महुआ के अचार और शहद से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तकदीर

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बिहान योजना बनी आत्मनिर्भरता का आधार, माँ रामेश्वरी स्व-सहायता समूह ने अर्जित की एक लाख रुपये की आय

स्थानीय वनोपज को बनाया आजीविका का माध्यम, वनांचल की महिलाएं बन रहीं सफल उद्यमी

रायपुर । मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से प्रदेशभर में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति मिल रही है। स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास लगातार सफल हो रहे हैं। इसका प्रेरक उदाहरण मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मोहला विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम रामगढ़ में देखने को मिला है, जहां माँ रामेश्वरी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने महुआ के अचार और शहद निर्माण को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से समय पर मिली वित्तीय एवं तकनीकी सहायता के बल पर समूह की महिलाएं आज सफल उद्यमी बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि स्थानीय वनोपज का वैज्ञानिक उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार और आय के स्थायी अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

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10 महिलाओं ने संगठित प्रयासों से लिखी सफलता की कहानी
कभी आर्थिक तंगी और घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली समूह की 10 महिलाओं ने सामूहिक प्रयासों से अपनी आजीविका को नई दिशा दी। पिछले एक वर्ष से वे महुआ का अचार और शहद तैयार कर बाजार में विक्रय कर रही हैं। इस दौरान समूह ने अपने उत्पादों से लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की है। इस अतिरिक्त आय ने न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास और उद्यमिता की भावना को भी बढ़ावा दिया है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
समूह की सदस्य श्रीमती सुशीला कुरेटी बताती हैं कि पहले घरेलू आवश्यकताओं और छोटे-छोटे खर्चों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज वे आत्मनिर्भर हैं। अब वे अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा, परिवार की जरूरतों की पूर्ति और घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना है कि बिहान योजना ने उन्हें केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और समाज में नई पहचान भी दी है।

स्थानीय संसाधनों से सशक्त हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
रामगढ़ गांव की यह पहल महिला सशक्तिकरण, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन और स्वरोजगार का सफल मॉडल बनकर उभरी है। जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के प्रभावी समन्वय से वनांचल की महिलाओं को अपने क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर आय अर्जित करने का अवसर मिला है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ पलायन पर भी अंकुश लगाने में मदद मिल रही है।

अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
माँ रामेश्वरी स्व-सहायता समूह की सफलता से प्रेरित होकर अब आसपास के गांवों की महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार आधारित गतिविधियां अपनाने के लिए आगे आ रही हैं।

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