चेम्बर के बिलासपुर संभाग कार्यकारी अध्यक्ष कमल सोनी ने दिया इस्तीफा

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संविधान में असंतुलन, नेतृत्व में असमानता और क्षेत्रीय उपेक्षा का लगाया आरोप, बोले- पद छोड़ा है, व्यापारियों की आवाज उठाने का संघर्ष नहीं

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के बिलासपुर संभाग कार्यकारी अध्यक्ष एवं संविधान संशोधन समिति के सदस्य कमल सोनी ने चेम्बर की कार्यप्रणाली और संविधान में मौजूद व्यवस्थाओं पर गंभीर असहमति जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सोनी ने आरोप लगाया कि प्रदेश के व्यापारिक संगठन में नेतृत्व और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था संतुलित नहीं है तथा बिलासपुर सहित प्रदेश के अन्य संभागों के व्यापारियों के मुद्दों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही है।

कमल सोनी के अनुसार वे लंबे समय से चेम्बर में संविधान संशोधन, संतुलित नेतृत्व और प्रदेश के सभी संभागों के व्यापारियों को समान प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त 2026 को होने वाली कार्यकारिणी बैठक के एजेंडे में संविधान संशोधन और बिलासपुर के व्यापारियों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया था, लेकिन बाद में इन मुद्दों को एजेंडे से हटा दिया गया। इसी घटनाक्रम के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।

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धारा 15 को लेकर उठाए सवाल

सोनी ने चेम्बर के संविधान की धारा 15 में मौजूद व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अध्यक्ष, महामंत्री और कोषाध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों के लिए वर्तमान में रायपुर और नया रायपुर क्षेत्र से संबंधित पात्रता निर्धारित है। उनका कहना है कि इससे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों और संभागों को संगठन के सर्वोच्च नेतृत्व में समान अवसर नहीं मिल पाता।

उन्होंने कहा कि जब चेम्बर पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला राज्य स्तरीय संगठन है, तो इसके नेतृत्व की व्यवस्था भी पूरे प्रदेश के सभी संभागों और क्षेत्रों के लिए समान अवसर वाली होनी चाहिए। उनके मुताबिक इसी असंतुलन को दूर करने के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन किया जाना जरूरी है।

‘चेम्बर पूरे प्रदेश की आवाज बने’

कमल सोनी ने कहा कि राज्य स्तरीय व्यापारिक संगठन का मूल दायित्व प्रदेश के सभी संभागों के व्यापारियों की समस्याओं और मांगों को राज्य एवं केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी तरीके से रखना है। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में रायपुर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े विषयों को अपेक्षाकृत अधिक प्राथमिकता मिलती है, जबकि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की मांगें उसी प्रभावी तरीके से सामने नहीं आ पातीं।

उन्होंने कहा कि संतुलित नेतृत्व के बिना संतुलित विकास संभव नहीं है। प्रदेश के प्रत्येक संभाग की अपनी आर्थिक, औद्योगिक और व्यापारिक विशेषताएं हैं और चेम्बर के स्तर पर सभी क्षेत्रों को समान महत्व मिलना चाहिए।

बिलासपुर को एससीआर में शामिल करने की मांग

सोनी ने बिलासपुर को स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) में शामिल करने की मांग को भी प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि बिलासपुर के व्यापारी लंबे समय से एससीआर के विस्तार की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार वर्तमान एससीआर में रायपुर, भिलाई, दुर्ग और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि बिलासपुर प्रदेश का प्रमुख व्यापारिक और व्यावसायिक केंद्र होने के साथ उच्च न्यायालय, रेलवे जोन तथा विभिन्न औद्योगिक और संस्थागत गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में बिलासपुर को एससीआर में शामिल करने से क्षेत्र के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास को नई दिशा मिल सकती है। उनका कहना है कि इस मांग को अपेक्षित गंभीरता से आगे नहीं बढ़ाया गया।

इंडस्ट्रियल पार्क की मांग भी उठाई

कमल सोनी ने बिलासपुर में इंडस्ट्रियल पार्क की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिलासपुर संभाग में बिजली, कोयला, रेलवे, लाइमस्टोन, हाईकोर्ट और पानी जैसे महत्वपूर्ण संसाधन एवं संस्थान मौजूद हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए इंडस्ट्रियल पार्क की मांग को प्रभावी ढंग से शासन तक पहुंचाने में संगठन की भूमिका अपेक्षित स्तर पर नहीं रही।

उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों की मांगों को प्रभावी ढंग से शासन तक पहुंचाया जाए तो बिलासपुर संभाग में निवेश, उद्योग और रोजगार के बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं।

औद्योगिक पलायन पर जताई चिंता

सोनी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न संभागों की आवश्यकताओं और मांगों को समय पर पूरा नहीं किए जाने तथा क्षेत्रीय जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं मिलने के कारण पिछले करीब 10 वर्षों में बिलासपुर सहित अन्य संभागों के प्रमुख उद्योगों का रायपुर और आसपास के क्षेत्रों की ओर पलायन बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश के सभी क्षेत्रों को समान प्रतिनिधित्व और विकास के अवसर नहीं मिलते हैं तो आर्थिक एवं औद्योगिक असंतुलन और बढ़ेगा। इसका नुकसान केवल किसी एक शहर या संभाग को नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को उठाना पड़ेगा।

‘पद छोड़ा है, संघर्ष नहीं’

कमल सोनी ने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्ति या किसी क्षेत्र के विरोध में नहीं है। उन्होंने इसे संगठन की व्यवस्था में आवश्यक सुधार और प्रदेश के व्यापारियों को समान नेतृत्व एवं प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में सिद्धांत आधारित निर्णय बताया।

उन्होंने कहा, “मैंने पद से त्यागपत्र दिया है, लेकिन अपने उद्देश्य से नहीं। बिलासपुर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के सभी संभागों के व्यापारियों एवं व्यवसायियों की आवाज को मजबूती प्रदान करने का प्रयास जारी रहेगा। उनकी समस्याओं, सुझावों और मांगों को सरकार तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए हम प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे।”

सोनी ने कहा कि उनका प्रयास तब तक जारी रहेगा, जब तक चेम्बर के मूल उद्देश्य यानी पूरे प्रदेश के व्यापारियों की प्रभावी और समान आवाज को वास्तविक रूप से स्थापित नहीं किया जाता।

उन्होंने दोहराया कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति या क्षेत्र के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापारियों के लिए समान नेतृत्व, समान प्रतिनिधित्व तथा संतुलित आर्थिक एवं औद्योगिक विकास की व्यवस्था स्थापित करने के लिए है।

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