ग्राम सभा की अनुमति बिना जारी NOC निरस्त करने की मांग, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।

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इथेनॉल प्लांट का विरोध, नियम उल्लंघन व पर्यावरणीय खतरे का जताया अंदेशा


मुंगेली। सुशासन तिहार के दौरान ग्राम पंचायत सिल्ली के ग्रामीणों और पंचगणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इथेनॉल प्लांट के लिए जारी कथित अवैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) को निरस्त करने तथा पूरे मामले की जांच की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिव ने ग्राम सभा की अनुमति के बिना ही NOC जारी कर नियमों का उल्लंघन किया है।

ज्ञापन में बताया गया कि 2 जनवरी 2026 को आयोजित ग्राम सभा में सभी ग्रामीणों और पंचों ने सर्वसम्मति से प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट का विरोध किया था और इसे स्थापित नहीं करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बावजूद बिना ग्राम सभा की बैठक बुलाए सरपंच और सचिव द्वारा NOC जारी कर दी गई, जो पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ है।

ग्रामीणों ने इसे फर्जीवाड़ा बताते हुए कहा कि यह कदम न केवल पंचायत प्रतिनिधियों, बल्कि पूरे गांव के साथ धोखाधड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की सहमति के बिना ऐसा कोई भी निर्णय लेना अवैध है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रस्तावित प्लांट से आसपास के 30 से अधिक गांव प्रभावित होंगे, जिनमें नागोपहरी, तरवरपुर, सिल्ली, तालम, विचारपुर, शुक्लाभांठा, हरियरपुर, दाबो, बोदा और माराडबरी सहित कई गांव शामिल हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि प्लांट के संचालन से भूजल स्तर में गिरावट, पर्यावरण प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि सरपंच और सचिव द्वारा जारी NOC को तत्काल निरस्त किया जाए और पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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