‘इनक्रेडिबल इंडिया’ की थीम पर थिरके विद्यार्थी -गीताक्षरा साहू बनीं ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’

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कथक और लोक नृत्यों की प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

आई आई एच एम नया रायपुर का पाँचवाँ वार्षिक उत्सव संपन्न

रायपुर । इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IIHM) नया रायपुर द्वारा आयोजित पाँचवाँ वार्षिक उत्सव शनिवार को महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय ऑडिटोरियम में अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न हुआ। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा संचालित इस संस्थान के समारोह की इस वर्ष की थीम “इनक्रेडिबल इंडिया” रही, जिसके माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन किया गया।

अतिथियों ने बढ़ाया उत्साह कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन मंडल के अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष  शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सुश्री मोना सेन और छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष  प्रभात कुमार मिश्रा उपस्थित रहे। दीप प्रज्ज्वलन और राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’ के साथ समारोह का गरिमामय आगाज़ हुआ।

उपलब्धियों का लेखा-जोखा संस्थान के प्राचार्य  विवेक आचार्य ने वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि IIHM न केवल छात्रों को तकनीकी रूप से दक्ष बना रहा है, बल्कि उन्हें वैश्विक आतिथ्य उद्योग की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है।

सम्मान और पुरस्कार समारोह के दौरान शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस वर्ष का प्रतिष्ठित “स्टूडेंट ऑफ द ईयर” पुरस्कार गीताक्षरा साहू को प्रदान किया गया। अतिथियों ने अपने संबोधन में छात्रों को पर्यटन क्षेत्र में नवाचार के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां उत्सव का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं। शास्त्रीय नृत्य, कथक और दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्यों ने भारतीय परंपरा की गहराई को मंच पर उतारा। लोक संस्कृति के तहत छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य की प्रस्तुति ने क्षेत्रीय माटी की महक बिखेरी। फ्यूजन ‘फेस्टिवल्स ऑफ इंडियन डांस’ थीम के तहत देश के विभिन्न कोनों की नृत्य शैलियों का अद्भुत संगम देखने को मिला।

सफल आयोजन यह उत्सव न केवल विद्यार्थियों की छिपी हुई प्रतिभा को सामने लाने का मंच बना, बल्कि आतिथ्य सत्कार और भारतीय संस्कृति के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी साबित हुआ। इस अवसर पर संस्थान के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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