वसुंधरा परियोजना के तहत राजस्व अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण

0
IMG-20260917-WA1579

नागरिक सेवाएं होंगी सरल, पारदर्शी और त्वरित; प्रदेश के सभी 33 जिलों तक चरणबद्ध तरीके से पहुंचेगी परियोजना

रायपुर । छत्तीसगढ़ में नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं अधिक सरल, पारदर्शी और त्वरित रूप से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वसुंधरा परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर कार्य शुरू किया गया है। परियोजना के अंतर्गत जिला एवं तहसील स्तर के राजस्व रिकॉर्ड रूम का आधुनिकीकरण करने के साथ ही महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इसी संबंध में गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में परियोजना के विभिन्न पहलुओं और इसके चरणबद्ध क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव विकासशील ने नामांतरण सहित अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में स्पष्टता और एकरूपता लाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने राजस्व अभिलेखों के व्यवस्थित संधारण और उनके सुरक्षित संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया।

पहले चयनित जिलों में होगा पूरा डिजिटलीकरण

वसुंधरा परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके पहले चरण में कुछ चयनित जिलों के राजस्व अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाएगा। इसके बाद परियोजना का विस्तार प्रदेश के सभी 33 जिलों में किया जाएगा।

NTPC World Environment Day

परियोजना के माध्यम से पुराने और महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे अभिलेखों के संरक्षण के साथ-साथ भविष्य में जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेजों को आसानी से खोजने और उपलब्ध कराने में भी सुविधा होगी।

महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेजों की होगी स्कैनिंग

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने बैठक में बताया कि डिजिटलीकरण के तहत कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की स्कैनिंग और डाटा एंट्री की जाएगी। इनमें अधिकार अभिलेख पंजी, बंदोबस्त एवं चकबंदी मिसल, निस्तार पत्रक, खसरा, राजस्व न्यायालय के आदेश, मूल ग्राम नक्शे, संशोधन पंजी, वर्ष 2020 से पूर्व के खसरा पंचशाला अभिलेख और किश्तबंदी खतौनी जैसे रिकॉर्ड शामिल हैं।

इन दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किए जाने से पुराने राजस्व अभिलेखों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी। साथ ही रिकॉर्ड के व्यवस्थित रखरखाव और आवश्यकता के समय उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में भी सुविधा बढ़ेगी।

सेवा सेतु पोर्टल से जोड़े जाएंगे डिजिटल रिकॉर्ड

परियोजना के तहत तैयार किए जाने वाले डिजिटल रिकॉर्ड भंडार को सेवा सेतु पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इसके बाद नागरिकों को राजस्व सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने और निर्धारित शुल्क का भुगतान करने की सुविधा उपलब्ध होगी।

इसके अलावा नागरिक प्रमाणित डिजिटल प्रतियां प्राप्त कर सकेंगे और अपने आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे। इससे राजस्व संबंधी सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होने की उम्मीद है और सेवा प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।

AI और OCR तकनीक से पुराने रिकॉर्ड खोजना होगा आसान

वसुंधरा परियोजना के तहत रिकॉर्ड रूम में रखे भौतिक अभिलेखों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से व्यवस्थित करने की भी योजना है। इसके लिए बारकोड आधारित वर्गीकरण और डिजिटल लोकेशन व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे रिकॉर्ड की पहचान, स्थान और उपलब्धता को व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सकेगा।

पुराने और हस्तलिखित दस्तावेजों को आसानी से खोजने के लिए ओसीआर (OCR) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही एआई (AI) आधारित खोज सुविधा विकसित करने की योजना भी बनाई गई है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में डिजिटल दस्तावेजों के बीच आवश्यक रिकॉर्ड को खोजने की प्रक्रिया आसान बनाने का प्रयास किया जाएगा।

वसुंधरा परियोजना के तहत राजस्व अभिलेखों के डिजिटलीकरण, रिकॉर्ड रूम के आधुनिकीकरण और डिजिटल सेवाओं के एकीकरण से नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं अधिक सरल और पारदर्शी रूप में उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel

Latest News

error: Content is protected !!