लक्ष्मी स्व सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं गंगूबाई
मछली पालन, खेती और अन्य आजीविका गतिविधियों से सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर बनीं महिलाओं के लिए प्रेरणा
रायपुर । छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका का मुख्य आधार धान की खेती, मछली पालन और वनों से तेंदूपत्ता व महुआ का संग्रहण है। ये कृषि और वन आधारित गतिविधियाँ स्थानीय किसानों को स्थायी आय और रोजगार प्रदान करती हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर जिले के विकासखंड भोपालपट्टनम से लगभग 24 किलोमीटर दूर ग्राम कोनागुड़ा की श्रीमती गंगूबाई तलाण्डी आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। कभी घरेलू कार्यों तक सीमित रहने वाली गंगूबाई अब विभिन्न आजीविका गतिविधियों से आय अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं।

स्व-सहायता समूह से मिली नई दिशा गंगूबाई तलाण्डी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत संगमपल्ली क्लस्टर के ग्राम कोनागुड़ा स्थित लक्ष्मी स्व सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका गतिविधियों को बढ़ाने और अपनी आय के नए स्रोत विकसित करने का अवसर मिला। मत्स्य विभाग के सहयोग से उन्हें 5 किलोग्राम मत्स्य बीज उपलब्ध कराया गया। वहीं, कृषि विभाग द्वारा धान की खेती के लिए बीज प्रदान किया गया। इन शासकीय योजनाओं और विभागीय सहयोग का लाभ उठाकर गंगूबाई ने मछली पालन और खेती सहित कई आजीविका गतिविधियां शुरू कीं।
विभिन्न गतिविधियों से एक लाख रुपये से अधिक की सालाना आय आज गंगूबाई मछली पालन, धान की खेती, तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहण, मनरेगा मजदूरी तथा सब्जी-बाड़ी जैसी विभिन्न गतिविधियों से आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने मछली पालन से लगभग 7 हजार रुपये,धान की खेती से लगभग 80 हजार रुपए, तेंदूपत्ता संग्रहण से लगभग 6 हजार रुपये,महुआ संग्रहण से लगभग 6 हजार रुपये,मनरेगा मजदूरी से लगभग 6 हजार रुपये और सब्जी-बाड़ी से लगभग 5 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इस प्रकार गंगूबाई सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार आया है।
समूह ने बदली जिंदगी : गंगूबाई गंगूबाई तलाण्डी बताती हैं कि स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन को नई दिशा मिली। अब वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे कहती हैं कि स्व सहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं और विभिन्न विभागों के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव हो रहा है। गंगूबाई की सफलता यह साबित करती है कि स्व सहायता समूहों और शासकीय योजनाओं का प्रभावी लाभ लेकर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती हैं।

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