ज्ञान भारतम अभियान के तहत सरगुजा में मिलीं दुर्लभ पांडुलिपियां

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चौबे परिवार ने पीढ़ियों से सहेजकर रखी थी पूर्वजों की अमूल्य धरोहर

रायपुर । सरगुजा जिले में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए संचालित ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत दो दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। कलेक्टर एवं जिला समिति के अध्यक्ष  अजीत वसंत के निर्देशन में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य जिले में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटल संरक्षण करना है।

अभियान के दौरान दरिमा तहसील के ग्राम बरगंवा निवासी 72 वर्षीय  बालकृष्ण चौबे के घर से दो महत्वपूर्ण पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। श्री चौबे ने इन्हें अपने पूजाघर में बड़े जतन से सुरक्षित रखा था। इनमें एक पांडुलिपि बन दुर्गा महामंत्र तथा दूसरी दुर्गा सप्तशती की है।

पीढ़ियों से सुरक्षित रही विरासत

श्री चौबे ने बताया कि बन दुर्गा महामंत्र की पांडुलिपि उनके छोटे दादा स्वर्गीय श्री देवदत्त शर्मा ने 27 अगस्त 1932 को स्याही से हस्तलिखित रूप में तैयार की थी। यह छोटे पुस्तकाकार स्वरूप में है। वहीं दुर्गा सप्तशती की 183 पृष्ठों की पांडुलिपि लगभग वर्ष 1895-96 की बताई जाती है। इसे किस पूर्वज ने लिखा, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

विशेष बात यह है कि 100 वर्ष से अधिक पुरानी होने के बावजूद दोनों पांडुलिपियां अत्यंत अच्छी स्थिति में संरक्षित मिलीं, जो चौबे परिवार की अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सजगता और सम्मान को दर्शाती हैं।

पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और पोर्टल पर अपलोडिंग के दौरान कलेक्टर श्री अजीत वसंत स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा का जीवंत दस्तावेज हैं। इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

इस अवसर पर संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल, जनपद पंचायत अंबिकापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  राजेश सेंगर, ग्राम सरपंच श्रीमती संजीता सिंह, सचिव  शंभू शंकर सिंह तथा तकनीकी सहायक कृष्ण कुमार श्रीवास उपस्थित थे।

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