वायरल ऑडियो मामले में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता निलंबित
चालक से अभद्र भाषा और वरिष्ठ अधिकारियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना पड़ा भारी, शासन ने जारी किया आदेश
रायपुर/जांजगीर-चांपा। जल संसाधन विभाग में पदस्थ एक कार्यपालन अभियंता पर सोशल मीडिया में वायरल हुए ऑडियो क्लिप के बाद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग ने जांजगीर-चांपा जिले में पदस्थ कार्यपालन अभियंता श्री शशांक सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शासन द्वारा जारी आदेश में उनके व्यवहार को अमर्यादित एवं प्रशासनिक गरिमा के प्रतिकूल माना गया है।
मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी आदेश के अनुसार कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी जांजगीर-चांपा से प्राप्त प्रतिवेदन और जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। बताया गया कि हसदेव नहर जल प्रबंध संभाग जांजगीर में पदस्थ कार्यपालन अभियंता श्री शशांक सिंह तथा उनके कार्यालय के वाहन चालक श्री शशिकांत साहू के बीच 12 मई 2026 को मोबाइल फोन पर हुई बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुआ था। यह मामला 13 मई को समाचार पत्रों में भी प्रमुखता से प्रकाशित हुआ।
जांच में सामने आया कि कार्यपालन अभियंता द्वारा अपने अधीनस्थ वाहन चालक से बातचीत के दौरान अत्यंत अभद्र एवं आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। इतना ही नहीं, बातचीत में जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति भी अशोभनीय टिप्पणियां की गईं। शासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कहा कि इस घटना से जिले की प्रशासनिक छवि धूमिल हुई है।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी जांजगीर-चांपा द्वारा मामले की जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए श्री शशांक सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, शिवनाथ भवन, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।
यह आदेश उप सचिव रविंद्र कुमार मेढेकर द्वारा छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से जारी किया गया है। आदेश पर डिजिटल हस्ताक्षर 16 मई 2026 को किए गए।
प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को सरकारी कर्मचारियों के आचरण और अनुशासन को लेकर शासन का कड़ा संदेश माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री को गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच और कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी सेवा में मर्यादा और जिम्मेदारी से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


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