भारत की विकास यात्रा : सी. पी. राधाकृष्णन
जब मैं तिरुप्पुर के स्कूल में पढ़ता था, तब मेरे मन में देश को लेकर कई सपने थे। मेरे मन में अक्सर ये सवाल उठते थे- भारत अपनी महानता कब वापस पाएगा? विश्व मंच पर एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में कब उभरेगा? हमारे गरीब और वंचित भाई-बहनों को सम्मानजनक जीवन कब मिलेगा? मुझे खुशी है कि किशोरावस्था में मेरे मन में जो विचार थे, वे अब साकार हो रहे हैं।
मैं अक्सर खुद को स्वामी विवेकानंद के इन शब्दों की याद दिलाता था, “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको।” तमिलनाडु की धरती से स्वामीजी के दिए ये शब्द हर व्यक्ति में देशभक्ति और समर्पण की भावना जगाने की अपार शक्ति रखते हैं। मेरा हमेशा यह विश्वास रहा कि जब भारत अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ेगा, तब वह पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करने वाला राष्ट्र बनकर उभरेगा। पिछले एक दशक में मुझे यह देखकर खुशी होती है कि हमारा देश जबरदस्त ऊर्जा और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
अब हमें अपनी आंखों के सामने तिरुवल्लुवर के इन शब्दों की सच्चाई देखने का अवसर मिल रहा है-“जो अपने संकल्प में अडिग रहते हैं, वे ठीक वही हासिल करते हैं, जिसकी उन्होंने कल्पना की होती है।” हम देख सकते हैं कि हमारा देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। पिछले एक दशक में भारत ने जो प्रगति हासिल की है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
ऐसे समय में, जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी और अनिश्चितताओं से जूझ रही है, भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूती और तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इस दौर को निरंतर विकास का युग बनाने के लिए सरकार और जनता, दोनों का साझा उत्साह ही इस प्रगति का कारण है। एक समय कमजोर अर्थव्यवस्था माने जाने वाला हमारा देश आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारा आर्थिक विकास समावेशी रहा है।
पिछले एक दशक में लगभग 25 करोड़ भारतवासी अत्यधिक गरीबी से बाहर निकलकर सम्मानपूर्ण जीवन जीने में सक्षम हुए हैं। अब तक भारत में गरीब और बेघर लोगों के लिए लगभग 4 करोड़ पक्के घर बनाए जा चुके हैं। 12 करोड़ से अधिक लोगों को पाइप से पीने के पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। हमने खुले में शौच से मुक्त राष्ट्र बनने का संकल्प लिया था और केवल 60 महीनों के भीतर देश ने 60 करोड़ लोगों के लिए यह लक्ष्य हासिल कर दिखाया।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को हर वर्ष 5 किलोग्राम खाद्यान्न मुफ्त दिया जा रहा है, जिस पर 2.3 लाख करोड़ रुपये का खर्च किया जा रहा है। मैंने बचपन से ही गांवों में लोगों को इलाज की सुविधा न मिलने के कारण परेशान होते देखा है। उनके परिवारों की पीड़ा देखकर मुझे दुख होता था। आज देश इस संकल्प के साथ आयुष्मान भारत योजना चला रहा है कि स्वास्थ्य सेवाएं हर व्यक्ति तक पहुंचें। इसी का परिणाम है कि अब 44 करोड़ से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिल रहा है। केवल पिछले एक वर्ष में ही 2.5 करोड़ लोगों ने इस योजना के अंतर्गत मुफ्त इलाज प्राप्त किया है।
हमारे किसानों ने अपनी मेहनत से 35 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन किया है, जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक देश बन गया है। भारत अब चावल उत्पादन में भी दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है और अपने निर्यात के माध्यम से दुनिया से जुड़ रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।
आज हमारी नारी शक्ति के लिए देश के विकास में पूरी भागीदारी के अवसर खुल रहे हैं। 3 करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी बन चुकी हैं। कृषि, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान एवं तकनीक से लेकर अंतरिक्ष तकनीक तक, महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। अब महिलाएं सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन भी प्राप्त कर रही हैं और युद्धक भूमिकाओं में भी भाग ले रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद और राज्य विधानसभाओं में उनकी भागीदारी को और मजबूत करेगा।
जब मैं देशभर की यात्रा के दौरान लखपति दीदियों और नमो ड्रोन दीदियों से मिलता हूं, तब मुझे अपनी बहनों के चेहरों पर उम्मीद की चमक दिखाई देती है। महिलाओं के दैनिक जीवन को आसान बनाने और उनके स्वास्थ्य की चिंता करते हुए देशभर में लगभग 2 करोड़ नए एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।
जब हम युवा पीढ़ी को उत्साह के साथ स्टार्टअप्स की ओर आगे बढ़ते देखते हैं, तब हमें देशभक्त कवि सुब्रमण्यम भारती के ये शब्द याद आते हैं-
“आओ, आओ, आओ और अपने सपनों को साकार करो,
पूरा देश एकजुट होकर आगे बढ़े और समृद्ध बने,
आओ, आओ, आओ और कोई महान कार्य करके दिखाओ।”
युवाओं के लिए पिछले दस वर्षों में ही 13 नए आईआईटी स्थापित किए गए हैं, जिससे देश में आईआईटी की कुल संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इसी तरह आईआईएम की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो गई है। एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो चुकी है और मेडिकल कॉलेजों की संख्या 37 से बढ़कर 823 हो गई है। यह गर्व की बात है कि मेडिकल छात्रों के लिए सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,29,603 हो गई है।
