आरबीएसके के ‘चिरायु’ दल ने जन्मजात क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट से पीड़ित बालक को दिलाई नई मुस्कान
रायपुर । राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत संचालित ‘चिरायु’ दल द्वारा दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हुए गंभीर जन्मजात विकृतियों के उपचार में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत ग्राम मीनागट्टा (पामेड) निवासी 15 वर्षीय बालक माड़कम हुंगा को जन्मजात क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट (कटे होंठ एवं तालु) की समस्या से सफलतापूर्वक मुक्ति दिलाई गई।
माड़कम हुंगा जन्म से ही इस जन्मजात विकृति से पीड़ित था, जिसके कारण उसे भोजन करने, स्पष्ट रूप से बोलने तथा सामान्य सामाजिक जीवन जीने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उच्चस्तरीय उपचार कराना संभव नहीं था।

आरबीएसके के अंतर्गत चिरायु दल द्वारा विद्यालय में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण (रूटीन स्क्रीनिंग) के दौरान बालक की पहचान की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए दल द्वारा तत्काल आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूर्ण कर उच्चस्तरीय उपचार के लिए रेफरल की कार्रवाई की गई।

चिरायु दल ने 25 जून 2026 को बालक को रायपुर स्थित श्री मेडिसिन अस्पताल में भर्ती कराया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट की सफल प्लास्टिक सर्जरी की गई। उपचार के उपरांत बेहतर चिकित्सकीय देखभाल के साथ बालक के स्वास्थ्य में निरंतर सुधार हुआ तथा 30 जून 2026 को उसे पूर्णतः स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत इस संपूर्ण उपचार—जिसमें सर्जरी, दवाइयां, जांच, रायपुर तक आवागमन तथा उपचार अवधि के दौरान रहने एवं भोजन की व्यवस्था शामिल है—का समस्त व्यय शासन द्वारा वहन किया गया। इससे परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक भार नहीं पड़ा।
आरबीएसके के ‘चिरायु’ दल की सक्रियता एवं स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशील पहल से दूरस्थ क्षेत्रों के जरूरतमंद बच्चों को समय पर उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल न केवल बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार ला रही है, बल्कि उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार भी कर रही है।

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