भिलाई इस्पात संयंत्र की बड़ी उपलब्धि: एसएमएस-3 में स्वदेशी तकनीक से विकसित हॉट मेटल लैडल प्रीहीटर और सीओजी लाइन शुरू

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इन-हाउस इंजीनियरिंग से विकसित परियोजना से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता, घटेगा डाउनटाइम और मजबूत होगी परिचालन दक्षता

भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) ने परिचालन दक्षता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संयंत्र के स्टील मेल्टिंग शॉप-3 (एसएमएस-3) में स्वदेशी तकनीक और पूर्णतः इन-हाउस इंजीनियरिंग क्षमता से विकसित हॉट मेटल (एचएम) लैडल प्रीहीटर तथा वैकल्पिक कोक ओवन गैस (सीओजी) हेडर लाइन का सफलतापूर्वक कमीशनिंग कर संचालन शुरू कर दिया गया है।

यह परियोजना पूरी तरह संयंत्र के आंतरिक संसाधनों और तकनीकी विशेषज्ञता से विकसित की गई है, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि, संचालन में सुगमता तथा सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

दो महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार किए गए

संयंत्र की उपलब्धता को अधिकतम करने के उद्देश्य से इस परियोजना के तहत एसएमएस-3 में दो प्रमुख तकनीकी सुधार किए गए हैं।

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पहले चरण में समर्पित डीएन-350 हेडर लाइन और नए हॉट मेटल लैडल प्रीहीटर की स्थापना की गई है, जिससे लैडल बे और नए प्रीहीटर को निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे लैडल तैयार होने का समय (टर्नअराउंड टाइम) कम होगा और उत्पादन प्रक्रिया अधिक तेज एवं सुचारू बनेगी।

दूसरे चरण में वैकल्पिक सीओजी हेडर लाइन विकसित की गई है, जो लैडल ड्रायर सर्किट को निरंतर और स्थिर गैस आपूर्ति उपलब्ध कराएगी। इससे प्रतिदिन निर्धारित इस्पात उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप पर्याप्त संख्या में तैयार लैडल उपलब्ध रहेंगे।

रखरखाव के दौरान भी नहीं रुकेगा उत्पादन

नई ड्यूल-हेडर प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रेडंडेंसी (वैकल्पिक व्यवस्था) है। इसके माध्यम से नियमित रखरखाव के दौरान भी उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। अब मुख्य लैडल ड्रायर सर्किट के अनुरक्षण के समय संयंत्र का संचालन बिना बाधा जारी रखा जा सकेगा।

इससे अनावश्यक डाउनटाइम में उल्लेखनीय कमी आएगी और संयंत्र की समग्र उत्पादकता तथा परिचालन दक्षता में वृद्धि होगी।

इन-हाउस इंजीनियरिंग क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण

इस परियोजना का सफल क्रियान्वयन भिलाई इस्पात संयंत्र की तकनीकी दक्षता, नवाचार और आत्मनिर्भर इंजीनियरिंग क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।

परियोजना का नेतृत्व मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-3) त्रिभुवन बैठा ने किया। इसके सफल संचालन में महाप्रबंधक (ऑपरेशन) पी. के. अग्रवाल, महाप्रबंधक (मेंटेनेंस) पी. के. सतपथी, महाप्रबंधक (मैकेनिकल) संजीव कुमार मिश्रा, उप महाप्रबंधक राकेश वृष्णवंशी, वरिष्ठ प्रबंधक चंदन चतुर्वेदी तथा उप महाप्रबंधक रजत सरकार सहित कन्वर्टर मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस उपलब्धि से भिलाई इस्पात संयंत्र की उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता को नई मजबूती मिलने के साथ भविष्य में इस्पात उत्पादन को और अधिक प्रभावी एवं निर्बाध बनाने में सहायता मिलेगी।

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