कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने किया कृषि विश्वविद्यालय का दौरा

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कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध अधोसंरचनाओं तथा अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों का लिया जायजा

रायपुर । कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार अधोसंरचनाओं, सुविधाओं तथा गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की अनुसंधान प्रयोगशालाओं, कृषि अनुसंधान परियोजनाओं तथा इन्क्यूबेशन सुविधाओं का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर संचालक कृषि राहुल देव भी उनके साथ मौजूद रहे।

परदेशी ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि एवं किसानों की समृद्धि के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य शासन विश्वविद्यालय के विकास के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि कृषि उत्पादन आयुक्त का दायित्व संभालने के बाद कृषि विश्वविद्यालय का यह उनका पहला दौरा था।

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दौरे के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की विभिन्न अधोसंरचनाओं, अनुसंधान योजनाओं एवं गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने अनुसंधान प्रक्षेत्र में लगाई गई औषधीय एवं सगंध फसलों को देखा तथा उनमें विशेष रुचि दिखाई। टिशू कल्चर लैब में केला, गन्ना और बांस के ऊतक प्रवर्धित पौधों का निरीक्षण किया। कृषि संग्रहालय में प्रदर्शित प्रारूपों का अवलोकन करने के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में भारत सरकार द्वारा स्थापित आधुनिक मौसम वेधशाला का निरीक्षण कर इसकी कार्यप्रणाली की जानकारी ली। उन्होंने कृषि संग्रहालय तथा विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित उत्पादों के विक्रय केंद्र का भी अवलोकन किया।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने डॉ. आर.एल. रिछारिया जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला तथा बायोटेक पार्क का निरीक्षण कर वहां संचालित गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने भारत के सबसे बड़े तथा विश्व के दूसरे सबसे बड़े धान जनन द्रव्य संग्रह का अवलोकन किया। कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि जर्मप्लाजम सेंटर में चावल की 23 हजार 250 परंपरागत किस्मों के जनन द्रव्य का संग्रह एवं संरक्षण किया गया है। इनमें कई किस्में औषधीय एवं पोषक गुणों से भरपूर हैं तथा इनका उपयोग धान की नई उन्नत किस्मों के विकास में किया जा रहा है। इसके अलावा यहां अन्य फसलों की छह हजार से अधिक किस्मों का भी संरक्षण किया जा रहा है।

उन्होंने क्रॉप बायोफोर्टिफिकेशन लैब में संजीवनी राइस, जिंको राइस, न्यूट्री रिच राइस जीनोटाइप तथा बम्बू टिश्यू कल्चर पर किए जा रहे नए प्रयोगों का अवलोकन किया। साथ ही वहां स्थापित फाइटोसेनेटरी लैब का भी निरीक्षण किया।

इससे पहले विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कृषि उत्पादन आयुक्त को विश्वविद्यालय के विभिन्न घटकों, अधोसंरचनाओं, शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों से अवगत कराया। उन्होंने किसानों की बेहतरी के लिए विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। बैठक में कुलसचिव, संचालक अनुसंधान, निदेशक शिक्षण, निदेशक विस्तार सेवाएं, अधिष्ठाता छात्र कल्याण सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।

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