आत्मरक्षा प्रशिक्षण की राशि पर उठे सवाल, अब स्वतंत्र जांच की मांग
करीब 59.40 लाख रुपए से जुड़े भुगतान की होगी पड़ताल? PFMS, बैंक खातों से लेकर स्कूलवार रिकॉर्ड के मिलान की मांग
मुंगेली। छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से संचालित रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में शासकीय विद्यालयों को प्राप्त प्रशिक्षण राशि के भुगतान और उपयोग को लेकर शिकायत सामने आई है। कराटे प्रशिक्षक एवं आरटीआई आवेदक चैतराम साहू ने 15 सितंबर को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत कर मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है। शिकायत में करीब 59.40 लाख रुपए की शासकीय राशि से जुड़े वित्तीय लेन-देन और भुगतान की जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस प्रकरण में पूर्व में जिला प्रशासन की निगरानी में जांच हो चुकी है और अपर कलेक्टर श्री जी.एल. यादव द्वारा जांच प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया था। अब शिकायतकर्ता ने पूर्व जांच के साथ-साथ मूल वित्तीय अभिलेखों का स्वतंत्र स्तर पर परीक्षण कराने की मांग उठाई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

PFMS भुगतान से लेकर बैंक रिकॉर्ड तक जांच की मांग
शिकायत का प्रमुख आधार योजना की राशि के भुगतान से संबंधित अभिलेख बताए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि वर्ष 2023-24 में संबंधित विद्यालयों को प्राप्त राशि का विद्यालयवार मिलान कराया जाए। इसके लिए PFMS के मूल भुगतान रिकॉर्ड, संबंधित बैंक खातों के स्टेटमेंट, भुगतान वाउचर, प्रशिक्षण आदेश, प्रशिक्षण की अवधि तथा उपस्थिति संबंधी अभिलेखों का परीक्षण कराने का अनुरोध किया गया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर श्री देव कुमार प्रधान के संबंध में कई विद्यालयों से जुड़ी राशि एक ही खाते में PFMS के माध्यम से भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस दावे की पुष्टि के लिए मूल PFMS रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट की जांच जरूरी बताई गई है।
यही वजह है कि शिकायतकर्ता ने केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित विद्यालयों के मूल अभिलेखों और वास्तविक प्रशिक्षण गतिविधियों का भी मिलान कराने की मांग की है।
प्रशिक्षणकर्ता की भूमिका और भुगतान प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
शिकायत में श्री मोहनलाल लहरी, श्री राजूराम निषाद और श्री देव कुमार प्रधान सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार जांच में यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति किन विद्यालयों में प्रशिक्षणकर्ता के रूप में जुड़े थे, प्रशिक्षण किस अवधि में कराया गया, प्रशिक्षण के लिए आदेश किस स्तर से जारी हुए और भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
इसके अलावा प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति, प्रशिक्षण की वास्तविक अवधि, विद्यालयों में उपलब्ध रिकॉर्ड तथा भुगतान से संबंधित दस्तावेजों का आपस में मिलान कराने की मांग की गई है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अभिलेखों में दर्ज भुगतान और प्रशिक्षण गतिविधियों के बीच कितना सामंजस्य है।
पूर्व कार्रवाई और हाईकोर्ट के आदेश का भी हवाला
शिकायत में इस मामले से जुड़ी पूर्व विभागीय कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित शिक्षकों को पूर्व में शो-कॉज नोटिस जारी किए गए थे। विभागीय कार्रवाई के बाद एक वेतनवृद्धि रोकने का दंड भी दिया गया था। इसके विरुद्ध संबंधित व्यक्तियों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।
शिकायतकर्ता ने WPS No. 5370/2025 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा 16 फरवरी 2026 को पारित आदेश का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेश में पूर्व विभागीय कार्रवाई में निर्धारित प्रक्रिया के पालन से जुड़ी कमी के कारण दंड आदेश निरस्त किया गया तथा नियमानुसार उचित प्रक्रिया अपनाकर आगे कार्रवाई की स्वतंत्रता दी गई।
शिकायतकर्ता का तर्क है कि न्यायालय के इस आदेश को मूल वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, अलग से यह परीक्षण आवश्यक है कि योजना की राशि का भुगतान नियमानुसार हुआ अथवा नहीं।
हालांकि, न्यायालय के आदेश की वास्तविक कानूनी स्थिति और उसके प्रभाव का निर्धारण संबंधित आदेश के पूर्ण पाठ एवं प्रशासनिक कार्रवाई के आधार पर ही किया जा सकता है।
जिनकी भूमिका जांच में आ सकती है, उन्हीं से जांच न कराने की मांग
चैतराम साहू ने कलेक्टर से यह भी मांग की है कि जांच ऐसे अधिकारी या कर्मचारियों के अधीन न कराई जाए, जिनकी भूमिका अथवा निर्णय स्वयं जांच के दायरे में आ सकते हैं। इसके स्थान पर जिला प्रशासन के स्तर से किसी स्वतंत्र एवं सक्षम अधिकारी या जांच समिति को जिम्मेदारी देने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता ने जांच में जिला प्रशासन, लेखा एवं वित्त से जुड़े अधिकारियों तथा आवश्यकता के अनुसार अन्य स्वतंत्र अधिकारियों को शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच का दायरा केवल एक-दो दस्तावेजों तक सीमित न रखकर PFMS भुगतान, बैंक लेन-देन, प्रशिक्षण आदेश, उपस्थिति पंजी, भुगतान वाउचर और विद्यालयवार अभिलेखों तक रखा जाना चाहिए।
जनदर्शन में कलेक्टर ने दिया मौखिक आश्वासन
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने 15 सितंबर 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत की। जनदर्शन के दौरान कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मौखिक रूप से जांच कराने का आश्वासन दिया।
हालांकि, शिकायतकर्ता के अनुसार उन्हें फिलहाल जांच के संबंध में कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में अब प्रशासन की ओर से जांच के लिए औपचारिक आदेश जारी होता है या नहीं और जांच किस अधिकारी अथवा समिति को सौंपी जाती है, इस पर नजर रहेगी।
जांच में सामने आएगा भुगतान का वास्तविक हिसाब
शिकायतकर्ता ने कहा है कि उनकी शिकायत का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि छात्राओं के आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए शासन से उपलब्ध कराई गई राशि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
उनकी मांग है कि यदि जांच में कोई अनियमित या अनधिकृत भुगतान प्रमाणित होता है तो नियमानुसार संबंधित राशि की वसूली की जाए। साथ ही यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, गलत सत्यापन अथवा अन्य भूमिका जांच में सामने आती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।
उन्होंने जांच पूरी होने तक संबंधित मूल अभिलेख, PFMS रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज, भुगतान वाउचर और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग भी की है।
अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच होती है तो उसके निष्कर्ष से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में उठाए गए वित्तीय भुगतान संबंधी सवालों में कितनी वास्तविकता है, राशि का उपयोग किन मदों में हुआ और संबंधित अभिलेखों में दर्ज भुगतान प्रक्रिया नियमानुसार थी या नहीं। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी जांच के निष्कर्ष के बिना तय नहीं मानी जा सकती।






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