राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण हटाकर सुरक्षा बहाल करना
नई दिल्ली । भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग देश की गतिशीलता और आर्थिक विकास की रीढ़ हैं, जो प्रतिदिन लाखों यात्रियों को आवागमन की सुविधा प्रदान करते हैं और राज्यों के बीच माल परिवहन करते हैं। सड़क सुरक्षा और राजमार्गों के सुचारू संचालन के लिए हालांकि सबसे बड़े खतरों में से एक राजमार्गों के किनारे अनधिकृत अतिक्रमण हैं।
अवैध निर्माण, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, अस्थायी शेड, सड़क किनारे के विस्तार और अन्य अतिक्रमण सड़कों को संकरा कर देते हैं, दृश्यता बाधित करते हैं, जल निकासी व्यवस्था में बाधा डालते हैं और असुरक्षित प्रवेश और निकास बिंदु बनाते हैं। इस प्रकार की बाधाओं से वाहनों को अचानक लेन बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लगता है और चालकों का ध्यान भटकता है, जिसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। अतिक्रमण राजमार्ग रखरखाव, आपातकालीन प्रतिक्रिया और भविष्य के बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी बाधा डालते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक सड़कों को सुरक्षित और सुलभ बनाए रखने के महत्व को पहचानते हुए सार्वजनिक सड़कों और राजमार्गों पर अनधिकृत अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश दिया है।

इस प्रतिबद्धता के अनुरूप सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) देशभर में निरंतर अतिक्रमण-विरोधी अभियान चला रहे हैं। ये अभियान कानूनी प्रावधानों और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार चलाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य मार्ग अधिकार (आरओडब्ल्यू) को बहाल करना, यातायात की सुगमता में सुधार करना और सभी सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ाना है।
ऐसी ही एक पहल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), पीआईयू राजकोट द्वारा की जा रही है, जिसने भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्वतः संज्ञान रिट याचिका (सिविल) संख्या 9/2025 में दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए एक बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू किया है ।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएमएआई) ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले लगभग 693 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का सर्वेक्षण किया और अनधिकृत निर्माणों, अवैध व्यावसायिक पहुंच मार्गों और अनधिकृत डिवाइडर कटों के विरुद्ध 1,403 नोटिस जारी किए। ये सभी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे हैं और उच्च गति वाले राजमार्गों पर घातक दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाते हैं। प्राधिकरण ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 361 से अधिक अवैध पहुंच मार्गों और अतिक्रमणों को हटा दिया है और 150 अनधिकृत डिवाइडर गैप को स्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह अभियान संबंधित जिला मजिस्ट्रेटों (डीएम) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के साथ घनिष्ठ समन्वय में चलाया गया है, जिससे सुचारू और प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित हुआ है। हाल ही में चलाए गए व्यापक अभियानों में धार्मिक महत्व के सोमनाथ-द्वारका राजमार्ग पर विशेष रूप से बर्दिया और ऑनेस्ट होटल से हाथी चौक तक के खंड में सैकड़ों अनधिकृत कब्जों को सफलतापूर्वक हटाया गया है।
ये पहल महज़ प्रवर्तन अभ्यास नहीं हैं—ये सड़क सुरक्षा संबंधी उपाय हैं। हर अतिक्रमण हटाने से दृश्यता बहाल होती है, यातायात बेहतर होता है, आपातकालीन कार्यों के लिए जगह मिलती है और दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है। इसके साथ ही निर्धारित मार्ग की सुरक्षा राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश की रक्षा करती है और भविष्य में राजमार्ग विकास को अनावश्यक देरी से बचाती है।

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