​सत्ता, कुर्सी, सूदखोरी, कमीशनखोरी और नशामुक्ति केंद्र…जनता के विश्वास के साथ सबसे बड़ा छलावा…

0
Screenshot_20260804_222114

मुंगेली । लोकतंत्र में जनता अपना प्रतिनिधि इस उम्मीद के साथ चुनती है कि वह उनके हक़ की आवाज उठाएगा, उनके समाज को दिशा देगा और क्षेत्र के विकास की नई इबारत लिखेगा। लेकिन जब वही जनप्रतिनिधि खुद को ‘सत्ता और कुर्सी के नशे’ से उबारने के बजाय एक नशामुक्ति केंद्र की देहरी तक पहुँच जाए, तो यह केवल एक व्यक्ति का पतन नहीं, बल्कि उस पूरी जनता के विश्वास के साथ किया गया सबसे बड़ा छलावा है।

सत्ता का नशा या नशे की सत्ता ?

​हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली खबर ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। बहुत ही विवादित नगर पालिका के एक जनप्रतिनिधि को एक प्रसिद्ध नशामुक्ति केंद्र में लगभग दो बार भर्ती कराया जा चुका हैं जो चेहरा कल तक मंचों से समाज सुधार और युवाओं को नशे से दूर रहने की नसीहतें देता था, आज वही चेहरा खुद इस गंभीर संकट से जूझता नजर आ रहा है। जरूरतमंदों को रकम देकर एक बड़ी रकम ब्याज में वसूल करने वाले इस नेता के खिलाफ जनमानस में बहुत ही आक्रोश देखा गया।

NTPC World Environment Day

इसमें सबसे बड़ा सवाल यह हैं कि जो व्यक्ति खुद अपने आचरण और आदतों पर नियंत्रण नहीं रख सकता, वह जनता की समस्याओं और क्षेत्र की व्यवस्था को कैसे संभालेगा ?

वादों का क्या हुआ ?

​चुनाव के समय बड़े-बड़े होर्डिंग्स, घर-घर जाकर जोड़ते हाथ और ‘बदलाव’ के लंबे-चौड़े वादे महज एक ढोंग साबित हो रहे हैं, जनता ने अपना एक-एक कीमती वोट देकर उन्हें कुर्सी सौंपी थी, लेकिन कुर्सी मिलते ही जनसेवा का जज्बा गायब हो गया और उसकी जगह निजी स्वार्थ, खुदखोरी और अनियंत्रित जीवनशैली ने जगह ले ली।

स्थानीय लोगों में इस खबर के बाद से भारी आक्रोश और निराशा है।

विपक्ष का हमला: विपक्षी दलों ने इसे जनता के साथ गद्दारी करार देते हुए जनप्रतिनिधि के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
क्षेत्र में चल रही कई जनकल्याणकारी योजनाएं और विकास कार्य जनप्रतिनिधि की गैर-मौजूदगी और लापरवाही के कारण अधर में लटके हैं।

कुर्सी का आदर या जनता से माफी ?
राजनीति में शुचिता और नैतिक मूल्यों का अपना महत्व होता है। नशामुक्ति केंद्र पहुँचे इस ‘माननीय’ ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता का नशा और व्यक्तिगत कमजोरियाँ जब हावी होती हैं, तो जनता का भरोसा सबसे पहले टूटता है। अब देखना यह होगा कि नशामुक्ति केंद्र से लौटने के बाद यह जनप्रतिनिधि अपनी गलती स्वीकार कर जनता से माफी मांगते हैं, या फिर कुर्सी का मोह उनसे नैतिकता का आखिरी तिनका भी छीन लेता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel

Latest News

error: Content is protected !!