ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश

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43 सेवाएं, 9 शासकीय अधिनियम और 8 विभाग एक्ट के दायरे में; 90 दिनों की विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर जोर

रायपुर । मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के क्रियान्वयन को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप विस्तृत एवं चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के साथ ही इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई।

बैठक में एक्ट के तहत शामिल सेवाओं, विभागों और शासकीय अधिनियमों की जानकारी दी गई। बताया गया कि एक्ट के शेड्यूल-1 के अंतर्गत 43 सेवाएं, 9 शासकीय अधिनियम और 8 प्रशासनिक विभाग शामिल किए गए हैं। इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 27 अगस्त 2026 से 90 दिनों की विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। कार्ययोजना के माध्यम से एक्ट के प्रावधानों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां निर्धारित करने पर जोर दिया जा रहा है।

तीन स्तरों पर होगी निगरानी और समीक्षा

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के क्रियान्वयन के लिए तीन-स्तरीय निगरानी एवं समीक्षा प्रणाली निर्धारित की गई है। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एपेक्स काउंसिल, कार्यकारी स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला सशक्त समिति गठित की गई है।

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इस व्यवस्था के तहत एक्ट के क्रियान्वयन की विभिन्न स्तरों पर नियमित समीक्षा की जाएगी। इससे सेवाओं के समयबद्ध निपटारे, विभागों के बीच समन्वय और जिला स्तर पर आने वाली समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने पर जोर रहेगा।

एक्ट का प्रथम प्रारूप तैयार करने के निर्देश

मुख्य सचिव विकासशील ने बैठक में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट का प्रथम प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित विभागों से जल्द सुझाव प्राप्त करने तथा आवश्यक संशोधन प्रस्ताव पहले से तैयार रखने को कहा है। प्राप्त सुझावों और आवश्यक संशोधनों के आधार पर एक्ट के प्रारूप को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

मुख्य सचिव ने एक्ट के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

डीम्ड अप्रूवल और पेनाल्टी के प्रावधानों पर चर्चा

बैठक में डीम्ड अप्रूवल प्रमाण-पत्र के प्रावधानों पर भी विशेष रूप से चर्चा हुई। निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रमाण-पत्र जारी नहीं होने वाले मामलों की समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। विलंब की स्थिति में नियमानुसार पेनाल्टी लगाने के प्रावधानों के पालन पर भी जोर दिया गया।

मुख्य सचिव ने एक्ट का चरणबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, नोडल विभागों का निर्धारण करने तथा आवश्यक मानक कार्यप्रणाली (SOP) अधिसूचित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा विभागवार सेवाओं की नियमित समीक्षा और त्रैमासिक (क्वार्टरली) मॉनिटरिंग की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।

विभागवार सेवाओं की होगी नियमित निगरानी

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि एक्ट के अंतर्गत आने वाली सेवाओं की विभागवार नियमित समीक्षा की जाए। निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का निपटारा हो रहा है या नहीं, इसमें किसी स्तर पर विलंब तो नहीं हो रहा तथा डीम्ड अप्रूवल से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है या नहीं, इसकी निगरानी की जाएगी।

बैठक में विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव मनीष कुमार ठाकुर, मुख्यमंत्री के सचिव एवं वाणिज्यिक कर तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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