विश्वास,संघर्ष और सफलता : बेटियों की उड़ान में पिता बने मजबूत आधार
चिकित्सा,शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में बेटियों ने बढ़ाया अमरकंटक का मान
संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक की बेटियां आज अपनी प्रतिभा , परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं । इन उपलब्धियों के पीछे उनके पिता का विश्वास , त्याग और सतत मार्गदर्शन एक मजबूत आधार के रूप में दिखाई देता है । सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद पिता ने अपनी बेटियों के सपनों को पंख दिए जिसका परिणाम आज समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में मौजूद है ।

डॉक्टर बनने का सपना पिता के सहयोग से हुआ साकार
अमरकंटक निवासी डॉ. रमा पांडेय (रजनी) वर्तमान में राजेंद्रग्राम जिला अनूपपुर में चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं । उनकी प्रारंभिक शिक्षा अमरकंटक के सरस्वती शिशु मंदिर एवं जवाहर नवोदय विद्यालय में हुई । बारहवीं कक्षा के बाद उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा और उच्च शिक्षा के लिए इंदौर का रुख किया ।
उनके पिता राम विमल पांडेय जो शासकीय उद्यानिकी विभाग में माली पद से सेवानिवृत्त हैं तथा माता श्रीमती सत्यभामा पांडेय जो शिक्षिका हैं , ने बेटी की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी । सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हर परिस्थिति में रमा पांडेय का मनोबल बढ़ाया और उनके सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । आज डॉ. रमा पांडेय समाज सेवा और मानवता की सेवा के कार्य में समर्पित भाव से जुटी हुई हैं ।
पिता के सपनों को साकार कर बनीं चिकित्सक
अमरकंटक की एक और प्रतिभाशाली बेटी डॉ. आस्था द्विवेदी वर्तमान में जिला डिंडोरी के करंजिया चिकित्सालय में चिकित्सक के रूप में सेवाएं प्रदान कर रही हैं । उनके पिता जितेंद्र प्रसाद द्विवेदी जो नर्मदा मंदिर के पुजारी एवं अधिवक्ता हैं तथा माता श्रीमती चंद्रकला द्विवेदी जो शिक्षिका रही हैं , का सपना था कि उनकी बेटी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करे । डॉ. आस्था ने कठिन परिश्रम , अनुशासन और पिता के निरंतर मार्गदर्शन के बल पर इस लक्ष्य को प्राप्त किया । उनकी प्रारंभिक शिक्षा अमरकंटक के कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन विद्यालय में हुई जिसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए जबलपुर चली गईं और अपने सपनों को साकार कर वापस लौटीं ।
डॉ. आस्था द्विवेदी का कहना है कि जीवन के हर कठिन दौर में उनके पिता ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और आत्मविश्वास बनाए रखा । आज वे चिकित्सक बनकर न केवल अपने माता-पिता का सपना पूरा कर रही हैं बल्कि समाज के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं ।
ग्रामीण बैंक में सहायक प्रबंधक बनकर दे रही हैं सेवाएं
अमरकंटक निवासी मीनाक्षी वर्मा (रोली) ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अमरकंटक के कल्याणिका विद्यालय से प्राप्त की तथा आगे की पढ़ाई बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में पूरी की । वर्तमान में वे रतनपुर स्थित ग्रामीण बैंक में सहायक प्रबंधक (Assistant Manager) के पद पर कार्यरत हैं ।
मीनाक्षी वर्मा का कहना है कि उनके पिता मुकेश वर्मा एवं माता श्रीमती किरण वर्मा ने शिक्षा को सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता दी । उनके प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के साथ-साथ अपनी मेहनत के बल पर वे आज इस मुकाम तक पहुंच सकी हैं ।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बेटियां निभा रही हैं महत्वपूर्ण भूमिका
अमरकंटक निवासी अर्चना चतुर्वेदी पिता आनंद चतुर्वेदी एवं माता श्रीमती माधुरी चतुर्वेदी की पुत्री हैं । उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर से बारहवीं तक की शिक्षा प्राप्त की तथा आगे की पढ़ाई के लिए कटनी गईं । वर्तमान में वे पीएम श्री शासकीय विद्यालय में अतिथि शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं ।
अर्चना चतुर्वेदी शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देकर नई पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं । यह दर्शाता है कि अमरकंटक की बेटियां केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं।
बेटियों की सफलता बनी प्रेरणा
अमरकंटक की इन बेटियों की सफलता यह सिद्ध करती है कि जब परिवार , विशेषकर पिता का विश्वास , प्रोत्साहन और सहयोग साथ हो तो बेटियां किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं ।
उनकी उपलब्धियां न केवल उनके परिवार और क्षेत्र का गौरव बढ़ा रही हैं बल्कि अन्य बालिकाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं ।
चिकित्सा, शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही ये बेटियां यह संदेश देती हैं कि अवसर , विश्वास और सहयोग मिलने पर बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और समाज का नाम रोशन कर सकती हैं । पिता के विश्वास और बेटियों के अथक परिश्रम की यह कहानी समाज के लिए प्रेरणा का एक सशक्त उदाहरण है ।

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