गौपालन बना मधुसुदन भगत की मजबूत आय का साधन

0
IMG-20260909-WA0968

27 गायों से प्रतिदिन 60 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन, स्थानीय बाजार में होती है पूरी खपत

रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के किसानों को कृषि के साथ-साथ पशुपालन जैसी गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय के स्थायी और बेहतर साधन विकसित किए जा रहे हैं। शासन के प्रयासों और विभागीय सहयोग से प्रदेश के अनेक किसान गौपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। जशपुर जिले के नगर पंचायत बगीचा के किसान मधुसुदन भगत ऐसे ही प्रगतिशील पशुपालक हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, अनुभव और आधुनिक पशुपालन तकनीकों के जरिए गौपालन को अपनी मजबूत आय का साधन बनाया है।

वर्ष 2005 से कर रहे बड़े स्तर पर गौपालन

मधुसुदन भगत वर्ष 2005 से बड़े स्तर पर गौपालन कर रहे हैं। वर्तमान में उनके पास 27 गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन 60 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन होता है। उनके द्वारा उत्पादित दूध की स्थानीय स्तर पर ही पूरी खपत हो जाती है। इससे उन्हें नियमित और अच्छी आय प्राप्त हो रही है।

गौपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाकर भगत ने पशुपालन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्षों से इस कार्य से जुड़े होने के कारण उन्हें पशुओं की देखभाल, उनके खान-पान और दुग्ध उत्पादन से संबंधित बारीकियों का अच्छा अनुभव प्राप्त हुआ है।

NTPC World Environment Day

जर्सी के साथ स्थानीय एवं मिश्रित नस्ल की गायें

मधुसुदन भगत के गौपालन में जर्सी नस्ल के साथ स्थानीय एवं मिश्रित नस्ल की गायें भी शामिल हैं। वे पशुओं के स्वास्थ्य और बेहतर दुग्ध उत्पादन के लिए विशेष देखभाल करते हैं।

बगीचा स्थित पशु चिकित्सालय के माध्यम से वे अपने पशुओं का नियमित उपचार एवं टीकाकरण करवाते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी से उन्हें बेहतर दुग्ध उत्पादन में मदद मिल रही है। समय पर उपचार और टीकाकरण के साथ पशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना उनके गौपालन की महत्वपूर्ण विशेषता है।

संतुलित आहार से दूध उत्पादन पर जोर

मधुसुदन भगत ने बताया कि उनकी गायें सुबह और शाम नियमित रूप से दूध देती हैं। पशुओं के पोषण का भी वे विशेष ध्यान रखते हैं। गायों के आहार में मक्के के चूरे का उपयोग किया जाता है, जिसे खौलते पानी में पकाकर पशुओं को खिलाया जाता है।

उनका अनुभव है कि पौष्टिक आहार से पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ दूध उत्पादन में भी वृद्धि होती है। इसी कारण वे पशुओं के आहार और उनकी नियमित दिनचर्या को लेकर विशेष सावधानी बरतते हैं।

गोबर से तैयार कर रहे वर्मी कम्पोस्ट

गौपालन से निकलने वाले गोबर का भी मधुसुदन भगत बेहतर उपयोग कर रहे हैं। प्रतिदिन दो बार गोबर एकत्रित कर उसे वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने में उपयोग किया जाता है। तैयार जैविक खाद का उपयोग वे अपने खेतों में करते हैं।

गोबर से जैविक खाद तैयार करने से उन्हें खेती में इसका उपयोग करने का लाभ मिल रहा है। इससे खेती की लागत कम करने और खेतों की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। इस तरह गौपालन से प्राप्त होने वाले संसाधनों का उपयोग खेती में भी किया जा रहा है।

नियमित देखभाल और विभागीय मार्गदर्शन को बताया जरूरी

मधुसुदन भगत का कहना है कि गौपालन में नियमित देखभाल, संतुलित आहार, पशुओं का समय पर टीकाकरण और विभागीय मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। वर्षों के अनुभव से उन्होंने पशुपालन की बारीकियों को समझा है और इसी का परिणाम है कि आज गौपालन उनके परिवार के लिए नियमित एवं मजबूत आय का माध्यम बन गया है।

किसानों के लिए प्रेरणा बन रही सफलता

मधुसुदन भगत की सफलता यह संदेश देती है कि आधुनिक तकनीक, सही पशु प्रबंधन, मेहनत और विभागीय सहयोग को अपनाकर गौपालन किसानों के लिए कृषि के साथ-साथ स्थायी एवं बेहतर आय का प्रभावी साधन बन सकता है। 27 गायों से प्रतिदिन 60 लीटर से अधिक दूध उत्पादन और स्थानीय बाजार में पूरी खपत उनके पशुपालन मॉडल की सफलता को दर्शाती है। साथ ही गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर खेती में उपयोग करने से पशुपालन और कृषि के बीच बेहतर तालमेल भी स्थापित हो रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel

Latest News

error: Content is protected !!