संकट से सुरक्षा तक- छत्तीसगढ़ का बजटीय सुरक्षा कवच और भूमिहीनों का स्वर्णिम संबल
विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक
रायपुर । एक संवेदनशील और दूरदर्शी सरकार की असली पहचान संकट के समय उसकी त्वरित तत्परता और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से होती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार का हालिया बजट इसी लोक-कल्याणकारी सोच का जीवंत प्रमाण है। यह बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि राज्य के विकास का एक ऐसा विज़न डॉक्यूमेंट है जहाँ एक तरफ प्राकृतिक आपदाओं से नागरिकों को बचाने के लिए करोड़ों का अभेद्य वित्तीय सुरक्षा कवच तैयार किया गया है, वहीं दूसरी तरफ भूमिहीन मजदूरों और ग्रामीणों को स्थायी आर्थिक संबल देने के लिए सरकार ने अपनी तिजोरी के द्वार खोल दिए हैं।
आपदा प्रबंधन का त्रिपल-लेयर अभेद्य किलाबाढ़, सूखा, और आकाशीय बिजली जैसी अनिश्चित प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को पूरी तरह निष्प्रभावी करने के लिए साय सरकार ने देश के सामने आपदा प्रबंधन का एक बेहतरीन और अत्याधुनिक मॉडल पेश किया है। सरकार ने इसके लिए तीन स्तरों पर भारी-भरकम फंड अलॉट कर सुरक्षा चक्र को मजबूत किया है। जिसमे राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष ( SDRF) के लिए 588 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड आवंटन, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य तुरंत और बिना किसी वित्तीय बाधा के शुरू हो सकें।
राज्य आपदा शमन कोष (SDMF) के लिए 147 करोड़ रुपए का प्रावधान, जिसका मुख्य उद्देश्य आपदाओं के खतरों को पहले ही कम करना है। इसके साथ ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के लिए 50 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मजबूती शामिल है। इस बजट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह राशि केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा पूर्व चेतावनी प्रणालियों को अत्याधुनिक बनाने में खर्च होगा। तकनीक के इस अपग्रेडेशन से छत्तीसगढ़ में अब किसी भी आपदा की सटीक जानकारी समय रहते मिल जाएगी, जिससे जान-माल का नुकसान शून्य करने के संकल्प को पूरा किया जा सके। यह कदम राज्य को आपदा प्रबंधन के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में है।
भूमिहीनों को 10 हज़ार रुपए की सम्मान राशि और स्वामित्व का नया सवेरा इस बजट का सबसे संवेदनशील और मानवीय चेहरा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने वाली योजनाओं में दिखाई देता है। सरकार ने समाज के सबसे कमजोर वर्ग को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए दो बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाए हैं। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के लिए सरकार ने 605 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट आरक्षित किया है। इसके अंतर्गत राज्य के हर पात्र भूमिहीन मजदूर परिवार को प्रतिवर्ष 10 हज़ार रुपए की सीधी आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि न केवल गरीब परिवारों को सम्मान से जीने का हक देगी, बल्कि ग्रामीण बाजारों में तरलता बढ़ाकर छत्तीसगढ़ की आंतरिक अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्रदान करेगी। स्वामित्व योजना ग्रामीण सशक्तीकरण के नए युग के रूप में देखा जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐतिहासिक सुधार करते हुए सरकार ने 10 लाख 50 हजार हितग्राहियों को उनकी जमीन और मकान का मालिकाना हक सौंपने का विशाल लक्ष्य रखा है। यह कदम ग्रामीण भारत से वर्षों पुराने संपत्ति विवादों को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब गांव के लोग भी अपने घरों पर आसानी से बैंक लोन ले सकेंगे, जिससे स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता के नए रास्ते खुलेंगे।
विज़न से हकीकत तक-सजग प्रशासन, सुदृढ़ छत्तीसगढ़ निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ सरकार के पास इस विकास यात्रा के लिए पुख्ता नीति, आधुनिक तकनीक और पर्याप्त फंड तीनों मौजूद हैं। बस्तर से लेकर सरगुजा के वनांचलों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार करने, ग्रामीणों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाने और नवगठित जिलों के प्रशासनिक अमले को हाई-टेक प्रशिक्षण देने के लिए सरकार युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह बजटीय सुरक्षा कवच और कल्याणकारी संबल न केवल छत्तीसगढ़ के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ रहा है, बल्कि सुशासन की एक ऐसी नई इबारत लिख रहा है जो आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय रोल मॉडल साबित होगी। यह बजट विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक युगांतकारी और ठोस कदम है।

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