साथ मिलकर काम करने को कहा। उन्होंने जिले की जलवायु, मिट्टी की प्रकृति, उपलब्ध जल संसाधनों और बाजार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक जिले में दो से तीन विशिष्ट कृषि गतिविधियों का चयन करने के निर्देश दिए।

इन चुनिंदा गतिविधियों को एक ‘रोल मॉडल’ के रूप में विकसित किया जाए, ताकि उस जिले की कृषि पहचान एक विशेष उत्पाद के रूप में स्थापित हो सके। इससे किसानों को नई तकनीकी जानकारी, उच्च गुणवत्ता का उत्पादन और बेहतर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच के अवसर मिलेंगे।

पीएम-आशा के तहत फसलों की खरीदी और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करें

कृषि उत्पादन आयुक्त ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-Asha) की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य वाली फसलों की समय पर खरीदी और किसानों को उनके भुगतान का त्वरित निपटान करने के निर्देश दिए।

बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि खेती में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों से पारंपरिक ठोस रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता कम होने लगी है। बीज उत्पादन एवं भंडारण की स्थिति को पूरी तरह संतोषजनक बताते हुए अधिकारियों ने बताया कि बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर सीधे राज्य बीज निगम के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्तायुक्त प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियों ने भी अपनी-अपनी विभागीय योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट साझा की।

बैठक में प्रमुख उपस्थिति: समीक्षा बैठक के दौरान कृषि विभाग के संचालक राहुल देव, मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक अजय अग्रवाल, पशुधन विकास विभाग के संचालक चंद्रकांत वर्मा, मत्स्यपालन विभाग के संचालक एन.एस. नाग, मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक महेंद्र सावन्नी, एपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक सहित रायपुर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) तथा कृषि, सहकारिता और अन्य संबद्ध विभागों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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