विद्यारंभ अभियान: आंगनबाड़ी से स्कूल तक बच्चों के सुनहरे भविष्य की नई शुरुआत
6 वर्ष पूर्ण कर चुके बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण-पत्र देकर कराया जा रहा विद्यालय प्रवेश
प्रारंभिक शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में शासन की महत्वपूर्ण पहल
रायपुर । छत्तीसगढ़ में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों से विद्यारंभ अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा पूर्ण कर चुके 6 वर्ष आयु के बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानपूर्वक विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों के जीवन में शिक्षा के नए चरण की शुरुआत को उत्सव के रूप में मनाना तथा आंगनबाड़ी से विद्यालय तक उनके सहज एवं सुगम संक्रमण को सुनिश्चित करना है। प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण-पत्र वितरित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों की नियमित शिक्षा, उपस्थिति और सर्वांगीण विकास के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को खेल-खेल में सीखने की पद्धति के माध्यम से भाषा, संज्ञानात्मक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास से संबंधित गतिविधियां कराई जाती हैं। इन केंद्रों में प्राप्त प्रारंभिक शिक्षा बच्चों को विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार करती है। विद्यारंभ अभियान इसी सीखने की प्रक्रिया को एक औपचारिक पहचान प्रदान करता है।
अभियान के दौरान बच्चों को प्रमाण-पत्र प्रदान करने के साथ विद्यालय प्रवेश उत्सव भी आयोजित किए जा रहे हैं। बच्चों का तिलक लगाकर, पुष्प देकर तथा स्वागत गीतों के माध्यम से अभिनंदन किया जा रहा है, जिससे उनमें विद्यालय जाने के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास का विकास हो सके।
राज्य शासन का मानना है कि जीवन के प्रारंभिक वर्ष बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को मजबूत करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। विद्यारंभ अभियान इसी दिशा में एक प्रभावी कदम है।
इस अभियान के माध्यम से प्रदेश के हजारों बच्चों को विद्यालयी शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत की जा रही है। विद्यारंभ प्रमाण-पत्र बच्चों के लिए केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि उनके शैक्षणिक जीवन की पहली उपलब्धि और नए सफर का प्रेरणादायी प्रतीक बन रहा है।

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