आदिवासी जमीन की खरीदी-बिक्री के नाम पर 10 लाख रुपए की धोखाधड़ी जमीन कारोबारी पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

बिलासपुर । न्यायधानी बिलासपुर में जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर 10 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। दयालबंद में रहने वाले विशालचंद्र केसरी ने भारतीय नगर निवासी प्रफुल्ल झा पर दूसरे की जमीन को खुद से अनुबंधित बताकर सौदा करने और एडवांस के रूप में 10 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336, 338 और 340 के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी है।
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, विशालचंद्र केसरी ने आरोप लगाया है कि प्रफुल्ल झा ने बिलासपुर के अमेरी क्षेत्र में स्थित कई जमीनों को अपने से अनुबंधित बताते हुए 70 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से बेचने का सौदा किया था। इस संबंध में 10 दिसंबर 2025 को अनुबंध किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से 10 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए थे। आरोप है कि अनुबंध में शामिल जमीनों में कुछ भूखंड राजस्व रिकॉर्ड में अन्य व्यक्तियों के नाम पर दर्ज थे।

शिकायतकर्ता के अनुसार,इनमें खसरा नंबर 232 की 0.2430 हेक्टेयर जमीन चंद्रकली बाई के नाम पर दर्ज थी, जो गोंड आदिवासी समुदाय से थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस जमीन को सामान्य वर्ग की भूमि बताते हुए सौदे में शामिल किया गया, जबकि संबंधित जमीन के स्वामित्व और अनुबंध को लेकर वास्तविक तथ्यों की जानकारी छिपाई गई।
विशालचंद्र केसरी ने शिकायत में बताया कि रकम लेने के बाद जब उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए प्रफुल्ल झा से संपर्क किया तो वह लगातार टालमटोल करता रहा। कई बार प्रयास करने के बावजूद रजिस्ट्री नहीं होने और संपर्क का जवाब नहीं मिलने पर उन्हें धोखाधड़ी की आशंका हुई।

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फर्जी तरीके से जमीन को बेचने की कोशिश

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रफुल्ल झा ने कृष्णा दुआ के नाम से जारी मुख्तियारनामा के आधार पर जमीनों को बेचने का अधिकार होने की बात कही थी। बाद में उन्हें कथित तौर पर जानकारी मिली कि संबंधित मुख्तियारनामा जमीन बिक्री के लिए अधिकृत नहीं था और उसकी प्रामाणिकता पर भी सवाल उठे थे।
शिकायत के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 को मसानगंज और तोरवा क्षेत्र की अन्य जमीनों के संबंध में भी प्रफुल्ल झा के साथ अनुबंध किया गया था।शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन जमीनों के विक्रय के लिए भी मुख्तियारनामा के जरिए अधिकार होने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक किसी भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। आवेदन में विशालचंद्र केसरी ने प्रफुल्ल झा के खिलाफ पहले की शिकायत और सिविल लाइन थाने में दर्ज एफआईआर क्रमांक 631, 10 मई 2026 का भी उल्लेख किया है।

आरोपी जमीनों के फर्जी अनुबंध के
के जरिए करता है प्रभावित

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीनों के फर्जी अनुबंध के जरिए अन्य लोगों को भी प्रभावित करने की आशंका है। शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336, 338 और 340 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी प्रफुल्ल झा को गिरफ्तार कर कार्रवाई में जुटी है।

4 महीने पहले भी सिविल लाइन थाने में दर्ज हुआ था मामला

आरोपी प्रफुल्ल झा का यह पहला मामला नहीं है। वह लंबे समय से शहर में इसी तरह का फर्जीवाड़ा करता आ रहा है। महज चार महीने पहले 10 मई 2026 को थाना सिविल लाइन बिलासपुर में उसके खिलाफ अपराध दर्ज किया गया था।जब प्रार्थी विशालचंद्र केसरी को सिविल लाइन थाने में प्रफुल्ल झा के खिलाफ 420 की एफआईआर दर्ज होने की जानकारी मिली, तब उन्हें अहसास हुआ कि वे भी एक संगठित जालसाजी का शिकार हो चुके हैं। आरोपी द्वारा बार-बार रजिस्ट्री टालने और संपर्क काटने के बाद मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा।

पुलिस की कार्रवाई और धाराएं

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर थाना सिविल लाइन में मामले की जांच कर आरोपी प्रफुल्ल झा के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है। पुलिस अब आरोपी की संपत्ति और उसके द्वारा पूर्व में किए गए अन्य फर्जीवाड़ों की कुंडली खंगाल रही है।

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