अवैध प्लॉटिंग पर विधानसभा में घमासान, मंत्री टंकराम वर्मा घिरे—विपक्ष का वॉकआउट
सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी उठाए सवाल, ईओडब्ल्यू जांच की मांग; कर्ज में 20.93% वृद्धि का मुद्दा भी गरमाया
रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। धमतरी और कांकेर सहित प्रदेशभर में हो रही अवैध प्लॉटिंग को लेकर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी घेरा। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
सत्ता-विपक्ष दोनों ने घेरा
प्रश्नकाल के दौरान अंबिका मरकाम ने कांकेर और धमतरी में हो रही अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि अवैध प्लॉटिंग करने वालों को सरकार संरक्षण दे रही है और अधिकारी लीपापोती में लगे हैं।
सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने भी मंत्री से जवाब मांगते हुए कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
मंत्री का जवाब—कार्रवाई जारी
मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि धमतरी जिले में 3 और कांकेर में 5 अवैध प्लॉटिंग की शिकायतें मिली हैं। कांकेर में 175 खसरों से जुड़े मामलों में से 8 की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 167 मामलों की जांच जारी है।
उन्होंने बताया कि तीन राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है और तीन पटवारियों की वेतनवृद्धि रोकी गई है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
ईओडब्ल्यू जांच की मांग तेज
मामले में भूपेश बघेल और अजय चंद्राकर सहित कई विधायकों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
विपक्ष ने ईओडब्ल्यू से जांच कराने की मांग उठाई, लेकिन मंत्री ने कहा कि राजस्व अमला जांच करने में सक्षम है और जांच जारी है।
जिलों में बनेंगी कमेटियां
मंत्री ने बताया कि अवैध प्लॉटिंग और अतिक्रमण रोकने के लिए जिला स्तर पर कमेटियों का गठन किया जा रहा है। इन कमेटियों की अध्यक्षता कलेक्टर करेंगे और उनकी अनुशंसा पर कार्रवाई होगी। अब तक 10-12 जिलों में ऐसी समितियां गठित की जा चुकी हैं।
भू-भाटक पर नए निर्देश 3 माह में
प्रश्नकाल में देवेन्द्र यादव और सावित्री मंडावी ने भू-भाटक शुल्क की अधिक दरों का मुद्दा उठाया।
मंत्री ने स्वीकार किया कि 2015 के आदेश में स्पष्टता की कमी है और इसके लिए तीन माह के भीतर नया ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
गोदावरी सोलर प्लांट पर हंगामा
चातुरी नंद ने महासमुंद जिले में गोदावरी सोलर प्लांट को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि जमीन आवंटन में अनियमितता हुई है।
इस पर वन मंत्री केदार कश्यप ने आरोपों को खारिज किया। बहस के दौरान सदन में शोर-शराबा बढ़ गया।
आदिवासी जमीन का मुद्दा भी उठा
गोमती साय ने जशपुर में आदिवासी जमीन की खरीद-फरोख्त का मुद्दा उठाया।
विधायक भावना बोहरा ने कवर्धा में भी इसी तरह के मामलों की ओर ध्यान दिलाया।
मंत्री ने बताया कि जशपुर में दो मामलों में जमीन मूल मालिक को वापस दिलाई गई है और अन्य शिकायतों की जांच कराई जाएगी।
वित्तीय रिपोर्ट भी पेश
सत्र के दौरान वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने वर्ष 2024-25 के वित्त लेखे और विनियोग लेखे सदन में प्रस्तुत किए।
रिपोर्ट के अनुसार—
- राज्य में कर्ज लेने की रफ्तार में 20.93% वृद्धि हुई
- कुल लोक ऋण 1.30 लाख करोड़ से अधिक पहुंचा
- राजकोषीय घाटा 25,447.41 करोड़ (GSDP का 4.48%) रहा
हंगामे के बीच वॉकआउट
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे बजट सत्र का माहौल पूरी तरह गरमा गया।
✒️ अवैध प्लॉटिंग और जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सख्ती बेहद जरूरी है। सदन में उठे सवालों पर ठोस कार्रवाई ही जनता का भरोसा मजबूत कर सकती है।

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