जमीनी स्तर पर सुशासन और सतत विकास लक्ष्यों को मजबूत करने में जुटा केंद्र, छत्तीसगढ़ में 58,987 पंचायत प्रतिनिधियों व पदाधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

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नई दिल्ली/रायपुर। पंचायतों को अधिक सशक्त, जवाबदेह और विकासोन्मुख बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत देशभर में क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण देकर स्थानीय शासन व्यवस्था को मजबूत बनाया जा रहा है, ताकि वे सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप ग्राम स्तर पर विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर सकें। राज्यसभा में 29 जुलाई 2026 को केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में छत्तीसगढ़ सहित देशभर में संचालित इस अभियान की प्रगति संबंधी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पंचायत, संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय है। इसके बावजूद पंचायती राज मंत्रालय वर्ष 2022-23 से संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। योजना का मुख्य उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और अन्य हितधारकों की संस्थागत एवं प्रशासनिक क्षमता का विकास करना है, जिससे पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार कर उनका बेहतर क्रियान्वयन कर सकें।

संशोधित आरजीएसए योजना के तहत पंचायत प्रतिनिधियों को पंचायत राज अधिनियम, ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी), पंचायत डिजिटल प्लेटफॉर्म, पंचायतों के स्वयं के राजस्व स्रोत (ओएसआर), सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) के स्थानीयकरण सहित विभिन्न विषयों पर नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा बुनियादी प्रशिक्षण, रिफ्रेशर प्रशिक्षण, विषय आधारित प्रशिक्षण और राज्यों की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष प्रशिक्षण भी आयोजित किए जा रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में प्रशिक्षण का दायरा लगातार बढ़ा

प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल के अनुसार छत्तीसगढ़ में पंचायत प्रतिनिधियों एवं पंचायत पदाधिकारियों के प्रशिक्षण का दायरा लगातार बढ़ा है। वर्ष 2022-23 में 1,21,099, वर्ष 2023-24 में 1,63,292, वर्ष 2024-25 में 90,559, वर्ष 2025-26 में 1,82,705 तथा 10 जुलाई 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 में 58,987 प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

डिजिटल पंचायतों के निर्माण पर विशेष जोर

योजना के अंतर्गत पंचायत भवनों का सुदृढ़ीकरण, कंप्यूटर सुविधाओं का विस्तार, पंचायत लर्निंग सेंटर (पीएलसी) की स्थापना तथा पंचायत परिसरों में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के सह-स्थापन जैसे कार्य भी किए जा रहे हैं। डिजिटल शासन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों को 1,111 कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं वर्ष 2022-23 से 130 ग्राम पंचायतों में सीएससी की स्थापना की गई है तथा 1,197 प्रतिभागियों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षित किया गया है।

सतत विकास लक्ष्यों के नौ विषयों पर प्रशिक्षण

पंचायत स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के लिए मंत्रालय ने नौ प्रमुख विषय निर्धारित किए हैं। इनमें गरीबी मुक्त एवं उन्नत आजीविका वाली पंचायत, स्वस्थ पंचायत, बाल-अनुकूल पंचायत, जल-पर्याप्त पंचायत, स्वच्छ एवं हरित पंचायत, आत्मनिर्भर अधोसंरचना वाली पंचायत, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण एवं सुरक्षित पंचायत, सुशासन वाली पंचायत तथा महिला-अनुकूल पंचायत शामिल हैं।

वित्तीय वर्ष 2022-23 में छत्तीसगढ़ में स्वस्थ पंचायत विषय के अंतर्गत 2,168 प्रतिभागियों, स्वच्छ एवं हरित पंचायत विषय के तहत 2,475 प्रतिभागियों तथा महिला-अनुकूल पंचायत विषय में 1,350 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन

राज्यसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) तैयार करने और उसे पोर्टल पर अपलोड करने में भी छत्तीसगढ़ की पंचायतों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। वर्ष 2022-23 में 11,659 ग्राम पंचायतों में से 11,652, वर्ष 2023-24 में 11,656 में से 11,630, वर्ष 2024-25 में 11,713 में से 11,576 तथा वर्ष 2025-26 में 11,693 में से 11,651 ग्राम पंचायतों ने अपनी विकास योजनाएं सफलतापूर्वक अपलोड की हैं।

पंचायत विकास सूचकांक भी बनाया गया

मंत्रालय ने पंचायतों में सतत विकास लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन का आकलन करने के लिए पंचायत विकास सूचकांक (पीडीआई) भी विकसित किया है। इसके माध्यम से ग्राम पंचायतों के कार्य निष्पादन का समयबद्ध मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके अलावा पंचायत विकास योजना तैयार करने, डिजिटल शासन को बढ़ावा देने, पंचायत विकास सूचकांक को ऑनलाइन लागू करने तथा पंचायतों के स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने के लिए भी व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने अपने लिखित उत्तर में कहा कि संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के माध्यम से पंचायतों को प्रशासनिक रूप से अधिक सक्षम, तकनीकी रूप से मजबूत और विकासोन्मुख बनाया जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता में वृद्धि से ग्रामीण क्षेत्रों में सुशासन को मजबूती मिलेगी, योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा और सतत विकास लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता मिलेगी।

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