एआई के माध्यम से किसी की तस्वीर बनाकर सोशल मीडिया पर छवि खराब करना गंभीर साइबर अपराध है – आयोग

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अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

रायपुर । छतीसगढ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू एवं सदस्य सुश्री दीपिका शोरी ने आज छत्तीसगढ राज्य महिला आयोग के कार्यालय में महिला उत्पीडन से संबंधित तीस प्रकरणों को सुनवाई हेतु रखा जिसमें सत्रह प्रकरणों की सुनवाई की गई व पांच प्रकरण नस्तीबद्ध किये गये। आयोग की अध्यक्ष डॉ.ममता साहू की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज द्वितीय सुनवाई हुईं। रायपुर जिले में आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदकगण सोशल मीडिया पर एआई के माध्यम से आवेदिका की आपत्तिजनक फोटो बनाकर आवेदिका की छवि को धूमिल रहे हैं। आवेदिका व अनावेदक को विस्तार से सुनकर आयोग ने कहा कि यह साइबर क्राईम का मामला प्रतीत होता है।

आवेदिका अनावेदकगणों के खिलाफ एफआईआर करने हेतु स्वतंत्र है। आवेदकगणों ने अपना पक्ष रखने हेतु समय की मांग की , जिससे प्रकरण आगामी सुनवाई हेतु रखा गया। आयोग की सुनवाई के दौरान आवेदिकागणों ने आयोग के समक्ष उपस्थित होकर इस बात की जानकारी दी कि पिछली सुनवाई गत माह 09 जुलाई को आवेदिकागण साढ़े पांच बजे तक आयोग कार्यालय मे उपस्थित रही थी , तब तक अनावेदक अनुपस्थित थे। जिसके पश्चात आवेदिकागणों से कोरे ऑर्डरशीट मे हस्ताक्षर यह कहकर कराया गया कि आपके प्रकरण मे गोपनीय तरीके से जांच की जायेगी। आवेदिकागणों के द्वारा आयोग कार्यालय से सूचना के अधिकार के माध्यम से दस्तावेज निकाले जाने पर पता चला कि आवेदिकागणों को बिना सुने ही प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया गया है।

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आयोग के समक्ष आज सुनवाई हेतु आवेदिकागणों ने अपनी शिकायत पर पुनः विचार करते हुये निष्पक्ष जांच हेतु निवेदन किया।एक प्रकरण मे आवेदिका ने अपना पक्ष रखते हुये आयोग के समक्ष बताया कि पिछली सुनवाई में अनावेदिका साढ़े पांच बजे तक उपस्थित रही थी तब तक अनावेदक अनुपस्थित रहे। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने अनावेदक के खिलाफ शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर दुर्व्यवहार किये जाने व धमकी दिये जाने से संबंधित प्रकरण दर्ज कराया था। आज की सुनवाई में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक व आवेदिका के मध्य सुलह हो चुकी है और दोनो साथ मे रह रहे हैं। इस स्तर पर आयोग द्वारा प्रकरण निगरानी हेतु रखा गया। एक प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि अनावेदक (पति) का अन्य महिला से अवैध संबंध है। सुनवाई के दौरान अनावेदक से विस्तारपूर्वक पूछे जाने के बाद उसने आयोग के समक्ष आवेदिका की बहन (मामा की बेटी) के साथ रहना स्वीकार किया। आयोग द्वारा अनावेदक को निर्देशित किया गया कि वह अपनी पत्नी आवेदिका को पुलिस अभिरक्षा के साथ ससुराल लेकर जावें। प्रकरण आगामी सुनवाई हेतु रखा गया। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने अनावेदक के खिलाफ घर से निकाल देने व पुश्तैनी संपत्ति से बेदखल कर देने संबंधी शिकायत की। आयोग द्वारा आवेदिका को विधिक सहायता से अधिवक्ता देकर परामर्श हेतु सलाह दिया गया। अन्य प्रकरण मे आवेदिका ने अपने बहूव बेटे के द्वारा प्रताड़ित कर बेवजह परेशान किये जाने की शिकायत की थी। आवेदिका का कथन है कि उसका भरण-पोषण उसका बड़ा बेटा वहन कर रहा है। तथा महतारी वंदन के पैसे भी आवेदिका को मिलते है। अनावेदक का कहना है कि आवेदिका (मां) ने कभी भी सपोर्ट नही किया। उभय पक्षों को विस्तार से सुना गया। आयोग ने उभय पक्षों को समझाईश दिया कि उभय पक्ष शांति पूर्वक रहे।

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