बस्तर के प्रतिनिधियों ने देखा राष्ट्रपति भवन, बस्तर की संस्कृति का हुआ भव्य सम्मान
महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के आत्मीय स्वागत से बस्तर का प्रतिनिधिमंडल हुआ अभिभूत
रायपुर । राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल के लिए एक अविस्मरणीय और ऐतिहासिक क्षण साकार हुआ। महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर से पहुंचे परगना मांझियों, चालकियों, बस्तर पंडुम के जनजातीय कलाकारों तथा समाज प्रतिनिधियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने सभी अतिथियों का शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया और बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपरा एवं संस्कृति के प्रति अपना विशेष स्नेह व्यक्त किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन और पहल से आयोजित इस विशेष यात्रा ने बस्तर के जनजातीय समाज को देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान किया।


राष्ट्रपति भवन में बस्तर की संस्कृति का जो सम्मान हुआ, उसने प्रतिनिधिमंडल के प्रत्येक सदस्य को गौरव और आत्मविश्वास से भर दिया। प्रतिनिधिमंडल के लिए सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण उस समय आया, जब राष्ट्रपति महोदया ने एक आत्मीय मेजबान की भूमिका निभाते हुए स्वयं अपने हाथों से सभी अतिथियों को भोजन परोसा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रतिनिधियों को दाल परोसी, जबकि उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सभी को मिठाई परोसकर उनका स्वागत-सत्कार किया। राष्ट्रपति भवन में आत्मीयता और अपनत्व से भरे इस दृश्य ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावविभोर कर दिया। बस्तर से आए जनजातीय प्रतिनिधियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।


राष्ट्रपति भवन में गूंजा बस्तर का पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य
इस अवसर पर एक और ऐतिहासिक पल तब आया, जब बस्तर पंडुम के विजेता कलाकारों ने राष्ट्रपति भवन परिसर में अपनी पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। बस्तर की लोक संस्कृति, वेशभूषा और पारंपरिक कला का यह अनुपम प्रदर्शन उपस्थित सभी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना और राष्ट्रपति भवन पहली बार बस्तर की सांस्कृतिक रंगत से सराबोर हो उठा। माहौल ऐसा हुआ कि उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, पूर्व बस्तर आई जी सुंदरराज पी और सभी अधिकारी भी लोकनृत्य में झूमने लगे।

बस्तर की कला अब विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाएगी
राष्ट्रपति महोदया से बात करते हुए कांकेर के पद्म सम्मान से अलंकृत काष्ठ कलाकार अजय मंडावी ने कहा कि बस्तर की कला और संस्कृति विश्व में अद्वितीय है। लंबे समय तक भय और असुरक्षा के वातावरण के कारण इस विरासत को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना संभव नहीं हो पाया था। उन्होंने कहा कि अब सुरक्षा बलों के साहस और सरकार के प्रयासों से बस्तर में शांति का वातावरण स्थापित हुआ है, जिससे कलाकारों को अपनी प्रतिभा दुनिया के सामने रखने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर की कला वैश्विक पहचान बनाएगी।

प्रतिनिधियों ने साझा किए बदलते बस्तर के अनुभव
गढ़िया-लोहंडीगुड़ा परगना के मांझी बलराम कश्यप ने राष्ट्रपति महोदया को बताया कि पहले बस्तर के लोगों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने मांझी समाज की ओर से राष्ट्रपति महोदया को विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया। जिसे राष्ट्रपति ने अपने भाषण में सहृदय स्वीकार भी किया। बीजापुर के मिरतुर परगना के चालकी भरत कश्यप ने बताया कि अब बच्चे बिना किसी भय के विद्यालय जा रहे हैं। गांवों में सड़कें बन रही हैं, दूरसंचार सुविधाओं का विस्तार हो रहा है और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलते बस्तर में लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। दंतेवाड़ा की बस्तर पंडुम विजेता गौर नृत्यांगना श्रीमती लक्ष्मी सोढ़ी ने राष्ट्रपति महोदया से कहा कि जिस बस्तर पंडुम की शुरुआत आपने की थी, उसी प्रतियोगिता की विजेता के रूप में राष्ट्रपति भवन पहुंचना उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में शांति का वातावरण है और लोग मेला, जात्रा एवं मड़ई जैसे पारंपरिक आयोजनों को पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं।

पहली बार दिल्ली के ऐतिहासिक स्थलों का किया भ्रमण
बस्तर के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का विस्तृत भ्रमण कर उसके गौरवशाली इतिहास और विरासत की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान प्रतिनिधियों ने इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और अमर जवान ज्योति का भी अवलोकन किया। बस्तर के लोगों को राजधानी में देख सभी चकित नजरों से उन्हें देख रहे थे, सभी उनके साथ फोटो खिंचा रहे थे। इंडिया गेट के सामने सभी ने मिलकर ‘ऐसा जादू है मेरे बस्तर में’ और अन्य हल्बी-गोंडी गानों पर सभी के साथ सुर में सुर मिला कर आनंद लिया। राजधानी दिल्ली का यह अनुभव विशेष रूप से उन युवाओं के लिए यादगार रहा, जो पहली बार अपने गाँव और बस्तर से बाहर निकल कर देश की राजधानी पहुंचे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के साथ राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। बस्तर के दल ने पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक, जामा मस्जिद, शीशगंज गुरुद्वारा, सरोजनी मार्केट सहित विभिन्न ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व के स्थलों का भी भ्रमण किया है।


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