श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम—खर्रीपारा का मां काली मंदिर बना भक्तों का प्रमुख केंद्र

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मुंगेली जिले के काली माई वार्ड खर्रीपारा स्थित मां काली मंदिर आज श्रद्धा, आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बन चुका है। विशेषकर चैत्र एवं कुँवार नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो जाता है। नवरात्र के सप्तमी दिवस पर यहां मां काली की भव्य महाआरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

मंदिर की स्थापना की कहानी भी उतनी ही अद्भुत और प्रेरणादायक है। जानकारी के अनुसार, सन् 1945 के पूर्व कुम्भकार समाज के लोग जनता मार्केट क्षेत्र के पास निवास करते थे, जहां मां काली की एक छोटी मड़िया स्थित थी। समय के साथ जब समाज के लोग खर्रीपारा में आकर बस गए, तो वह स्थल उपेक्षित हो गया और धीरे-धीरे कचरे के ढेर में दब गया।

कहते हैं कि कुम्भकार समाज के बुजुर्ग स्वर्गीय सरहा राम कुम्भकार को लगातार स्वप्न में मां काली के दर्शन होने लगे, जिसमें वे स्वयं को कचरे में दबे होने की बात कहती थीं और उन्हें उचित स्थान पर स्थापित करने का आग्रह करती थीं। प्रारंभ में इसे सामान्य माना गया, लेकिन जब यह संकेत बार-बार मिलने लगा, तब समाज के लोगों ने इसे गंभीरता से लिया।

चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर जब पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल था, तब समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से निर्णय लेकर मां काली की प्रतिमा को पुराने स्थान से लाने की तैयारी की। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद गाजे-बाजे के साथ जब प्रतिमा को उठाने का प्रयास किया गया, तो प्रारंभ में वह नहीं उठी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने सच्चे मन से “जय मां काली” का जयघोष किया और आश्चर्यजनक रूप से प्रतिमा सहज ही उठ गई। इसे मां की कृपा का प्रतीक माना गया।

इसके पश्चात मां काली की प्रतिमा को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ खर्रीपारा लाकर सन् 1965-66 के आसपास विधिवत स्थापित किया गया। समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और दानदाताओं के सहयोग से यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।

आज मां काली मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक भी बन चुका है। यहां चैत्र और कुँवार नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना, जोत-जवारा बोने की परंपरा तथा भागवत कथा का आयोजन किया जाता है।

इसके अलावा दीपावली की मध्यरात्रि में मां काली की विशेष पूजा और भव्य आरती आयोजित की जाती है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रसाद वितरण और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ यह आयोजन अत्यंत भव्य रूप ले लेता है।

नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। हर वर्ष यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जो मां काली के प्रति लोगों की अटूट आस्था को दर्शाता है।

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