भूमि विवाद में दोहरे हत्याकांड के आठ दोषियों को आजीवन कारावास
गिगतरा गांव में ट्रैक्टर से कुचलकर की गई थी दो सगे भाइयों की हत्या, 23 गवाहों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सुनाया फैसला
मुंगेली। फास्टरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम गिगतरा में भूमि विवाद को लेकर हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय मुंगेली ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी आठ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सत्र न्यायाधीश गिरिजा देवी मरावी की अदालत ने सत्र प्रकरण क्रमांक 01/2025 में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और दस्तावेजी प्रमाणों को विश्वसनीय मानते हुए सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी स्पष्ट किया कि संपत्ति के लालच में रक्त संबंधों की हत्या करने वाले अपराधियों के प्रति कानून किसी प्रकार की नरमी नहीं बरत सकता।
भूमि विवाद ने ले लिया खूनी रूप
अभियोजन के अनुसार थाना फास्टरपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 72/2024 के तहत यह घटना 25 अगस्त 2024 की दोपहर लगभग दो बजे ग्राम गिगतरा में हुई थी। लंबे समय से चली आ रही पारिवारिक भूमि विवाद की रंजिश उस दिन खूनी संघर्ष में बदल गई।
अभियोजन के मुताबिक आरोपियों ने सुनियोजित ढंग से हमला करते हुए भागबली पाटले को ट्रैक्टर से कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इसके बाद वकील पाटले की भी निर्मम हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की और पर्याप्त साक्ष्य एकत्रित करने के बाद न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।

आठ आरोपी दोषी करार
सुनवाई के बाद न्यायालय ने केजूराम पाटले, चित्रलेखा पाटले, मीनाक्षी पाटले, रजनी पाटले, रामबली पाटले, लाला उर्फ जागेंद्र कुर्रे, माखन पाटले एवं तोरण पाटले को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 191(3), 61(2)(क), 103(1) सहपठित धारा 190 (दो बार) तथा धारा 115(2) सहपठित धारा 190 (दो बार) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
23 गवाहों और मजबूत साक्ष्यों ने तय किया मुकाम
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने पक्ष को मजबूत बनाने के लिए 23 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके अलावा घटनास्थल से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य, वैज्ञानिक प्रमाण और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई। बचाव पक्ष ने दो रक्षा गवाह पेश किए, लेकिन न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अभियोजन के पक्ष को अधिक विश्वसनीय माना।
दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने और समस्त साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अभियोजन आरोप सिद्ध करने में सफल रहा और सभी आरोपियों को दोषसिद्ध घोषित किया।
न्यायालय की मार्मिक टिप्पणी
अपने फैसले में न्यायालय ने भूमि विवाद से उत्पन्न सामाजिक विघटन पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला इस कटु सत्य का प्रतीक है कि जब भूमि का लालच मानवीय संवेदनाओं पर हावी हो जाता है, तब पिता-पुत्र, भाई-भाई और पूरे परिवार की मर्यादाएं रक्तरंजित हो जाती हैं।
न्यायालय ने कहा कि कुछ जमीन के लिए अपने ही रक्त संबंधियों की हत्या कर देना केवल दो व्यक्तियों का जीवन समाप्त करना नहीं, बल्कि परिवार जैसी पवित्र संस्था के मूल्यों की भी हत्या है।
निर्णय में कहा गया कि जिस भूमि पर परिवार का भविष्य संवरना था, उसी भूमि के विवाद ने पूरे परिवार का वर्तमान और भविष्य उजाड़ दिया। पिता के सामने पुत्रों का रक्त बहा, भाइयों ने भाइयों की जान ले ली और परिवार की महिलाएं भी इस त्रासदी का हिस्सा बन गईं।
पीड़ित परिवारों की पीड़ा पर भी जताई चिंता
न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि इस जघन्य अपराध का प्रभाव केवल दो व्यक्तियों की मृत्यु तक सीमित नहीं है। मृतकों की पत्नियां असमय वैधव्य का जीवन जीने को विवश हुईं और उनके बच्चे जीवनभर पिता के स्नेह, संरक्षण और मार्गदर्शन से वंचित हो गए।
अदालत ने कहा कि कानून किसी का जीवन वापस नहीं लौटा सकता, लेकिन न्याय व्यवस्था का दायित्व है कि ऐसा दंड दिया जाए जिससे समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे और यह स्पष्ट संदेश जाए कि संपत्ति के लालच में मानवता की हत्या करने वालों के प्रति कानून कभी उदार नहीं हो सकता।
पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत सहायता की अनुशंसा
न्यायालय ने सुरेश बनाम हरियाणा राज्य (2015) 1 एससीसी 461 के न्यायादृष्टांत का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराध से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
अदालत ने पाया कि भागबली पाटले और वकील पाटले की मृत्यु से उनके परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट और भरण-पोषण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने दोनों मृतकों की पत्नियों को जांच उपरांत पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत प्रतिकर राशि उपलब्ध कराने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुंगेली को अनुशंसा भेजने का निर्देश दिया।

लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी
प्रकरण में शासन की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष घटनाक्रम, गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य तथा कानूनी प्रावधानों को क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की सशक्त दलीलों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सभी आठ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इस फैसले को जिले के चर्चित दोहरे हत्याकांड में न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। न्यायालय के इस निर्णय से यह संदेश भी गया है कि भूमि विवाद या संपत्ति के लालच में की गई जघन्य वारदातों के प्रति कानून का रुख सख्त है और ऐसे अपराधों में दोषियों को कठोर दंड से नहीं बचाया जा सकता।

The News Related To The News Engaged In The www.apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.