हम विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे की दिशा में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। भारतीय रेलवे का लगभग 99 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है। देशभर में 164 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों ने रेल यात्रा के एक नए युग की शुरुआत की है। हवाई अड्डों की संख्या भी 74 से बढ़कर 163 हो गई है और उड़ान योजना के तहत आम लोगों के लिए हवाई यात्रा सुलभ हुई है।
तमिलनाडु के लिए रेलवे बजट का आवंटन, जो एक दशक पहले लगभग ₹880 करोड़ था, बढ़कर 2026–27 में ₹7,600 करोड़ हो गया है। तमिलनाडु में यह खुशी की बात है कि रामेश्वरम और पंबन के बीच नया पंबन ब्रिज बनाया गया है, जो भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज है। यह आध्यात्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास के लिए एक नया अवसर बनकर उभरा है। चाहे चिनाब ब्रिज हो या बोगीबील पुल, भारत अब आधुनिक बुनियादी ढांचे के नए आयाम स्थापित कर रहा है।
भारत के विकास के लिए देश भर में विश्व स्तरीय चार-लेन और आठ-लेन की सड़कों के साथ-साथ सुदूर गांवों तक सड़क संपर्क को मजबूती से विकसित किया गया है। तमिलनाडु में पिछले 10 वर्षों में 4,000 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए गए हैं। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में पिछले 10 वर्षों के दौरान लगभग 7,200 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ है। ये सभी विकास कार्य ‘प्रगति’ के तहत प्रधानमंत्री की करीबी निगरानी के कारण संभव हो पाए हैं।
प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं तथा एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों ने क्रमशः अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को बहुत लाभ पहुंचाया है। मेरा हमेशा यह विश्वास रहा है कि विकास केवल सामाजिक वर्गों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें सभी क्षेत्रों की भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। जो सीमावर्ती गांव कभी भारत के अंतिम गांव माने जाते थे, वे अब देश के प्रथम गांव बन चुके हैं और वाइब्रेंट विलेज स्कीम के माध्यम से उनका विकास किया जा रहा है।
मुझे खुशी के साथ याद आता है कि प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर राज्यों को देश की “अष्टलक्ष्मी” कहा था। हाल ही में जब मैंने नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम का दौरा किया, तब वहां परिवहन और बुनियादी ढांचे में जबरदस्त सुधार देखने को मिला।
विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में देश ने जो प्रगति हासिल की है, वह हम सभी को गर्व से भर देती है। तकनीक से लेकर चिकित्सा तक, हर क्षेत्र में तेज़ी से विकास हो रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने वैक्सीन निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई और स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर बहुत कम समय में सभी को मुफ्त उपलब्ध कराई। भारत ने मानवीय संवेदना के साथ दुनिया के 100 से अधिक देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई, जिसने विश्व इतिहास में एक विशेष स्थान बनाया।
चंद्रयान-3 की सफल लॉन्चिंग ने भारत को उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान के नए युग में पहुंचा दिया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में वैश्विक कंपनियां भारत को अपना केंद्र बना रही हैं, जिससे निवेश में कई गुना वृद्धि हुई है। भारत अब सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के लिए एक मॉडल बनकर उभर रहा है।
मोबाइल फोन उत्पादन में भी हमने विश्व में दूसरा स्थान हासिल किया है। जो भारत कभी मोबाइल फोन आयात करता था, वही आज 300 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के मोबाइल फोन निर्यात करने वाला देश बन चुका है। ये सभी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव बनेंगी।
कई दशकों तक हमारे देश ने केवल आतंकवाद ही नहीं, बल्कि उग्रवाद और वामपंथी चरमपंथ जैसी चुनौतियों का भी सामना किया है। साहसिक नीतिगत फैसलों और कानून के सख्त पालन के माध्यम से आज देश में शांति स्थापित हुई है और इन क्षेत्रों में विकास के द्वार खुले हैं। हमने यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2047 तक, यानी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक, भारत एक अग्रणी वैश्विक शक्ति बने और दुनिया का मार्गदर्शन करने की स्थिति में पहुंचे। कठिन परिश्रम का यह दौर ही “अमृत काल” है।
जिस प्रकार हर स्वतंत्रता सेनानी के हृदय में आजादी की प्यास थी, उसी तरह आज के युवाओं के मन में राष्ट्र विकास का संकल्प होना चाहिए। इस अमृत काल में यदि युवाओं के विचार और प्रयास देशभक्ति, उच्च आदर्शों और श्रेष्ठ चरित्र के साथ आगे बढ़ेंगे, तब हम 2047 में एक विकसित भारत का सपना साकार होते देख सकेंगे।
स्वामी विवेकानंद के ये शब्द हमें प्रेरणा देते हैं और दिशा भी दिखाते हैं- “मेरे भाइयों, आइए हम सब मिलकर कड़ी मेहनत करें। यह सोने का समय नहीं है। भारत का भविष्य हमारे प्रयासों पर निर्भर करेगा।”
आइए हम सब मिलकर अपनी कड़ी मेहनत से एक विकसित भारत का निर्माण करें।

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