1.13 करोड़ की निवेश ठगी का खुलासा: ‘वॉश एंड वॉश ब्लैक मनी स्कैम’ में दो अंतरराज्यीय महिला आरोपी गिरफ्तार

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45 करोड़ का निवेश दिलाने का झांसा देकर कारोबारी से 1.13 करोड़ रुपये ठगे, नागपुर से दो महिला आरोपी गिरफ्तार; देशभर में सक्रिय गिरोह के नेटवर्क की जांच तेज

रायपुर। राजधानी रायपुर की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस ने करोड़ों रुपये की हाई-प्रोफाइल निवेश धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए अंतरराज्यीय ठग गिरोह की दो महिला सदस्यों को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने एक कारोबारी को 45 करोड़ रुपये का निवेश उपलब्ध कराने का झांसा देकर 1 करोड़ 13 लाख रुपये की ठगी की। मामले की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब 15 वर्षों से देश के अलग-अलग राज्यों में इसी प्रकार की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क और अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।

पुलिस के मुताबिक बालोद जिले के ग्राम बोरिदकला निवासी एवं सालिक ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर उमेश कुमार सिन्हा ने थाना तेलीबांधा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में कंपनी के विस्तार और नए प्लांट की स्थापना के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात राकेश कौशिक के माध्यम से दीपक सिंह, अभिषेक सिंह, योगी तथा अन्य लोगों से हुई। आरोपियों ने स्वयं को प्रभावशाली लोगों एवं विदेशी निवेशकों से जुड़ा बताते हुए बड़ी निवेश राशि उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।

विश्वास जीतने के लिए रची गई सुनियोजित साजिश

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले कारोबारी का विश्वास जीतने के लिए बड़े अधिकारियों से मुलाकात, फाइल प्रोसेसिंग, सुरक्षा मंजूरी, विदेशी परीक्षण, हाई-पावर केमिकल और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं की कहानी गढ़ी। इसके बाद प्रार्थी को चेन्नई और नागपुर बुलाया गया, जहां उसे कथित विदेशी तकनीक और विशेष रासायनिक प्रक्रिया का प्रदर्शन दिखाया गया।

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आरोपियों ने दावा किया कि विशेष केमिकल की मदद से काले रंग से ढके नोटों को असली भारतीय मुद्रा में बदला जा सकता है। इस तथाकथित प्रक्रिया के दौरान पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल कर ऐसा माहौल बनाया गया कि प्रार्थी को पूरी कहानी पर विश्वास हो जाए। पुलिस के अनुसार यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित “वॉश एंड वॉश (Wash & Wash) ब्लैक मनी स्कैम” का तरीका है, जिसमें नकली रासायनिक प्रक्रिया दिखाकर लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जाता है।

हर बार नए बहाने से मांगी जाती रही रकम

जब प्रार्थी पूरी तरह विश्वास में आ गया तो आरोपियों ने कभी विदेशी केमिकल खरीदने, कभी हाई-पावर केमिकल मंगाने, कभी विदेशी परीक्षण कराने, कभी वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति लेने तो कभी फंड रिलीज की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर अलग-अलग किश्तों में लगातार रकम मांगनी शुरू कर दी। झूठे आश्वासनों और मनगढ़ंत प्रक्रियाओं के जरिए आरोपियों ने कुल 1 करोड़ 13 लाख रुपये अपने खातों और अन्य माध्यमों से प्राप्त कर लिए।

काफी समय तक निवेश नहीं मिलने और लगातार नए बहाने बनाए जाने पर प्रार्थी को ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद उसने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) एवं 61(2) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।

तकनीकी जांच से मिली सफलता

पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला तथा पुलिस उपायुक्त (मध्य जोन) तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा थाना पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। जांच के दौरान दो महिला आरोपियों की पहचान हुई और उनका लोकेशन महाराष्ट्र के नागपुर में मिला।

विशेष टीम तत्काल नागपुर पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से दोनों महिला आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर निवेश दिलाने के नाम पर सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी करना स्वीकार किया।

दो महिला आरोपी गिरफ्तार, मोबाइल और नकदी जब्त

पुलिस ने कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय (24), निवासी कोलकाता और दीपिका पालीवाल (24), निवासी उदयपुर (राजस्थान) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, 26 हजार रुपये नकद, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड सहित लगभग 70 हजार रुपये मूल्य का सामान जब्त किया गया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

देशभर में फैला है ठगी का नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी नागपुर, लखनऊ सहित देश के कई राज्यों में इसी तरह निवेश उपलब्ध कराने, विदेशी फंड रिलीज कराने और ब्लैक मनी को असली नोटों में बदलने का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुके हैं। रायपुर पुलिस अब अन्य राज्यों की पुलिस से समन्वय स्थापित कर आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और उनके नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

गिरोह के अन्य सदस्य फरार, तलाश जारी

पुलिस का कहना है कि इस गिरोह में कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं, जिनकी पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है तथा बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और मोबाइल नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि आगे की जांच में इस गिरोह से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस की आमजन से अपील

रायपुर पुलिस ने आम नागरिकों, उद्योगपतियों और निवेशकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा बड़े निवेश, विदेशी फंडिंग, ब्लैक मनी को असली नोटों में बदलने, विशेष केमिकल या विदेशी तकनीक के नाम पर दिए जाने वाले प्रलोभनों पर बिना सत्यापन विश्वास न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें, ताकि समय रहते ऐसी ठगी से बचा जा सके।

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