अमरकंटक में श्रावण के प्रथम सोमवार पर उमड़ा आस्था का महासागर ,
मां नर्मदा का पावन जल लेकर ज्वालेश्वर धाम पहुंचे हजारों कांवड़िए
संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में देवाधिदेव महादेव शिव को समर्पित पावन श्रावण मास के प्रथम सोमवार को मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक पूरी तरह शिवमय हो उठी ।

आज सुबह से ही नर्मदा उद्गम मंदिर , प्राचीन शिवालयों और विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा । “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के गगनभेदी जयघोषों से संपूर्ण क्षेत्र भक्तिरस में डूब गया । श्रद्धालुओं की अटूट आस्था , कांवड़ यात्रियों का उत्साह और सेवा भाव का अद्भुत संगम पूरे दिन देखने को मिला ।

मध्यप्रदेश , छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचे । भक्तों ने मां नर्मदा उद्गम कुंड में विधिवत पूजन-अर्चन कर पवित्र जल भर और कांवड़ में जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए प्राचीन ज्वालेश्वर धाम की ओर प्रस्थान किया । पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन , शिव स्तुति और धार्मिक गीतों की स्वर लहरियां गूंजती रहीं , जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा ।
मां नर्मदा उद्गम का विशेष धार्मिक महत्व
विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाओं के मध्य स्थित अमरकंटक को मां नर्मदा की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है । सनातन परंपरा में नर्मदा जल को अत्यंत पवित्र , पुण्यदायी और मोक्षदायिनी माना गया है । मान्यता है कि श्रावण मास में नर्मदा उद्गम से जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है । यही कारण है कि प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु अपनी कांवड़ यात्रा की शुरुआत अमरकंटक से करते हैं ।
ज्वालेश्वर धाम तक आस्था की पदयात्रा
अमरकंटक से 9 किमी दूरी पर स्थित प्राचीन ज्वालेश्वर महादेव मंदिर श्रावण मास में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है । कांवड़िए नर्मदा उद्गम से जल भरकर पदयात्रा करते हुए ज्वालेश्वर धाम पहुंचते हैं और भगवान ज्वालेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर सुख , समृद्धि , स्वास्थ्य और परिवार की मंगलकामना करते हैं ।

छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
अमरकंटक श्रावण मास में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में छत्तीसगढ़ से आने वाले कांवड़ यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रहती है । पेंड्रा , गौरेला , मरवाही , बिलासपुर , कोरबा , रायगढ़ सहित अनेक जिलों से श्रद्धालु समूहों के रूप में अमरकंटक पहुंचते है । नर्मदा उद्गम से जल लेकर ज्वालेश्वर महादेव में अभिषेक कर उन्होंने अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना करते है ।
मंदिरों में दिनभर गूंजते रहे शिव स्तुति के स्वर
प्रथम श्रावण सोमवार के अवसर पर मां नर्मदा मंदिर , ज्वालेश्वर महादेव मंदिर सहित विभिन्न शिवालयों में विशेष पूजन , रुद्राभिषेक , महामृत्युंजय जाप एवं शिव आराधना के कार्यक्रम आयोजित किए गए । श्रद्धालुओं ने बेलपत्र , धतूरा , पुष्प और नर्मदा जल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किये । दिनभर मंदिरों में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं ।
श्रद्धालुओं की भीड़ से बाजारों में बढ़ी रौनक
श्रावण सोमवार पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से अमरकंटक के बाजारों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला । प्रसाद , फूल-माला , पूजन सामग्री , कांवड़ , धार्मिक वस्तुओं और खान-पान की दुकानों पर दिनभर खरीदारों की भीड़ लगी रही । व्यापारियों के अनुसार श्रावण मास स्थानीय व्यवसाय के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलती है ।
श्रद्धा, संस्कृति और सेवा का अनुपम संगम
श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर अमरकंटक में श्रद्धा , भक्ति , संस्कृति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला । मां नर्मदा उद्गम से ज्वालेश्वर धाम तक कांवड़ यात्रियों की आस्था , शिवभक्ति और अनुशासित पदयात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया । नर्मदा तट से लेकर ज्वालेश्वर धाम तक गूंजते “बोल बम” के जयघोषों ने यह संदेश दिया कि सनातन परंपराएं आज भी जनमानस की आस्था और संस्कृति की सबसे मजबूत आधारशिला हैं ।

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