छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में साहित्य सदन भवन बनाने की मांग
साहित्यकार नारायण प्रसाद पाली ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, साहित्य, संस्कृति और पत्रकारिता को मिलेगा नया मंच
रायपुर । छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में साहित्य सदन भवन के निर्माण की मांग को लेकर साहित्यकार नारायण प्रसाद पाली ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को ज्ञापन प्रेषित किया है। उन्होंने आग्रह किया है कि प्रदेश में कला, संस्कृति, साहित्य सृजन और पत्रकारिता के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रत्येक जिले में साहित्य सदन की स्थापना की जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान समय में प्रदेश के अधिकांश जिलों में साहित्यिक, सांस्कृतिक और पत्रकारिता से जुड़ी गतिविधियों के लिए स्थायी भवन का अभाव है। इसके कारण साहित्यकारों, पत्रकारों, कवियों, लेखकों तथा सांस्कृतिक संस्थाओं को कार्यक्रम आयोजित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि प्रत्येक जिला मुख्यालय में साहित्य सदन का निर्माण किया जाता है तो यह साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकेगा।
नारायण प्रसाद पाली ने कहा कि साहित्य सदन में पुस्तकालय, वाचनालय, सभागार, शोध कक्ष और साहित्यिक गतिविधियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इससे देश और प्रदेश के ख्याति प्राप्त साहित्यकारों, पत्रकारों तथा नवोदित रचनाकारों की पुस्तकों और रचनाओं का अध्ययन आम नागरिकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि ऐसे भवनों के निर्माण से साहित्यिक गोष्ठियां, कवि सम्मेलन, पुस्तक विमोचन, संगोष्ठियां, पत्रकारिता कार्यशालाएं और सांस्कृतिक आयोजन नियमित रूप से आयोजित किए जा सकेंगे। इससे नई पीढ़ी को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने में भी मदद मिलेगी तथा स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच मिलेगा।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, भाषा और साहित्यिक परंपरा के लिए देशभर में पहचान रखता है। ऐसे में साहित्य सदन भवनों का निर्माण प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे कला, संस्कृति, साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में नए अवसर विकसित होंगे तथा छत्तीसगढ़ की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत होगी।
साहित्यकार नारायण प्रसाद पाली ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश हित में इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए सभी जिला मुख्यालयों में चरणबद्ध तरीके से साहित्य सदन भवनों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों को भी नई दिशा मिल सके।

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