विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव के लिए पोषण एवं बाल कल्याण पर राज्य नीति आयोग–यूनिसेफ का मंथन
बस्तर एवं सरगुजा में पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर रहेगा विशेष फोकस
रायपुर । विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में पोषण एवं बाल कल्याण को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग में उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में यूनिसेफ (UNICEF) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं बाल कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने, नवाचारों को बढ़ावा देने तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि पोषण एवं बाल कल्याण किसी भी विकसित और सशक्त समाज की आधारशिला हैं। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर एवं सरगुजा जैसे आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में कुपोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए व्यावहारिक, प्रभावी एवं नवाचारी उपाय अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यूनिसेफ के विशेषज्ञों से ऐसे मॉडल विकसित करने का आग्रह किया, जिनका लाभ प्रत्येक बच्चे, गर्भवती महिला और परिवार तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।

बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न नवाचारों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के लिए पहले जहां पांच इंजेक्शन (खुराक) की आवश्यकता होती थी, वहीं अब एक ही इंजेक्शन से समतुल्य सुरक्षा और लाभ संभव है। इसे माताओं के लिए अधिक सुविधाजनक तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया।

इसके साथ ही बच्चों एवं महिलाओं में एनीमिया (रक्ताल्पता), कुपोषण तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याओं के प्रभावी समाधान पर भी व्यापक विचार-विमर्श किया गया। बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि राज्य नीति आयोग नीति-परामर्श, प्रभावी मॉनिटरिंग तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आयोग यूनिसेफ जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था के सहयोग से बस्तर सहित पूरे राज्य में पोषण एवं बाल कल्याण कार्यक्रमों के लिए साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, अंतर-विभागीय समन्वय तथा निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
यूनिसेफ की चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस सीमा कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग के बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में राज्य शासन के साथ मिलकर कार्य करना यूनिसेफ की प्राथमिकता है। वहीं यूनिसेफ के सामाजिक नीति विशेषज्ञ डॉ. बाल परितोष दाश ने कहा कि पोषण एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में स्थायी और प्रभावी परिणाम तभी प्राप्त किए जा सकते हैं, जब सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करें और नीतियां ठोस आंकड़ों एवं साक्ष्यों पर आधारित हों।
बैठक में इस बात पर सहमति व्यक्त की गई कि स्वस्थ, सुरक्षित एवं सुपोषित बचपन ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की मजबूत नींव है। बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और संरक्षण को सुनिश्चित कर ही भविष्य की पीढ़ी को सक्षम बनाया जा सकता है, जो समावेशी एवं सतत विकास का आधार बनेगी।
बैठक के समापन पर पोषण, बाल कल्याण एवं सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में ठोस, नवाचारी और परिणाम-आधारित रणनीति पत्र तैयार करने पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य “हर बच्चा स्वस्थ, हर भविष्य उज्ज्वल” के संकल्प को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ को विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना है।
बैठक में राज्य नीति आयोग एवं यूनिसेफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया और राज्य में पोषण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए।

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