छत्तीसगढ़ में अवकाशों की झड़ी, संविधान दिवस पर एक और छुट्टी दे दीजिए जनाब!

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26 नवंबर को ऐच्छिक अवकाश घोषित करने की मांग, गेवा संगठन तीन वर्षों से कर रहा पहल

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी सामान्य प्रशासन विभाग को लिखा था पत्र : कृष्ण कुमार नवरंग

मुंगेली। छत्तीसगढ़ में 26 नवंबर संविधान दिवस के अवसर पर ऐच्छिक अवकाश घोषित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ (गेवा) ने राज्य सरकार से संविधान दिवस को ऐच्छिक अवकाश की सूची में शामिल करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से लगातार इस मांग को शासन के समक्ष रखा जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर निर्णय नहीं लिया गया है। गेवा के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग ने सरकार से कर्मचारियों की भावनाओं और संविधान के महत्व को ध्यान में रखते हुए शीघ्र पहल करने की अपील की है।

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संविधान दिवस केवल तारीख नहीं, लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक

गेवा प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग ने कहा कि 26 नवंबर केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है, बल्कि भारतीय संविधान के गौरव, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के सम्मान का प्रतीक है। इसी दिन वर्ष 1949 में संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अंगीकृत किया था। संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है और प्रत्येक नागरिक के अधिकारों एवं कर्तव्यों का मार्गदर्शन करता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संविधान दिवस को पूरे देश में उत्साहपूर्वक मनाने का आह्वान किया है। ऐसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिवस पर छत्तीसगढ़ में ऐच्छिक अवकाश घोषित किया जाना संविधान के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करेगा। इससे शासकीय कर्मचारियों को अपनी सुविधानुसार संविधान दिवस से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिल सकेगा।

डॉ. रमन सिंह ने भी सामान्य प्रशासन विभाग को लिखा था पत्र

नवरंग ने बताया कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी इस मांग पर सहमति व्यक्त करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर आवश्यक पहल करने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद अब तक इस संबंध में निर्णय नहीं लिया जाना समझ से परे है।

उन्होंने कहा कि जब इस विषय पर पहले भी शासन का ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है, तो अब मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए। संगठन को उम्मीद है कि राज्य सरकार इस विषय की गंभीरता को समझते हुए संविधान दिवस को ऐच्छिक अवकाश की सूची में शामिल करने पर विचार करेगी।

कर्मचारियों को कार्यक्रमों में भाग लेने का मिलेगा अवसर

गेवा के अनुसार, 26 नवंबर को प्रदेश के विभिन्न शासकीय कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों में संविधान दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में संविधान की प्रस्तावना, नागरिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।

संगठन का मानना है कि संविधान दिवस पर ऐच्छिक अवकाश घोषित होने से कर्मचारी अपनी सुविधा और इच्छानुसार ऐसे कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे। इससे संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

सरकार से संवेदनशीलता के साथ विचार करने की अपील

कृष्ण कुमार नवरंग ने कहा कि संविधान देश की शासन व्यवस्था का मूल आधार है। ऐसे में संविधान दिवस को भी विशेष महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि कर्मचारियों की भावनाओं, संविधान के सम्मान और लोकतांत्रिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए 26 नवंबर को ऐच्छिक अवकाश की सूची में शामिल किया जाए।

उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा, “छत्तीसगढ़ में अवकाशों की झड़ी लगी है, एक और शामिल कर लीजिए जनाब! आखिर संविधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसर पर ऐच्छिक अवकाश घोषित करने में क्या परेशानी है?”

शीघ्र सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

गेवा प्रदेशाध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस पर ऐच्छिक अवकाश की घोषणा कर्मचारियों के लिए सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ संविधान के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश भी देगी।

संगठन ने शासन से आग्रह किया है कि पिछले तीन वर्षों से लंबित इस मांग पर अब पहल करते हुए 26 नवंबर संविधान दिवस को प्रदेश की ऐच्छिक अवकाश सूची में शामिल किया जाए।

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