आईएफसी परियोजना से मिली नई पहचान: नर्सरी एवं मसाला उद्यम से आत्मनिर्भर बनीं सुनीता वर्मा

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टमाटर के पौधों से शुरू हुआ सफर, आज नर्सरी और खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय से बढ़ा रहीं परिवार की आय

रायपुर । खैरागढ़ जिले के ग्राम टेकापारकला की निवासी सुनीता वर्मा आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की प्रेरक मिसाल बनकर उभरी हैं। इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) परियोजना से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, बल्कि अन्य महिला किसानों को गुणवत्तायुक्त पौधे उपलब्ध कराकर कृषि विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रेम कुमार पटेल एवं जिला पंचायत के अधिकारियों ने सुनीता वर्मा द्वारा ग्राम टेकापारकला में IFC परियोजना अंतर्गत स्थापित सब्जी नर्सरी एवं आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया और उनके प्रयासों की सराहना की।


सुनीता वर्मा वर्ष 2025 में आईएफसी परियोजना से जुड़ीं। प्रारंभिक चरण में उन्होंने अपनी नर्सरी में नामधारी-992 किस्म के टमाटर के पौधे तैयार किए। तैयार पौधों में से 1,286 पौधे तीन महिला किसान बहनों को विक्रय किए गए तथा कुछ पौधे स्वयं के खेत में लगाए गए। इस पहल से उन्हें लगभग 1,500 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जिसने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पौध उत्पादन को आजीविका का मजबूत माध्यम बनाने का संकल्प लिया।

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वर्ष 2026 में उन्होंने शासकीय उद्यानिकी नर्सरी पेंड्री, राजनांदगांव में पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद आईएफसी परियोजना के अंतर्गत उनके यहां 240 वर्गमीटर क्षेत्रफल में रोडनेट नर्सरी संरचना विकसित की गई, जिससे उनकी पौध उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 18 मई 2026 से उन्होंने टमाटर, मिर्च, बैंगन एवं फूलगोभी सहित कुल 1,13,392 पौधे तैयार किए, जिनमें से 39,494 पौधे 15 महिला किसान बहनों को विक्रय किए गए। इससे उन्हें 48,834 रुपये की आय प्राप्त हुई और वर्तमान खरीफ सीजन में उनकी आय लगभग 60 हजार रुपये तक पहुंचने की संभावना है।
नर्सरी व्यवसाय के साथ-साथ सुनीता वर्मा खाद्य प्रसंस्करण एवं मसाला निर्माण के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त कर रही हैं। वे धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर, गरम मसाला, जिमीकंद अचार और गाजर अचार जैसे उत्पाद तैयार करती हैं। उनके उत्पाद खैरागढ़ के सरस मेले तथा राजनांदगांव के सी-मार्ट में भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इस व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 64 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत हुई है।


सुनीता वर्मा की सफलता यह सिद्ध करती है कि उचित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। उनकी उपलब्धि आईएफसी परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो महिलाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है। उनकी प्रेरक यात्रा अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की नई राह खोल रही है।

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