भोरमदेव शक्कर कारखाना से जुड़े 4,691 किसानों को मिला अंशधारी सदस्यता का अधिकार, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वितरित किए शेयर प्रमाण पत्र
वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी, किसानों की भागीदारी होगी मजबूत
रायपुर । कबीरधाम जिले के भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना से जुड़े 4,691 गन्ना उत्पादक किसानों के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। लंबे समय से अंशधारी सदस्य बनने की प्रतीक्षा कर रहे किसानों को कृषक संगोष्ठी एवं शेयर प्रमाण पत्र वितरण समारोह में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शेयर प्रमाण पत्र प्रदान किए। कवर्धा के पीजी कॉलेज डोम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों को सहकारिता से अधिक मजबूती से जोड़ने, उनकी भागीदारी बढ़ाने और क्षेत्र में गन्ना उत्पादन को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन 4,691 किसानों ने वर्षों तक भोरमदेव शक्कर कारखाना को गन्ना उपलब्ध कराया, वे अब तक अंशधारी सदस्य नहीं बन सके थे। इन किसानों ने बिना शेयरधारक बने भी कारखाने की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके इसी योगदान का सम्मान करते हुए अब उन्हें आधिकारिक रूप से कारखाने का अंशधारी सदस्य बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले पेराई सत्र में कारखाने में 2 लाख 55 हजार 818 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की गई थी। वर्तमान में कारखाने के लगभग 23 हजार शेयरधारक सदस्य हैं, जबकि 4,691 गैर-अंशधारी किसानों ने भी गन्ना विक्रय किया था। अब इन सभी किसानों को शेयर प्रमाण पत्र देकर सहकारी व्यवस्था में समान भागीदारी का अवसर दिया गया है।

गन्ना उत्पादन बढ़ाने की अपील
उप मुख्यमंत्री ने किसानों से अधिक से अधिक गन्ना उत्पादन करने और नए किसानों को भी अनुबंध के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि किसान इस वर्ष साढ़े चार लाख मीट्रिक टन गन्ने की आपूर्ति का लक्ष्य पूरा करने में सहयोग करेंगे तो कारखाना और अधिक मजबूत होगा। इससे किसानों को एफआरपी का समय पर भुगतान, बेहतर रिकवरी तथा भविष्य में अधिक लाभांश मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। उन्होंने गन्ना बोनस बढ़ाने के लिए भी सकारात्मक प्रयास करने का भरोसा दिलाया।
अंशधारी बनने से मिलेंगे अतिरिक्त लाभ
उन्होंने कहा कि शेयरधारक बनने के बाद किसानों को अब नियमित रूप से गन्ना विक्रय करने के साथ-साथ अंशधारी सदस्यों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा। इससे कारखाने को भी पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध होगा, जिससे उसकी उत्पादन क्षमता और संचालन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
प्राकृतिक एवं जैविक खेती पर दिया जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विजय शर्मा ने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेती के तीन प्रमुख स्वरूप रासायनिक, जैविक और प्राकृतिक खेती हैं, जिनमें प्राकृतिक खेती पर्यावरण और किसानों दोनों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती के सफल प्रयोग हो रहे हैं और अब किसानों को जैविक उत्पादों के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने जानकारी दी कि जैविक उत्पादों के निर्यात के लिए आवश्यक एनपीओपी प्रमाणन संबंधी जानकारी देने हेतु 17, 18 और 19 जुलाई को कवर्धा विधायक कार्यालय में विशेषज्ञों द्वारा विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा। किसानों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि कबीरधाम के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
वर्षों पुरानी मांग पर बना रोडमैप
गन्ना उत्पादक किसान लंबे समय से नए अंशधारी सदस्य बनाए जाने की मांग कर रहे थे। इस मांग को गंभीरता से लेते हुए उप मुख्यमंत्री ने कारखाना प्रबंधन को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन, कारखाना प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने मिलकर योजना तैयार की। इसी के तहत पेराई सत्र 2025-26 में गैर-अंशधारी किसानों से भी गन्ना खरीदा गया और उन्हें अंशधारी सदस्य बनाने का निर्णय लिया गया।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, कारखाना के प्रबंध संचालक जी.एस. शर्मा, महाप्रबंधक अंकित मरकाम, किसान संगठनों के प्रतिनिधि, अंशधारी सदस्य, बड़ी संख्या में किसान तथा विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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