हरियाली अमावस्या पर पौधरोपण का संदेश, उर्मिला रमेश यादव ने दी शुभकामनाएं
प्रकृति संरक्षण के लिए पौधरोपण को बनाया जाए जनअभियान, आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण तैयार करने की अपील
मुंगेली। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर जिला पंचायत मुंगेली की पूर्व सभापति उर्मिला रमेश यादव ने जिलेवासियों सहित प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि हरियाली अमावस्या केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को मजबूत करने का भी अवसर है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अवसर पर अधिक से अधिक पौधरोपण करने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

हरियाली अमावस्या प्रकृति से जुड़ने का पर्व
हरियाली अमावस्या सावन मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। बारिश के मौसम में चारों ओर हरियाली छाने के कारण इस पर्व का प्रकृति और पर्यावरण से विशेष संबंध माना जाता है। वर्ष 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को मनाई जा रही है। इस अवसर पर पौधरोपण, प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में पहल करने का विशेष महत्व है।

उर्मिला रमेश यादव ने कहा कि पेड़-पौधे मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वृक्ष पर्यावरण को संतुलित रखने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए पौधरोपण को केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं मानकर इसे निरंतर चलने वाले अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है।
पौधा लगाना ही नहीं, उसकी देखभाल भी जरूरी
उन्होंने कहा कि अक्सर पौधरोपण के बाद उनकी उचित देखभाल नहीं होने के कारण कई पौधे नष्ट हो जाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधा लगाने के साथ उसकी सुरक्षा और नियमित देखभाल की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। यदि लगाए गए पौधों को नियमित पानी, सुरक्षा और उचित देखभाल मिले तो वे भविष्य में बड़े वृक्ष बनकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
पूर्व सभापति ने कहा कि गांवों और शहरों में खाली स्थानों, सार्वजनिक परिसरों, स्कूलों, सड़क किनारे तथा अन्य उपयुक्त स्थानों पर पौधरोपण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। स्थानीय जलवायु और भूमि के अनुरूप उपयोगी एवं छायादार पौधों का चयन कर उनका संरक्षण किया जाए तो इससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण में सामूहिक भागीदारी की जरूरत
उर्मिला रमेश यादव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की इसमें भूमिका है। जब नागरिक, सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि, युवा और विद्यार्थी मिलकर पौधरोपण एवं संरक्षण के कार्य में भागीदारी करेंगे, तभी इसका व्यापक और स्थायी प्रभाव दिखाई देगा।
उन्होंने कहा कि हरियाली अमावस्या का पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अपने आसपास के पर्यावरण को बेहतर बनाने का अवसर देता है। इस दिन एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी लेना भी प्रकृति के प्रति एक महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।
हर व्यक्ति ले पौधा लगाने और संरक्षण का संकल्प
पूर्व सभापति ने जिलेवासियों से आह्वान किया कि हरियाली अमावस्या के अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लें और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करें। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में न केवल छाया देगा, बल्कि स्वच्छ हवा, हरित वातावरण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी योगदान देगा।
उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण के छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव का आधार बनते हैं। इसलिए हरियाली अमावस्या को पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ मनाया जाना चाहिए।
आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण जरूरी
उर्मिला रमेश यादव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पर्याप्त हरियाली और सुरक्षित पर्यावरण उपलब्ध कराना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है। पेड़ों का संरक्षण करके ही प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
उन्होंने हरियाली अमावस्या के पावन पर्व पर सभी के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व लोगों में प्रकृति के प्रति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत करे।
उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि हरियाली अमावस्या पर एक पौधा जरूर लगाएं, उसकी जिम्मेदारी लें और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

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