आत्मनिर्भर नारी, समृद्ध छत्तीसगढ़: महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय
•डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक
रायपुर । किसी भी राज्य के विकास की वास्तविक पहचान वहां की महिलाओं की सामाजिक स्थिति, आर्थिक भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सहभागिता से होती है। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो परिवार सशक्त होता है, समाज प्रगतिशील बनता है और विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को सुशासन का प्रमुख आधार बनाया है। वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष‘ के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित योजनाएं आज लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहल महतारी वंदन योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता का सशक्त माध्यम बन चुकी है।


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18 हजार 805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्राप्त हो चुकी है। वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार रानी दुर्गावती योजना प्रारंभ कर रही है। इस योजना के तहत बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन हेतु 800 करोड़ रुपये, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये तथा कुपोषण मुक्ति एवं पोषण योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में 250 और ग्रामीण क्षेत्रों में अभिसरण के माध्यम से 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में महतारी सदन स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 368 महतारी सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें 137 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्ष 2026-27 में 250 नए महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार ने महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित किए हैं। यहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा अस्थायी आश्रय एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 के समन्वय से त्वरित सहायता व्यवस्था भी प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने सखी वन-स्टॉप सेंटरों के संचालन के लिए डिजिटल एसओपी लागू की है। महिलाओं की आर्थिक प्रगति को नई गति देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन और विपणन से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण कर रही है, जहां महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को प्रतिवर्ष युवा रत्न सम्मान प्रदान किया जाएगा तथा लखपति दीदी भ्रमण योजना के माध्यम से सफल उद्यमियों को देश-विदेश के अध्ययन भ्रमण का अवसर मिलेगा। बिहान मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 2.92 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं, जिनसे 31.65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री के तीन करोड़ लखपति दीदी लक्ष्य में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 10 लाख 43 हजार से अधिक लखपति दीदी तैयार की हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण, कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण तथा हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों ने ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। महिला निर्माण श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत पात्र बेटियों को 20 हजार रुपये, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 7,900 रुपये, दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत अनुदान तथा मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत अब तक 24 हजार से अधिक बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है। प्रत्येक जोड़े के विवाह के लिए राज्य सरकार 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करा रही है। वहीं महिला समृद्धि योजना के अंतर्गत 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से महिलाओं को बिना जमानत 25 हजार रुपये तक का ऋण स्वरोजगार के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से 38 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। सुशिक्षा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार 139 छात्राओं को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। शुचिता योजना के माध्यम से 2 हजार विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई हैं तथा लाखों किशोरियों को मासिक स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। महिला समूहों के उत्पाद आज वैश्विक पहचान भी बना रहे हैं। आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित जशप्योर ब्रांड ‘वोकल फॉर लोकल‘ अभियान का सफल उदाहरण बन चुका है और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। वहीं सखी साड़ी-मिलेट कैफे जैसी पहलें स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ महिलाओं की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आज छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का व्यापक अभियान बन चुका है। आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण पोषण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयास महिलाओं के जीवन में नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश की महिलाएं आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं। यही बदलती तस्वीर छत्तीसगढ़ को ‘सुशासन से समृद्धि‘ की ओर निरंतर अग्रसर कर रही है।

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