चार माह में उखड़ने लगी 1.44 करोड़ की आमाकोनी–आमगांव सड़क, गुणवत्ता पर उठे सवाल

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

एसडीओ बोले– किसान ने काटी मेड़, सरपंच ने किया दावा खारिज

पचपेड़ी। क्षेत्र के आश्रित ग्राम आमाकोनी से आमगांव तक करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण करीब 1 करोड़ 44 लाख रुपये की लागत से कराया गया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि नई सड़क से आवागमन की सुविधा बेहतर होगी, लेकिन निर्माण के महज चार महीने के भीतर ही सड़क जगह-जगह से दरकने लगी है। सड़क पर उभर रही दरारों और क्षतिग्रस्त हिस्सों को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि कई स्थानों पर मुरूम की जगह मिट्टी का उपयोग किया गया, जिसके कारण सड़क की पकड़ कमजोर रही और पहली ही बारिश में सड़क में दरारें आने लगीं। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप होता तो इतनी कम अवधि में सड़क क्षतिग्रस्त नहीं होती।

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ग्रामीण प्रेमदास सतनामी ने बताया कि लगभग एक सप्ताह पहले सड़क में जहां-जहां दरारें पड़ रही थीं, वहां चार मजदूरों से गिट्टी डलवाकर मरम्मत कराई गई थी। उनका आरोप है कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद भी संबंधित मजदूरों को अब तक मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। इससे मजदूरों में भी नाराजगी है।

एसडीओ ने खेत की मेड़ को बताया कारण

मामले में संबंधित विभाग के एसडीओ से जानकारी लेने पर उन्होंने कहा कि एक किसान द्वारा खेत की मेड़ काट देने के कारण सड़क की मिट्टी खिसकी, जिससे सड़क में दरारें आई हैं। उनके अनुसार सड़क निर्माण में किसी प्रकार की तकनीकी खामी नहीं है।

सरपंच ने विभागीय दावे को बताया गलत

हालांकि, आमगांव के सरपंच ने एसडीओ के इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि किसी भी किसान ने खेत की मेड़ नहीं काटी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क निर्माण में ही गंभीर खामियां रही हैं, जिसके कारण सड़क समय से पहले खराब हो रही है। सरपंच ने कहा कि निर्माण की कमियों के लिए किसानों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

तकनीकी जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क का मात्र चार महीने में क्षतिग्रस्त होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी एवं निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा मरम्मत कार्य में लगे मजदूरों का लंबित भुगतान तत्काल कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मामले की जांच नहीं हुई तो सार्वजनिक धन की बर्बादी के ऐसे मामलों पर रोक लगाना मुश्किल होगा। अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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