भोरमदेव महोत्सव 2026: संस्कृति संध्या में छत्तीसगढ़ी रंग, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम

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प्रसिद्ध गायक दिलीप षडंगी के भजन और जसगीत ने बांधा समां, देर रात तक झूमे दर्शक

आरु साहू के छत्तीसगढ़ी गीतों से लोकरंग से सराबोर हुआ महोत्सव
रिपोर्टर✒️कमलेश सिंह
कवर्धा । भोरमदेव महोत्सव की संस्कृति संध्या में छत्तीसगढ़ की लोक और शास्त्रीय संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। पूरे कार्यक्रम में गीत, संगीत और नृत्य का खास माहौल रहा, जिससे वातावरण खुशहाल और जीवंत हो गया। प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकारों के साथ-साथ स्थानीय और अन्य जिलों से आए कलाकारों ने भी शानदार प्रस्तुतियां दीं। लोकगीत, भजन और पारंपरिक नृत्य ने दर्शकों का खूब मन मोहा। दर्शक देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे और तालियों की गूंज से पूरा महोत्सव परिसर गूंजता रहा।

दिलीप षडंगी की प्रस्तुति में देर रात तक झूमते रहे दर्शक

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहे छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध जगराता एवं लोकगायक दिलीप षडंगी, जिन्होंने अपनी दमदार आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। “जांजगीर के चंदवा बैगा…”, “हर हर हर भोला गुरु महादेव…” “आमा पान के पतरी अऊ करेला पान के दोना…” और “लाली लाली चुनरी ओढ़े दाई मोर…” जैसे भक्ति गीतों से उन्होंने पूरे माहौल को श्रद्धा से भर दिया। वहीं “बोरे बासी संग म खवाहु…”, “छुनूर छुनूर पैरी बाजे रे गोरी…” जैसे छत्तीसगढ़ी गीतों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी प्रस्तुति में भक्ति, लोक और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। उनकी शानदार प्रस्तुति ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक देर रात तक झूमते नजर आए।

आरु साहू के गीतों से महोत्सव परिसर हुआ छत्तीसगढ़ी लोकरंग से हुआ सराबोर

भोरमदेव महोत्सव की संस्कृति संध्या में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का शानदार रंग देखने को मिला, जब लोकप्रिय लोकगायिका आरु साहू ने अपने सुमधुर स्वर में एक से बढ़कर एक छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुति ने माहौल को पूरी तरह जीवंत कर दिया और दर्शक देर रात तक झूमते रहे। उन्होंने “मैया झुप-झूप महुला नचाई रे…” से शुरुआत कर उत्साह का माहौल बनाया, वहीं “हर घर में एक ही नारा गूंजेगा…” और “सुआ गीत तरी हरि नाना…” जैसे गीतों ने दर्शकों में जोश भर दिया। “सावन म शिव जी ला मानबो…” ने भक्ति का रंग घोला, जबकि “जब खेलव दुलरवा रनभन रनभन ओ…” और “झूपत झूपत आबे दाई…” जैसे गीतों ने सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया।

लोकनृत्य से लेकर शास्त्रीय कला विधाओं की हुई प्रस्तुति

   भोरमदेव महोत्सव में ग्राम बरपानी के मोहन ने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय का पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। इस लोकनृत्य ने आदिवासी संस्कृति की झलक पेश करते हुए दर्शकों की आकर्षक का केंद्र रहा। कवर्धा और बोड़ला स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने “रामेश्वरम दर्शन” एवं “नरसिंह अवतार” पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। छात्राओं की भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। शास्त्रीय नृत्य की कड़ी में रायपुर की अक्षिता दुबे और कवर्धा की दुर्गेश्वरी चंद्रवंशी ने कत्थक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को प्रभावित किया। उनके सधे हुए कदम और आकर्षक मुद्राओं ने खूब तालियां बटोरीं। इसी क्रम में बिलासपुर के युवराज सिंह लोनिया ने सुमधुर भजन प्रस्तुत कर माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। वहीं अध्या पांडे ने भरतनाट्यम की शानदार प्रस्तुति देकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मोहम्मद असन की वाद्य प्रस्तुति ने भी दर्शकों को खासा प्रभावित किया। उनकी धुनों पर दर्शक झूम उठे। इसके साथ ही कौशल साहू (लक्ष्य), रिंती लाल, मोहम्मद अनस, पितेलाल पटेल, धनीदास मानिकपुरी और पवन चेलक ने भी प्रस्तुति दी।

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